सत्ता के परिवर्तन और समय के चक्र से कभी-न-कभी कॉन्ग्रेस, माकपा, हिन्दू कारसेवकों पर गोली चलवाने वाले 'मुल्ला मुलायम' की सपा जैसे लोग वापिस आ ही जाएँगे। उस समय अगर राम मंदिर सरकारी नियंत्रण में रहे तो क्या होगा, ये कभी सोचा है?
चूँकि भाषाई बाध्यता है कि इस नृशंस हत्या का जश्न मनाने वाले जिहादी मानसिकता के मुसलमानों को आप एक स्तर तक ही कुछ कह सकते हैं वरना इनकी परवरिश तो नाली के कीचड़ में मिली विष्ठा में लोटते उस जीव की तरह ही है जिसका नाम लेना मैं चाहता नहीं।
रमा लक्ष्मी के लिए हिन्दुओं के धर्म पर हुए हमले का सबूत लाना इतना बड़ा 'पाप' है कि ऐसे 'पापी' अरुण शौरी के लिबरलों के चहेते बनने से उन्हें दुःख हो रहा है।
जिस धर्म के हजारों बड़े मंदिर तोड़ दिए गए, उनकी आस्था पर सिर्फ इस मकसद से हमला किया गया कि ये टूट जाएँ और यह विश्वास करने लगें कि उनका भगवान भी स्वयं के घर की रक्षा नहीं कर पा रहा, उस धर्म के लोग जब अपनी आस्था को पहचानने को खड़े हुए हैं तो उन्हें स्कूल और हॉस्पिटल की याद दिलाई जा रही है?
इतनी दुर्भावना ले कर ज़िंदा ही क्यों हैं ऐसे लोग? इतनी घृणा ले कर हर दिन कैसे बिता रहे हैं लोग? क्या ये आश्चर्य की बात नहीं है कि आपको समुद्र तट साफ भी चाहिए, और कोई इसे एक जन-अभियान बनाना चाहता है तो आपको दर्द होने लगता है?
मुझे यह कोई समझा दे कि भारत में 'पाकिस्तान मुर्दाबाद' का नारा क्यों नहीं लगेगा? किसी कट्टरपंथी को इस नारे से आपत्ति क्यों है? तुम्हारे सामने अगर कोई 'पाकिस्तान मुर्दाबाद' कहता है, तो तुम इकट्ठा हो कर, पत्थर मारने की जगह 'हिन्दुस्तान जिंदाबाद' क्यों नहीं कहते?
हाँ, हमें मौलिक आराधना करनी होगी, शक्ति का प्रत्युत्तर शक्ति से ही देना होगा, शिव और शक्ति को एक साथ साधना ही होगा, तभी इन म्लेच्छ शक्तियों की पराजय निश्चित होगी। जब तक सिद्धि न हो, समर को टाल कर सिद्धि करनी होगी…
किसी भी अदालत का काम धार्मिक मान्यताओं, रीति-रिवाजों और उसमे लोगों की आस्था से छेड़छाड़ करना नहीं है। पशुओं पर अत्याचार की बात करने वाले पहले देखें कि मांस उद्योग के लिए जानवरों पर होने वाला क्रूरतापूर्ण व्यवहार कितना जायज़ है?
यह भी चंद दिनों का ख़ब्त है। अभी आप पूरे देश के बुद्धिजीवियों, कार्यकर्ताओं को केरल और चेन्नै के बहाने गाली दे रहे हैं, लेकिन यह भूल जा रहे हैं कि आज के युग में आर्थिक बल ही सब कुछ है। बिहार यहाँ नीचे से पहले पायदान पर है।