सामाजिक मुद्दे

‘हिन्दू’ और ‘इनटॉलेरेंस’ का रोना रोने वालों, पहले दलितों को बाल कटाने का अधिकार तो दिला दो

छुआछूत हिन्दू समाज को उसी पायदान पर खड़ा करता है जिस पर समुदाय विशेष पर्दा, हलाला, बुरका और तीन तलाक के चलते खड़े हैं- इंसान से उसकी गरिमा का हक छीनने वाला चाहे तीन तलाक हो, हलाला हो, या छुआछूत, वह बराबर निंद्य है।

ऋचा भारती को आप ने कहा क़ुरान बाँटो, उसे ‘रंडी साली’, ‘फक योर सिस्टर’ कहने वाले क्या बाँटें मी लॉर्ड?

हो सकता है अंजुमन इस्लामिया वालों को ‘फक योर सिस्टर’ का या ‘तेरी माँ मेरी रखैल’ आदि का मतलब मालूम न हो, लेकिन कोर्ट के जजों को तो ज़रूर पता होगा कि इन शब्दों से एक लड़की की ‘मोडेस्टी आउटरेज’ होती है। और यह क़ानूनन जुर्म है।

खानदानी सेलेब्स के पाँव पर लोटने वाली मीडिया को कंगना ने दिखाया आइना, इस बेचैनी का कारण क्या?

बॉलीवुड में अच्छा रूतबा रखने वाले सेलेब्स ने मीडिया को न जाने कितनी बार ज़लील किया लेकिन मजाल है कि किसी पत्रकार ने उफ़ तक किया हो! सुदूर पहाड़ी कस्बे से आई एक सेल्फ-मेड महिला ने आइना क्या दिखा दिया, गिरोह के गठन की ज़रूरत आन पड़ी!

सभी मर्द एक जैसे… जबरन ब्रम्हचर्य ले डूबता है? – कंगना के बहाने कहानी चर्च और हॉलीवुड की

जबरन ब्रम्हचर्य को किसी सामाजिक संस्था पर थोप देना, जिसका मुख्य उद्देश्य कुछ और है, वैसे ही हानिकारक परिणाम देगा, जैसे गलत तरीके से किए गए योग के आसनों से होगा। इसे जबरन लोगों पर थोपने के नतीजे बिलकुल वैसे ही होंगे जैसे चर्च के लिए हुए हैं।

ता चढ़ि मुल्ला (फर्जी) बाँग दे: ‘जय श्री राम’ न कहने पर मारा, हम अदरक करेंगे, लहसुन करेंगे

मोदी के जीतते ही ऐसी खबरों में अचानक से इजाफा कैसे हो गया? आखिर आधी खबरें झूठी क्यों साबित हो रही हैं? दर्जन भर मंदिर तोड़े गए, मूर्तियाँ विखंडित हुईं, और हर बार आरोपित या तो 'शांतिप्रिय' है, या अज्ञात।

जिसने हिंदुस्तान को ‘ईसाई राष्ट्र’ बनाने का ख्वाब देखा था, RSS को उससे सीखने की जरुरत नहीं Scroll

हज़ारों हिन्दुओं को ज़िंदा जला देने और शरीर छेद कर टाँग देने वाला पुर्तगालियों का Goa Inquisition शायद ईसाईयत के इतिहास के सबसे काले अध्यायों में से एक है। गोम्स साहब का इसके खिलाफ एक भी लफ्ज़ दर्ज नहीं है इतिहास में... और RSS को इनसे सीखने की जरुरत है!!!

व्यक्तिगत रूप से हम हिन्दू सभ्यता को बचाए रखने के लिए आखिर क्या कर सकते हैं?

हिन्दू धर्म और प्रथाओं, परम्पराओं के प्रचार-प्रसार में शामिल लोगों को भी हमेशा सचेत रहना चाहिए कि हमारे ज्ञान और प्रणालियों को इतना धूमिल या व्यवसायीकृत न किया जाए कि उनके मूल रूप, उनकी आत्मा से छेड़-छाड़ होने लगे या वह क्षीण हो जाए।

उत्तराखंड की यूनिवर्सिटी में धरना: छात्र अभी भी पढ़ रहे शीत युद्ध, रूस उनके लिए है महाशक्ति

पिछले 22 दिनों से पिथौरागढ़ महाविद्यालय के छात्र पुस्तकों और शिक्षकों के लिए सड़क पर हैं। पोस्टर और बैनरों की मदद से अपनी बातें पहुँचाने की कोशिश कर रहे हैं। आम लोगों के जेहन में ये बात पहुँचाने की कोशिश की जा रही है कि एक आवाज बनकर ही बदलाव लाया जा सकता है।

मंदिर पर हमला, शिवलिंग पर पेशाब, मूर्तियों को तोड़ना, पत्थरबाजी: ये ‘डरे हुए लोग’ चाहते क्या हैं?

दिन में 5 बार लाउडस्पीकर से अजान देने वालों को मंदिर में 2 बार भजन बजाने से आपत्ति कैसे हो जाती है? ये किस तरह की सोच है कि तुम्हारे लाउडस्पीकर से आती आवाज़ इलाके का हर कान, चाहे या न चाहे सुनेगा ही, लेकिन दूसरे समुदाय ने भजन बजाया तो तुम मंदिर में घुस कर मूर्ति उखाड़ कर ले जाते हो!

मंदिर ध्वंस और इस्लामी हमलों पर हिन्दू आखिर चुप क्यों रह जाता है?

आज हमें सक्रिय लोगों की ज़रूरत है, जो इस सन्नाटे को तोड़ कर हिम्मत के साथ बोलें। हिन्दुओं को याद दिलाएँ कि वह गुलाम नहीं, बल्कि अपने भाग्य-विधाता थे।

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