विचार

इंदिरा की नाक और राहुल का दिमाग वाली प्रियंका जी, भारत कॉन्ग्रेस की बपौती नहीं है

कॉन्ग्रेस ने पार्टी फ़ंड से इसरो नहीं बनवाया था, न ही डीआरडीओ के कर्मचारियों और वैज्ञानिकों को सोनिया गाँधी के हस्ताक्षर वाले चेक जारी हुआ करते थे। कॉन्ग्रेस के नाम ये संस्थान महज़ संयोग के कारण हैं क्योंकि सबसे पहले सत्ता में वही आई।

वामपंथियों के बेचे हुए सपने खरीदने वाले भारतीय अब ‘अंतरिक्ष के सेनानी’ बन चुके हैं

उन बुद्धिजीवियों के मुँह पर भी तमाचा पड़ा है जिन्हें मई 1988 में किए गए ऑपरेशन शक्ति पर आपत्ति थी। भारत तकनीकी विकास में कभी पीछे नहीं रहा। हमने अपने बलपर वह प्रत्येक तकनीक विकसित की है जो विश्व हमें नहीं देना चाहता था।

भारतीय कूटनीति की जीत: चीन-पाक अलग-थलग, US से आई 3 बड़ी ख़बरें करती है इसकी पुष्टि

24 घंटे के भीतर अमेरिका से तीन ख़बरें आई। तीनों एक से बढ़कर एक। तीनो ख़बरें भारतीय कूटनीति की सफलता का परिचायक तो हैं ही, साथ ही चीन-पाकिस्तान के अलग-थलग पड़ने का संकेत भी देती है।

एतना देर हो गया, सबूत नहीं माँगोगे ASAT से सेटेलाइट मार गिराने का?

इंतजार कीजिए, कोई मूर्ख नेता और धूर्त पत्रकार जल्द ही यह पूछेगा कि जो सेटैलाइट मार गिराया गया, उसका धुआँ तो आकाश में दिखा ही नहीं, उसके पुर्ज़े तो कहीं गिरे होंगे, उसका विडियो कहाँ है।

नई शोधनीति में ‘राष्ट्रहित’ की अनुशंसा पर ये बिलबिलाहट क्यों?

ये वैसा ही है जहाँ अवार्ड वापसी गिरोह पुरस्कार की राशि डकार कर मोमेंटो ही वापस करता है और दबाव बनाता है।

फ़्री-लान्स विरोधकर्मी से ऑन-डिमांड-एथीस्ट बनने वाली वामपंथन से नाराज हुए मार्क्स चचा

JNU वामपंथी की हालिया गतिविधियों के तार अगर एक सिरे से जोड़ते हुए देखा जाए, तो पता चलता है कि ये कोई विद्यार्थी या नेता या समाजवादी नहीं, बल्कि सिर्फ और सिर्फ एक शहरों में रहने वाला अनपढ़, कूप-मण्डूक, गतानुगतिक है, जिसे किसी भी हाल में क्रांति की तलाश थी और समय आने पर उसने अपनी क्रांति को परिभाषित भी कर डाला है, जिसका उदाहरण ऑन डिमांड आस्तिकता वाली शेहला राशिद है।

नाम: राहुल गाँधी, कमजोरी: गणित, परिणाम: कॉन्ग्रेस की पीसी में बीसी

राहुल ने जब यह बोल दिया, और फिर कैलकुलेटर लेकर चिदम्बरम सरीखे जानकार लोग बैठे तो पता चला कि आलू से सोना भी बनने लगे, हर खेत में फ़ूड प्रोसेसिंग यूनिट लगाकर, उसकी छतों पर भी खेती की जाए, फिर भी इतना पैसा पैदा करना नामुमकिन हो जाएगा।

अंध-क्षेत्रीयता: 85% आरक्षण माँग कर दिल्ली को कश्मीर बनाना चाह रहे हैं केजरीवाल

ख़ुद केजरीवाल का जन्म हरियाणा स्थित भिवानी में हुआ। पढ़ाई के लिए वो पश्चिम बंगाल गए। नौकरी उन्होंने झारखण्ड के जमशेदपुर में की। समाज सेवा उन्होंने कोलकाता में की। राजनीति वो दिल्ली में कर रहे हैं। हाँ, इलाज कराने वो बंगलुरु जाते हैं। इसके लिए उन्हें किसी आरक्षण की ज़रूरत पड़ी क्या?

विरोध प्रदर्शन की आड़ में JNU के नक्सलियों द्वारा कुलपति की पत्नी पर हमला कहाँ तक उचित है?

आज देश की बड़ी-बड़ी परीक्षाएँ कम्प्यूटर के माध्यम से होती हैं। ऐसे में इस कदम का विरोध करना केवल मूर्खता को दर्शाता है। लेकिन अगर इसके बावजूद किसी पढ़े- लिखे समुदाय की ‘भीड़’ को इससे शिक्षा व्यवस्था में खतरा नज़र आता है, तो हर विरोध प्रदर्शन का एक तरीका होता है।

किसने और क्यों शास्त्री जी के चेहरे पर चन्दन मल दिया था? पढ़िए उनके नाती संजय नाथ की जुबानी

"मैं रूस से आए निमंत्रण के बाद अपनी नानी के साथ ताशकंद गया, जब मैं उनके कमरे में गया (जहाँ शास्त्रीजी की मृत्यु हुई थी) तो मुझे पता चला कि उनके कमरे में एक घंटी तक नहीं थी। सरकार ने झूठ बोला था कि उनके कमरे में कई फोन थे। क्यों?"

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