सामाजिक मुद्दे

सुशांत को नापसंद करने वाला बॉलीवुड-माफिया कौन? क्यों चुप है शत्रुघ्न सिन्हा से लेकर बिहारी कलाकारों की लॉबी?

क्या बॉलीवुड में इतनी स्पर्धा है कि अपनी ही जमीन से जुड़े भाई के लिए आप खड़े तक नहीं हो सकते! फिर खुशबूदार कपड़ों, रंगीन चश्मे में छिपे...

कितना खोखला है अवसाद से घिरे व्यक्ति को कहना- प्लीज रीच आउट टू मी

क्या हम अवसाद में घिरे इन्सान से 'प्लीज़ रीच आउट टू मी' की औपचारिकता निभाकर एक बड़ी समस्या को नजरअंदाज तो नहीं कर देते?

‘मेवात में धर्मांतरण करवाने वाले RSS के एजेंट होंगे, दीन नहीं देता जबरन धर्म परिवर्तन की इजाजत’

"प्रियंका चोपड़ा जब वह किसी फिरंगी ईसाई से शादी करती हैं, तब किसी के पेट में दर्द नहीं होता। लेकिन मेवात पर सब सवाल उठा देते हैं।"

रामचंद्र गुहा का अंधत्व: गुजरात में धन+संस्कृति का कॉम्बिनेशन, बंगाल के पास ‘ममता’ और यही इनकी संस्कृति

बंगाल के पास ‘ममता दीदी’ हैं, यही इनकी संस्कृति। गुजरात के पास नरेंद्र दामोदरदास मोदी हैं, यह भी गुजरात की संस्कृति है। इस पहचान पर गुजरात...

मुरारी बापू जी, अली-मौला इतना ही पसंद है तो टोपी लगा कर नमाज पढ़ लीजिए, सत्संग-प्रवचन का नाम क्यों ले रहे?

एक तरफ एक मजहब है, जो कि अपने मूल रूप में प्रसारवादी, राजनैतिक और ऐतिहासिक तौर पर हिंसक और लूट-पाट से ले कर आतंक का शासन स्थापित करने पर तुला हुआ है, और दूसरी तरफ उसी की प्रसारवादी नीतियों को झेल कर हर बार खड़ा होने वाला धर्म! दोनों एक हैं ही नहीं, आप क्यों मिलाना चाह रहे हो?

अमरोहा में दलित हत्या पर छाती पीटने वाले जौनपुर में दलितों के गाँव फूँके जाने पर चुप क्यों हैं?

क्या दलितों की पीड़ा की बात तभी की जाएगी जब आरोपित सवर्ण हों? आरोपित समुदाय विशेष के होंगे तो पीड़ितों का दलित होना भूला दिया जाएगा?

रोजगार और मजदूरों की भलाई के लिए चीन की ‘स्किल मैपिंग’ नीति पर योगी सरकार, एक साथ होंगे कई सुधार

चीन में स्किल मैपिंग डेटाबेस तैयार करने व विभिन्न औद्योगिक इकाइयों में आवश्यकतानुसार श्रम-शक्ति उपलब्ध कराने की ऐसी ही व्यवस्था है। इससे...

मेवात बना मिनी पाकिस्तान, पुलिस लाचार क्यों: अजीत भारती का सवाल | Ajeet Bharti on Mewat being mini Pakistan

मेवात को दलितों का कब्रिस्तान कहा जा रहा। यहाँ 500 में 103 गाँव हिन्दूविहीन बना दिए गए। 84 गाँवों में सिर्फ 4 या 5 हिन्दू परिवार रह गए हैं।

डर का माहौल है… क्योंकि हिंदुत्व बड़ी निर्दयी चीज है, इससे ज्यादा लचक तो आतंकवाद में है

जिस हिंदुत्व का रोना रोकर पाकिस्तान से लेकर भारत तक वाममार्गी इसे खतरनाक जताने की कोशिश करते हैं उसका न तो दहशतगर्दी का अतीत है, न वर्तमान। फिर भी वही है खतरा।

जिहाद उनका, नेटवर्क उनका, शिकार आप और नसीहतें भी आपको ही…

आप खतरे से घिरे हैं। फिर भी शुतुरमुर्ग की तरह जमीन में सिर गाड़े बैठे हैं। जरूरी है कि ​जमीन से सिर निकालिए, क्योंकि वक्त इंतजार नहीं करेगा।

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