डॉक्टर मनमोहन सिंह ने तत्कालीन वायुसेना प्रमुख को सीमा पार आतंकियों पर 'एयर स्ट्राइक' करने से रोक दिया था क्योंकि उन्हें युद्ध का डर था। नेहरू भी सेना पर भरोसा नहीं करते थे। अब भारत जवाब देता है क्योंकि अब सरकार के पास मजबूत राजनीतिक इच्छाशक्ति है।
रंगभेद और जेहादी आतंकवाद में कोई विशेष अंतर नहीं दिखाई पड़ता। आइसीस (ISIS) द्वारा औरतों को सेक्स स्लेव बनाना, पाकिस्तान में आतंकी संगठन जमात-उद-दावा की शरिया अदालतों द्वारा अमानवीय दंड देने वाले फैसले सुनाना जैसे कारनामें जेहाद को रंगभेद से अलग नहीं करते।
चुनाव आने वाले हैं महबूबा जी, आपकी भी मजबूरी होगी आतंक और आतंकियों को प्रश्रय देना, लगातार उनके पक्ष में बयान देना। शायद आपको भी शांति अच्छी नहीं लगती होगी?
अब वामपंथी मीडिया गिरोह के धूर्त पत्रकारों का इंतजार है कि वो कैसे हमें ज्ञान देते हैं कि 'जब पाकिस्तान शांति के लिए हाथ बढ़ा रहा है, तब हम उस पर हमला क्यों कर रहे हैं'।
कॉन्ग्रेस भले ही जवानों की इस माँग को पूरा करने में विफल रही हो लेकिन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के दिमाग में यह चीज तब से थी, जब वो पीएम नहीं बने थे। इस मंच से उन्होंने किया था कि सत्ता में आते ही देश के सैनिकों की याद में युद्ध स्मारक का निर्माण कराया जाएगा।
मोदी के ऐसे प्रतीकात्मक कार्य आपको नौटंकी ही लगेंगे क्योंकि आप न तो लोयथम रिचर्ड को जानते हैं, न ही नाइदो तनियम को। आप उन हजारों उत्तर-पूर्व के लोगों को नहीं समझ पाते, और उनकी वेशभूषा पर टिप्पणियाँ करते हुए, उसके बालों के कारण उसकी जान ले लेते हैं।
वाड्रा ख़ुद ऐसा काम कर रहे हैं जिससे वो एक दयावान के रूप में ख़ुद को सामने रख सकें और इसके लिए वो नेत्रहीन और ग़रीब लोगों की तस्वीरों का इस्तेमाल करके जनता का ध्यान भटकाने का काम कर रहे हैं।
सतना में 2 मासूमों की अपहरण के बाद हत्या की घटना ठीक ऐसे समय पर घटी है, जब मध्य प्रदेश सरकार अधिकारियों के तबादलों में व्यस्त थी। 12 फरवरी को चलती स्कूल बस से अगवा किए गए जुड़वाँ भाई श्रेयांश और प्रियांश रावत के शव 13 दिन बाद बरामद हुए हैं।