जिसकी परवरिश एक तय तरीके से हुई है, वो अचानक से उस संकाय में प्रोफेसर बना दिया जाए जो पूरे विश्व में हिन्दू धर्म और आस्था पर उठते सवालों या शंकाओं का निवारण करता है? आप मुझे एक उदाहरण दिखा दीजिए कि किसी इस्लामी संस्थान में हिन्दू प्रोफेसर शरीयत पढ़ाकर मौलवी तैयार कर रहा हो!
पटना यूनिवर्सिटी में उनके लिए वो पागलपन था कि छात्र उन्हें छूने के लिए मारामारी करते थे। अमेरिका ने उन्हें 'जीनियसों का जीनियस' कहा था। जिसके निधन के बाद राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री ने शोक जताया, उनका पार्थिव शरीर 2 घंटे सड़क पर धूल फाँकता रहा। वशिष्ठ बाबू, काश आप भारत लौटते ही नहीं!
अपने अंतर्मन में हर हिन्दू यह बात जानता था कि श्री राम व राम का नाम हिन्दू धर्म की आत्मा है। राम गए तो हिन्दू धर्म नहीं बचेगा। वह आस्था, वह श्रद्धा जो हमारे रक्त और हमारी हड्डियों में समाई हुई है। राम का ‘तत्व’ ही वह शाश्वत धारा है जिसने हिन्दू समाज को विषम-से-विषम परिस्थिति में भी स्पंदित व जीवित रखा है, तथा सदैव रखेगी।
गरीबों के बच्चों की बात करने वाले ये भी बताएँ कि वहाँ दो बार MA, फिर एम फिल, फिर PhD के नाम पर बेकार के शोध करने वालों ने क्या दूसरे बच्चों का रास्ता नहीं रोक रखा है? हॉस्टल को ससुराल समझने वाले बताएँ कि JNU CD कांड के बाद भी एक-दूसरे के हॉस्टल में लड़के-लड़कियों को क्यों जाना है?
यह दूसरा मजहब यदि सचमुच सहिष्णु है तो तत्काल कम से कम काशी और मथुरा के मंदिरों को खुद खाली करे और हिंदुओं के साथ वहाँ भव्य मंदिर बनवाए। बाकी, 30 हज़ार मंदिरों की तो बात भी नहीं हुई है….
जस्टिस गांगुली का कहना है कि अल्पसंख्यकों ने अरसे तक वहाँ मस्जिद देखी है, जिसे तोड़ डाला गया। साथ ही संविधान के अस्तित्व में आने से पहले वहॉं मस्जिद थी। इसलिए उन्हें इस फ़ैसले को समझने में मुश्किल आ रही है।
बाबरी मस्जिद का टूटना भले ही भारतीय कानून की दृष्टि में एक आपराधिक घटना है, लेकिन हिन्दुओं के इतिहास के हिसाब से यह उस आस्था के साथ न्याय है जिसके मंदिर की दीवार पर मस्जिद खड़ी की गई थी।
देश के कई मुस्लिम आज भी कबायली प्रवृतियों का अनुसरण करते नजर आते हैं। अल्पसंख्यक इलाकों में अशिक्षा, भुखमरी, दरिद्रता और तमाम प्रकार की गरीबी आज भी उसी तरह से नजर आती है, जिस हाल में बहादुर शाह जफ़र छोड़कर गए थे।
आज़ादी के बाद से ही 'सेक्युलरासुर' सरकारें गौ भक्तों को हिकारत भरी नज़रों से देखती रही हैं। 7 नवंबर 1966 को गौ भक्तों के दमन का वह आदेश भी "इंदिरा इज़ इंडिया, इंडिया इज़ इंदिरा" के अंदाज़ में ही दिया गया था।
गाजियाबाद... वो शहर, जो रिकॉर्डधारी है - प्रदूषण रैंकिंग में लगातार देश के अग्रणी शहरों की सूची में बने रहने के लिए। एक है झरिया। वो शहर, जहाँ लोग चाहे जिस भी रंग का शर्ट पहन सुबह घर से निकलें, शाम को लौटते सभी एक ही रंग का शर्ट पहन कर - काला!