पुलिस के आरोप पत्रों और निष्पक्ष संस्थाओं की रिपोर्टों से यह समझ में आता है कि एक-एक घटना और हर किरदार पहले से तय था। डोनाल्ड ट्रंप की यात्रा उनके लिए अवसर था। जब 'कुछ बड़ा' करके दुनिया का ध्यान अपनी तरफ़ खींचा जा सकता था।
कोरोना को हल्के में लेने वाले, डॉक्टरों पर हमला करने वालों, थूकने, मल-मूत्र त्यागने वाले अधम श्रेणी के मनुष्यों की तुलना स्वामी जगन्नाथ के सेवायतों से करना धूर्तता है।
एक तरफ एक मजहब है, जो कि अपने मूल रूप में प्रसारवादी, राजनैतिक और ऐतिहासिक तौर पर हिंसक और लूट-पाट से ले कर आतंक का शासन स्थापित करने पर तुला हुआ है, और दूसरी तरफ उसी की प्रसारवादी नीतियों को झेल कर हर बार खड़ा होने वाला धर्म! दोनों एक हैं ही नहीं, आप क्यों मिलाना चाह रहे हो?