विचार

AAP का भ्रष्टाचार: INDI गठबंधन वाले कॉन्ग्रेस ने ही ‘कट्टर ईमानदार’ का सर्टिफिकेट किया कैंसल, कोर्ट ने भी फटकारा

तेलंगाना कॉन्ग्रेस नेता ने आरोप लगाया कि दिल्ली की शराब नीति से हासिल पैसों के जरिए AAP ने गोवा चुनाव लड़ा, नतीजा यह है कि कॉन्ग्रेस हार गई।

‘पूजा करो तो मातृभूमि की, सेवा करो तो देशवासियों की’: शिकागो से 4 साल बाद लौट स्वामी विवेकानंद ने भावुक होकर माँगी थी ‘धरती...

शिकागो में 11 सितंबर 1893 को स्वामी विवेकानंद के ओजस्वी भाषण ने दुनिया को मंत्रमुग्ध कर दिया। उनकी वाणी भारत के पुनरुत्थान का शंखनाद थी।

माना आपकी तरह ‘एलीट’ नहीं था मुकेश चंद्राकर, पर जिसे तड़पा-तड़पाकर मारा गया वह भी पत्रकार ही था… कॉन्ग्रेस की ‘चाटुकारिता’ में अपने ही...

राजदीप सरदेसाई ने यह दिखाने की कोशिश की कि मुकेश की हत्या का आरोपित सुरेश कॉन्ग्रेस का नेता भले ही था लेकिन बाद में वह भाजपा में चला गया था।

नागनाथ और साँपनाथ की राजनीति के बीच प्रशांत किशोर BPSC आंदोलन से कितना उठा पाएँगे लाभ?: जिस बिहार की राजनीति में ‘जाति’ ही प्रमुख...

बीपीएससी आंदोलन के जरिए प्रशांत किशोर ने अपनी राजनीतिक उपस्थिति दर्ज कराने की कोशिश की है, लेकिन बिहार की राजनीति का जातिगत और जमीनी स्वरूप उनके आड़े आ सकता है।

धार्मिक विवादों की समय से सुनवाई के लिए जरूरी है रिलीजियस ट्रिब्यूनल: कोर्ट और सरकार को अब इस दिशा में सोचने की क्यों है...

केंद्र की मोदी सरकार एवं अन्य राज्य सरकारों को धार्मिक स्थलों से संबंधित विवादों के समाधान के लिए एक अलग ट्रिब्यूनल की स्थापना करनी चाहिए।

सजग-जागृत-समृद्ध हिंदू और अखंड भारत: 1 जनवरी 2025 का संकल्प और बाकी 364 दिन भी यही

किसी RSS, किसी BJP ने अखंड भारत का सपना देखा, इसलिए आप भी मत देखिए। सपना देखिए क्योंकि यह सभी हिंदुओं के अस्तित्व की लड़ाई है।

अटल जी का व्यक्तित्व अपनी तरफ खींचता था, उनका रोपा बीज आज वटवृक्ष: PM मोदी ने वाजपेयी की 100वीं जयंती पर लिखा लेख

पीएम मोदी ने पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी को याद करते हुए उनकी 100वीं जयंती पर एक विशेष लेख लिखा है।

अंबेडकर, हिंदुत्व आंदोलन और उनकी भूमिका: एकजुट, मजबूत राष्ट्र… जातिवाद के जंजाल से बाहर निकल राष्ट्रहित की सोच

कॉन्ग्रेस अमित शाह के छोटे से एडिटेड वीडियो क्लिप का इस्तेमाल यह साबित करने के लिए कर रही है कि बीजेपी अंबेडकर से नफरत करती है।

फिर से वही जामिया, फिर से वही दिसंबर, फिर से वही ‘ला इलाहा इल्लल्लाह’ के नारे… देश को फूँकने की वामपंथियों-कट्टरपंथियों की वह साजिश...

साल 2019 में जिस जामिया में सीएए-एनआरसी के विरोध के नाम पर हिंसा को अंजाम दिया गया था, वहाँ के छात्रों ने एक बार अपने परिसर में 'ला इलाहा इल्ललाह' की नारेबाजी की।

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