विचार

विडियो: कारवाँ के एजाज़ अशरफ़, मूर्खता विरासत में मिली है या कारवाँ वाले डिप्लोमा कराते हैं?

पुलवामा के वीरों की जाति: ये काम दिलीप मंडल जैसे लोगों का था, अब 'नए एंगल' की तलाश में कारवाँ ने इस नाले में भी अपनी जगह बना ली है।

रवीश जी गालियाँ आपके पत्रकारिता से तंग जनता का आक्रोश है, इसे भारत-माँ के नाम मत कीजिए

जब आपको तारीफें मिली, प्रसिद्धि मिली, आज आप जो कुछ हैं, जब वो सब मिला तो आपने कभी नहीं कहा कि ये सब 'भारत माँ' की वजह से है। और जब आपकी 'पक्षकारिता' की वजह से गालियाँ मिल रही हैं तो किस हक़ से इसे 'भारत माँ' को समर्पित कर रहे हैं?

जिन्हें गुमान था कि वो लाइन खुद बनाते हैं, चुनाव आते ही लाइन में खड़े हो गए!

अपने ही बयानों से विरोधाभास की स्थिति खड़ा करने वाले शत्रुघ्न लगातार भाजपा में तानाशाही का आरोप मढ़ते रहते हैं साथ ही यह भी कहते हैं कि जो कुछ भी हो जाए पटना साहिब से ही चुनाव लड़ेंगे।

धिक्कार अशरफ़ और Caravan! 40 जवानों के शवों पर तुमने जाति का नंगा नाच किया है

अशरफ़ और कारवाँ ने इन जवानों की जाति का पता लगाने के लिए जिस नीचता का परिचय दिया, उसे जान कर आप कारवाँ मैगज़ीन के पन्नों का टॉयलेट पेपर की तरह प्रयोग करने से भी बचेंगे। मृतकों के परिजनों से हुतात्मा की जाति पूछना इनकी नीचता का परिचायक है।

बाप का, बेटा का… सबका बूथ लूटेगा! कॉन्ग्रेस की ‘आज़ाद’ पॉलिटिक्स का ख़ुलासा

जहाँ की जनता ने पिछली बार उन्हें BJP सांसद के रूप में लोकसभा भेजा था, वहीं की जनता के सामने उन्होंने कॉन्ग्रेसी गुलामी कुबूल करते हुए स्वीकारा कि उनके पिताजी और खुद उनके लिए भी कॉन्ग्रेस के लोगों ने बूथ कब्जा किया था।

‘लायर’ के श्रीयुत वेणु जी, जैसा कि माओवंशी कहा करते हैं, ‘थोड़ा पढ़िए मुद्दे पर’, घाघपना तो चलता रहेगा

वेणु जी वायर ही पढ़ते हैं, वायर पर ही लिखते है, वायर से ही बिजली पाते हैं, और वायर से ही इस तरह के फर्जी आर्टिकल से शॉर्ट सर्किट करके आग लगाते हैं। यही कारण है कि सत्य से बहुत दूर रहते हैं क्योंकि प्रोपेगेंडा पोर्टल पर तथ्य तो कोने में छुपा रहता है।

सिर्फ और सिर्फ जिहादी हिंसा का संरक्षक है आतंकवाद

कुछ गिने-चुने मुस्लिम ही ऐसे थे, जो सोशल मीडिया पर कुरीतियों और बुराइयों को स्वीकार कर उनका विरोध करते थे। लेकिन उनके एकाउंट को रिपोर्ट कर डिलीट करवा दिया गया। उनकी अभिव्यक्ति की आजादी ही छीन ली गई, क्योंकि वो सुधार की बात करते हैं।

मसूद अज़हर पर गूँगी-बहरी हैं अंतरराष्ट्रीय संस्थाएँ, क्योंकि वो खुलेआम Pak से दे रहा है धमकी

मसूद अज़हर एक तक़रीर में खुलेआम पुलवामा का नाम ले रहा है। वह पाकिस्तानी सैनिकों को धन्यवाद दे रहा है। वह फिदाइनों की तारीफ़ कर अन्य को फिदाईन बनने के लिए उकसा रहा है। यह सब पाकिस्तान की सरजमीं पर वहाँ के आर्मी की सरपरस्ती में हो रहा है।

क्विंट वालों ने टिक-टॉक विडियो से रॉकेट साइंस लगाकर ‘डेन्जरस हिन्दुत्व प्रोपेगेंडा’ कुछ यूँ निकाला

जब ये प्लेटफ़ॉर्म इस तरह की जोकरई और मूर्खतापूर्ण हरकतों से भरा हुआ है, तो वहाँ आपको राम मंदिर को लेकर भी 'ख़तरनाक राजनीति', या 'एक्सट्रीम हिन्दुत्व अजेंडा' के नाम पर सबसे ख़तरनाक पोस्ट यही मिलेगा कि 'मैं आरएसएस को पसंद करती हूँ', या यह कि 'मेरा जीवन संघ के लिए है।'

इमरान खान, AK47 गाड़कर आतंकियों के ग्रेनेड से रिवर्स स्विंग मत कराइए, फट जाएगा

भैंस, गधे और कार बेचकर पैसे जुटाने वाले प्रधानमंत्री को यह सोचना चाहिए कि बंदूक़ों और आरडीएक्स के साथ-साथ आतंकियों को सैलरी पर रखना पाकिस्तानी हुकूमत की अजीबोग़रीब नीतियों की तरफ इशारा करता है।

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