विचार

नागरिकता विधेयक से मुस्लिम बाहर: वामपंथियो! हम ‘sick a**hole’ भले हों, लेकिन चलेगी हमारी ही

हिन्दुओं की जैसे दुर्दशा सेक्युलर सरकार ने कर रखी है, उसमें हिन्दुओं को 'सेक्युलरिज़्म' की दुहाई वैसे ही है, जैसे नाज़ी यातना शिविर में पड़े यहूदी से प्रार्थना कि वह अपने शोषकों को जिलाए रखने के लिए कुछ कर दे।

वेश्यावृत्ति व पोर्नोग्राफी को लीगल कर देने से रेप की घटनाओं में कमी आएगी? जानिए क्यों बेकार है ये तर्क

अगर आँकड़ों की बात करें तो प्रति 1000 की जनसंख्या पर उन देशों में बलात्कार की औसत घटनाएँ भारत से ज्यादा ही होती हैं। यहाँ हम इस पर विचार कर रहे हैं कि क्या वेश्यावृत्ति और पोर्नोग्राफी को लीगल करने से रेप में कमी आएगी? इसका जवाब है- नहीं। इसके पीछे कई कारण हैं, जिन्हें आपको समझना होगा।

रवीश जी, रेप में ‘जात’ तो दिख गया आपको, पर मजहबी ‘रेप जिहाद’ पर भी आँख खोलिए

हैदराबाद वाला मामला मजहबी नहीं लगता लेकिन इसका मतलब यह नहीं कि मजहबी बलात्कार होते ही नहीं! रवीश जैसों की कोशिश यह है कि इस घटना का इस्तेमाल कर उन तमाम 'रेप जिहाद' की खबरों को चर्चा से गायब कर दिया जाए जहाँ बलात्कारी का मकसद मजहबी घृणा ही है, और कुछ नहीं।

कॉन्ग्रेस जिस कारण से शिवसेना से बचना चाहती थी, उसी हिंदुत्व का लालच बना गठबंधन का गोंद?

सीएम की कुर्सी को ताकत का स्रोत नहीं बल्कि उस पर एक अवांछित बाँध मानने वाले बाला साहेब का बेटा उसी कुर्सी के लिए हिंदूवाद को ही राम-राम कर मुख्यमंत्री बन गया है।

गाँधी को गोली मारने से गोडसे की देशभक्ति गायब हो जाती है? समय है इस पर खुली चर्चा का

देश के राइट विंग की यही समस्या है कि उसे दीर्घकालिक युद्ध भी लड़ना है, लेफ्ट विंग की स्वीकार्यता भी चाहिए और अपनी नैतिकता भी बचानी है। तुमने न तो संदर्भ देखा, न सुनवाई की, बस विरोधियों के जाल में उलझ कर तुमने साध्वी प्रज्ञा को एक लाइन में नकार दिया। यही सब करना था तो उसे चुनाव क्यों लड़वाया?

अत्यधिक मात्रा में संभोग, घृणा की निर्बाध खेती: वामपंथियों, लिबरलों के हर आंदोलन का एकसूत्री अजेंडा

ऐसी तख्तियाँ क्यों निकल आती हैं कि 'मैं किसी के भी साथ सो सकती हूँ, पर भाजपाई के साथ नहीं?' क्या किसी भाजपाई ने आपको बुलाया सोने के लिए साथ में? क्या भाजपा ने, या मोदी के मंत्रियों ने, मंत्रालयों के प्रवक्ताओं ने कहीं भी यह कहा है कि भाजपा वालों से सेक्स करें?

‘हिजड़ों का शासन’ चलाने वालों के समर्थन से ‘माताश्री का काकभगोड़ा’ बनेंगे मातोश्री के उद्धव

राहुल गाँधी और सोनिया गाँधी के पीएम बनने की बात चलती थी तो बालासाहब पूछते थे कि प्रधानमंत्री का पद भिंडी बाजार में रखी कोई कुर्सी है क्या? बाल ठाकरे के ख़ून पसीनों से सींची हुई पार्टी ने उसके नाम पर शपथ ली, जिसके सामने झुकने वालों को वो हिजड़ा मानते थे।

बाला साहेब के ‘आटे की बोरी’ में कैद हो गया उनका ही बेटा, ‘मातेश्री’ के तट पर अस्त हुआ ‘मातोश्री’ का सूरज

बाल ठाकरे के निधन के बाद नितिन गडकरी ने कहा था, 'हिंदुत्व का विचार उनका हुँकार था'। मौत के 7 साल बाद उद्धव ठाकरे ने उस हुँकार को चीत्कार में बदल दिया है। बदले में मिली सीएम की कुर्सी, जिसकी बाल ठाकरे कभी रिमोट अपने पास रखते थे।

ध्रुव राठी, आकाश बनर्जी, पीईंग हृयूमन, कुणाल कामरा… तुम करो तो प्यार-व्यार, हम करें तो…

वामपंथियों की पैदल सेना में सबसे ज्यादा लोग दिल्ली जैसी जगहों के कॉलेजों के नए बच्चे होते हैं। व्यवस्थित तरीके से उनके दिमाग में झूठ का सहारा ले कर खास धर्म और विचार के खिलाफ जहर भरा जाता है। रवीश और केजरीवाल से ले कर कामरा, राठी, बनर्जी, पीईंग ह्यूमन आदि इसकी पूरी योजना बनाते हैं।

भाजपा को सरकार बनाने से रोकने की वो साजिश जब डिप्टी सीएम को हवाई जहाज पर छापेमारी के लिए भेजा गया

वह सरकार कितनी अनैतिक थी इसका अंदाजा आप इस बात से लगा सकते हैं कि जो डिप्टी सीएम बना था, उसने सीएम की पार्टी से बगावत कर ही चुनाव जीता था। वे सीएम के बेटे को ही हराकर विधानसभा पहुॅंचे थे।

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