Monday, July 15, 2024
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बैग पैक कीजिए और निकल जाइए, बजट में मोदी सरकार ने कर दी है व्यवस्था… आप देखेंगे अपना देश तो ऐसे बढ़ेगा रोजगार और अर्थव्यवस्था, केवडिया-काशी है गवाह

केंद्रीय वित्त मंत्री ने कहा कि उस क्षेत्र तक पहुँचने के लिए प्रत्यक्ष कनेक्टिविटी (जैसे कि अच्छी सड़कें, राजमार्गों से जुड़ाव), वर्चुअल कनेक्टिविटी, टूरिस्ट गाइड और स्ट्रीट फ़ूड के अलावा पर्यटकों की सुरक्षा के उच्च मानकों को भी ध्यान में रखा जाएगा।

केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने बुधवार (1 फरवरी, 2023) को अगले वित्त वर्ष के लिए देश का आम बजट पेश किया, जिसमें घरेलू पर्यटन को बढ़ाना देने के लिए भी एक योजना की चर्चा की गई। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सरकार ‘देखो अपना देश’ के माध्यम से पर्यटन के क्षेत्र में क्रांति लाने जा रही है। इसके तहत जिन क्षेत्रों को पर्यटन स्थल को विकसित किया जाना है, वहाँ रोजगार और कमाई के अवसरों में वृद्धि का प्रयास किया जाएगा।

केंद्रीय वित्त मंत्री ने संसद में अपने बजट अभिभाषण में स्पष्ट किया कि इसके तहत क्षेत्र विशेष में कौशल विकास और उद्यमिता का समन्वय स्थापित किया जाएगा। अर्थात, वहाँ के लोगों को इस लायक बनाया जाएगा कि वो बढ़ते पर्यटन का फायदा उठा सकें और साथ ही कुछ ऐसा नया शुरू कर सकें (अथवा पहले से जो कारोबार/व्यापार कर रहे हैं – उसे आगे बढ़ा सकें और समय के हिसाब से ढाल सकें), जिससे उनकी कमाई बढ़े, पर्यटकों की वृद्धि के साथ ही।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अक्सर देश की जनता से कहते रहे हैं कि वो अपने देश में घूमे, इसे देखें। किसी से छिपा नहीं है कि भारत में पर्यटन की असीम संभावनाएँ हैं। जलीय क्षेत्र हैं, बड़े जंगल हैं, दुनिया की सबसे बड़ी पर्वत श्रृंखला है, मैदान हैं, मंदिर हैं, किले हैं (मंदिर और किले यहाँ की उच्च आर्किटेक्चर वाली क्षमता को दिखाते हैं) और एक बड़े तटीय क्षेत्र में समुद्री बीच भी कई हैं। इस योजना का मुख्य केंद्र मध्यम वर्ग है, जिसे ‘देखो अपना देश’ के तहत अपने देश के अलग-अलग हिस्सों में जाने के लिए प्रोत्साहित किया जा रहा है।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सीमावर्ती गाँवों के विकास पर भी जोर दे चुके हैं, क्योंकि उनके हिसाब से वो देश की आँख और कान होते हैं। सीमावर्ती गाँवों में पर्यटन बढ़ने के साथ ही वहाँ लोगों की जनसंख्या बढ़ेगी (वो वीरान नहीं होंगे, पलायन रुकेगा) और साथ ही नए कारोबारों के फलने-फूलने से विकास भी होगा। इससे पड़ोसी देशों के साथ भारत के रिश्ते भी सुधरेंगे और उस पार से होने वाली गड़बड़ियाँ स्वतः ही कम होंगी। इसी के लिए ‘वाइब्रेंट विलेज प्रोग्राम’ विकसित किया गया था।

सीमावर्ती गाँवों में इसी के तहत बुनियादी विकास को भी आगे बढ़ाया जाएगा। इसी तरह पहले ‘स्वदेश दर्शन योजना’ भी शुरू की गई थी। ‘थीम आधारित पर्यटन’ भी इसी का एक हिस्सा है, अर्थात जो अलग-अलग पर्यटन सर्किट हैं वहाँ का एक अलग थीम हो। वो थीम, जो बाक़ी देश-दुनिया को इस तरफ लुभाए। पर्यटन को आगे बढ़ाने के उद्देश्य से 50 ऐसे गंतव्य स्थलों को तेज़ी से विकसित किया जाएगा, जहाँ पर्यटन आगे बढ़ सके।

अब बात करते हैं कि पर्यटकों के अनुभवों को अच्छा बनाने के लिए क्या किया जाएगा। स्पष्ट है, एक घरेलू पर्यटन अकेले या अपने परिवार-दोस्तों के साथ सी जगह जाएगा जो उसे लुभाएगा और जो सके बजट में हो। कोई अपना काम छोड़ कर छुट्टियाँ बिताने जाना चाहता है, ताकि उसे एक नया अनुभव मिले, आजकल अच्छे बैकग्राउंड के साथ तस्वीरों का भी ट्रेंड है। अतः, पर्यटकों के अनुभव को अच्छा बनाने के लिए भी इस बजट में प्रावधान हैं।

केंद्रीय वित्त मंत्री ने कहा कि उस क्षेत्र तक पहुँचने के लिए प्रत्यक्ष कनेक्टिविटी (जैसे कि अच्छी सड़कें, राजमार्गों से जुड़ाव), वर्चुअल कनेक्टिविटी, टूरिस्ट गाइड और स्ट्रीट फ़ूड के अलावा पर्यटकों की सुरक्षा के उच्च मानकों को भी ध्यान में रखा जाएगा। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि एक क्षेत्र विशेष को इसके तहत एक ‘संपूर्ण पैकेज’ में विकसित किया जाना है। घरेलू ही नहीं, विदेशी पर्यटक भी इसके तहत केंद्र में रहेंगे। सुरक्षा – ये मानक खासकर महिला पर्यटकों के लिए आवश्यक हैं।

भारत में कई ऐसे लोग भी हैं जो अच्छा कमाते हैं और विदेश घूमने जाते हैं, जो इस योजना के तहत बाहर न जाकर देश के भीतर ही घूमेंगे। होटल में रहने के दाम कम किए जाएँगे और साथ ही ट्रेवल के लिए जो ज़रूरी दाम हैं वो भी काम किए जाएँगे – क्योंकि तभी मध्यम वर्ग लुभेगा और अपना देश घूमेगा। इससे भारत की अर्थव्यवस्था को भी रफ़्तार मिलेगी। पर्यटन क्षेत्रों में जाने के लिए, खासकर एंट्री के लिए वो पैसे लगते हैं – उसे भी कम किया जाएगा।

इसका एक और बड़ा उद्देश्य है कि विविधताओं वाले एक विशाल देश में, जहाँ हर जगह की परंपराएँ और संस्कृतियाँ अलग-अलग हैं, उनसे लोगों को परिचित कराया जाए। पर्यटन क्षेत्र विशेष में जाकर वहाँ की परंपरा-संस्कृति को समझेंगे, वहाँ के उत्पाद खरीदेंगे और वहाँ से जुड़ी यादें अपने साथ लेकर जाएँगे। ऐसा इसीलिए, क्योंकि वहाँ के एडवेंचर और संस्कृति वाले गतिविधियों एवं क्रियाकलापों का वो हिस्सा बनेंगे।इस योजना की मार्केटिंग की भी व्यवस्था है।

पहले भी बताया गया था कि ‘देखो अपना देश’ के तहत अपने राज्य के बाहर के 15 स्थलों को 1 वर्ष के भीतर घूमने, ‘अतुल्य भारत’ की थीम का पालन करने और शपथ-पत्र भर कर इसे केंद्र सरकार की वेबसाइट पर अपलोड करने पर इसका पूरा खर्च केंद्र सरकार देगी। सभी राज्यों को भी पर्यटन के क्षेत्र में भागीदार बनाया जाएगा और ‘मिशन मोड’ में इसे आगे बढ़ाया जाएगा। वैसे भी पीएम मोदी खुद पात्यतन को लेकर गंभीर हैं।

याद कीजिए, पहले विदेशी राष्ट्राध्यक्षों के सरे कार्यक्रम नई दिल्ली में ही हुआ करते थे। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस ट्रेंड को बदला। चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग दो बार भारत आए तो एक बार वो तमिलनाडु के महामल्ल्पुरम तो एक बार गुजरात के अहमदाबाद ले जाया गया। इसी तरह जापान के तत्कालीन प्रधानमंत्री शिंजो अबे जब भारत आए थे तो उन्हें वाराणसी भ्रमण कराया गया। हाल ही में G20 शेरपाओं की बैठक उदयपुर में हुई। इससे अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सन्देश जाता है कि भारत में सिर्फ दिल्ली-मुंबई ही नहीं है, और भी बहुत सरे स्थल हैं।

वाराणसी और उज्जैन का कॉरिडोर बन गया है। अयोध्या में भव्य राम मंदिर बन रहा है। मथुरा कॉरिडोर विकसित होने की योजना जल्द शुरू होगी। केवडिया जैसे गुजरात के छोटे से गाँव में सरदार वल्लभभाई पटेल की ‘स्टेचू ऑफ यूनिटी’ के निर्माण से पूरे नर्मदा जिले की तस्वीर बदल गई। वाराणसी में पिछले 5 वर्षों में पर्यटकों की संख्या में 10 गुना इजाफा हुआ है। केवडिया में पहले एक साल में ही 29 लाख से अधिक पर्यटक पहुँचे थे।

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अनुपम कुमार सिंह
अनुपम कुमार सिंहhttp://anupamkrsin.wordpress.com
भारत की सनातन परंपरा के पुनर्जागरण के अभियान में 'गिलहरी योगदान' दे रहा एक छोटा सा सिपाही, जिसे भारतीय इतिहास, संस्कृति, राजनीति और सिनेमा की समझ है। पढ़ाई कम्प्यूटर साइंस से हुई, लेकिन यात्रा मीडिया की चल रही है। अपने लेखों के जरिए समसामयिक विषयों के विश्लेषण के साथ-साथ वो चीजें आपके समक्ष लाने का प्रयास करता हूँ, जिन पर मुख्यधारा की मीडिया का एक बड़ा वर्ग पर्दा डालने की कोशिश में लगा रहता है।

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