विचार

उम्माह के पैरोकार इक़बाल ने कैसे बदल दिया था ‘सारे जहाँ से अच्छा’ तराना: कट्टरपंथी थे Pak के जनक

अगर आप इस्लामी कट्टरपंथी अल्लामा इक़बाल का 'सारे जहाँ से अच्छा' गाते हैं तो आपको 'तराना-ए-मिल्ली' के बारे में जरूर जानना चाहिए।

राणा अयूब जैसों को चाहिए प्रोपगेंडा चलाने के लिए माल पानी, वरना जो मोदी सरकार कहेगी वो उसके उलट मायने खुद गढ़ लेंगी

देश के खिलाफ़ राणा अयूब की नफरत का स्तर इतना बढ़ चुका है कि वे देश के पीएम को इस्लामिक देशों के दबाव में देखना चाहती हैं।

पालघर साधु लिंचिंग: हिंदुओं को ‘आतंकी’ कहने वाले अनुराग और लिबरल गैंग अब पढ़ा रहे इंसानियत का पाठ

इस बार मरने वालों में भगवा वेशधारी साधू हैं। हिंदुओं को 'आतंकी' कहने वाले पालघर साधु लिंचिंग पर चुप नहीं बल्कि इंसानियत जैसे शब्दों के साथ...

कोरोना जैसे संकटों को लाइलाज बना सकती है बेहिसाब जनसंख्या

भारत की बेहिसाब जनसंख्या में कोरोना जैसी वैश्विक महामारी अलग तरह की चुनौती पेश करती है। स्वास्थ्य-सुविधाओं और साधनों की भारी कमी के कारण...

पालघर में संतों को किसने मारा: अजीत भारती का सवाल | Ajeet Bharti on Palghar Sadhus Mob Lynching

महाराष्ट्र के पालघर में 2 साधुओं समेत 3 लोगों की हत्या कर दी जाती है। लगभग 200 लोगों की भीड़ से घिरा साधु पुलिस मदद के लिए जाता है, लेकिन...

पालघर में साधुओं की हत्या और मीडिया: ‘3 लोगों’ की मॉब लिंचिंग, ‘चोर’ का भ्रम – हेडलाइन से पाठकों को यूँ बरगलाया

पालघर में साधुओं की हत्या कर दी गई। मीडिया ने छापा, जरूर छापा - भ्रामक हेडलाइन के साथ। साधुओं की हत्या को मात्र 3 लोगों की लिंचिंग बता कर...

आतंकवाद का कोई मजहब नहीं… लेकिन भूख का धर्म होता है! पाकिस्तान-बांग्लादेश में हिन्दुओं की अनदेखी और साजिश

पाकिस्तान-बांग्लादेश में हिंदुओं की दुर्दशा को दुनिया अनदेखा कर रही। शर्मनाक यह कि भारत के करोड़ों हिंदुओं को भी इससे कोई लेना देना नहीं!

तबलीगी जमात का थूक साफ कर रहे लिबरल मूर्खों से पाला पड़े तो क्या करें?

जाहिल और दिमाग से पैदल ऐसे लोग आपको फेसबुक, ट्विटर, व्हाट्सएप जैसी जगहों पर आसानी से दिख जाएँगे।

अरुंधति रॉय जैसे ‘विचारकों’ का इतिहास Google सर्च में कैद है, आपने सर्च किया ये की-वर्ड?

गूगल में अरुंधति रॉय सर्च करते ही एक 'अर्बन नक्सल विचारक' के गैरकानूनी कामों की टाइमलाइन तैयार हो जाती है।

TheTelegraph का झूठ: दलित का खाना सिराज अहमद ने नहीं खाया था लेकिन खबर RSS को बदनाम करने के लिए लिखी

TheTelegraph का झूठ या प्रोपेगेंडा ऐसे समझिए। दलित से खाना ना लेने वाले का नाम सिराज अहमद है, लेकिन इस खबर में फोटो RSS कार्यकर्ताओं की लगाई गई है।

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