“कॉन्ग्रेस को महाराष्ट्र के मुद्दे पर दिक्कत हो रही है। इसीलिए उन्हें बार-बार सुप्रीम कोर्ट जाना पड़ रहा है। लेकिन उनको शायद याद नहीं है कि राजस्थान में सहयोगी पार्टी होने के बावजूद बसपा के सभी विधायकों को उन्होंने तोड़ लिया था, तब उन्हें संविधान की याद नहीं आ रही थी।”
सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को फ्लोर टेस्ट का आदेश दिया है, जिसके बाद मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस को सदन में बहुमत साबित करना होगा। उससे पहले सदन के सबसे वरिष्ठतम सदस्य को प्रोटेम स्पीकर चुना जाएगा। शाम 5 बजे तक पूरी प्रक्रिया संपन्न करा ली जाएगी।
“एर्नाकुलम शहर के पुलिस आयुक्त कार्यालय के बाहर एक आदमी ने मेरे चेहरे पर मिर्च पाउडर छिड़क दी। पुलिस बहुत गैर जिम्मेदार है और उन्होंने उस बदमाश को गिरफ्तार करने की कोशिश नहीं की, जिसने उन पर हमला किया।”
कॉन्ग्रेस नेता मनीष तिवारी ने कहा है कि वे हमेशा सोचते हैं कि अगर अमेरिका में मुंबई जैसा हमला होता तो वह पाकिस्तान का बुरा हाल करता। मनमोहन सरकार ने 26/11 के बाद वैसी सख्ती नहीं दिखाई थी, जिसकी उस वक़्त दरकार थी।
सुप्रीम कोर्ट ने सदन में वोटिंग की विडियोग्राफी कराने के भी आदेश दिए हैं। साथ ही कहा है वोटिंग ओपन बैलेट से होगा। सदन के सबसे वरिष्ठ सदस्य प्रोटेम स्पीकर होंगे।
प्रिया चौहान ने हाईकोर्ट में एक याचिका दाखिल की है। इसमें उन्होंने कहा है कि राज्य में भाजपा-शिवसेना को जनता ने जनादेश दिया है। इसलिए उन्हें ही मिलकर सरकार बनानी चाहिए।
जिस उद्धव ठाकरे के विधायक आज सोनिया गाँधी के नाम पर शपथ ले रहे हैं, उन्होंने ही कभी जवानों के अपमान का आरोप लगा कर राहुल गाँधी से पूछा था कि वो 26/11 के वक़्त कहाँ थे? 26/11 के बाद चर्चित रही थी राहुल गाँधी की 'पार्टी ऑल नाइट' और प्रियंका के बेतुके बयान।
उद्धव ने इस दौरान आक्रामक रुख अख्तियार करते हुए कहा कि शिवसेना क्या चीज है, अब पता चलेगा। उन्होंने एनसीपी के साथ गठजोड़ को सही बताते हुए यहाँ तक कह दिया कि उनका गठबंधन अगले 30 सालों तक चलेगा। विधायकों को निष्ठावान रहने की शपथ भी दिलाई गई।
प्रधानमंत्री मोदी ने विपक्षी गठबंधन पर हमला किया और कहा कि कॉन्ग्रेस, झामुमो और राजद भाजपा के ख़िलाफ़ एक साथ चुनाव लड़ रहे हैं। उन्होंने कहा, "महागठबंधन सिर्फ़ सत्ता हथियाने के लिए बनाया गया था। अगर विपक्ष जीत गया, तो राज्य की स्थिति फिर से अस्थिर हो जाएगी।"
बंगाल में घुसपैठियों और शरणार्थियों की अधिकांश बस्तियाँ उन जगहों पर बसी हुई हैं जोकि राज्य सरकार की हैं। मगर यहाँ बसने वाले लोग दरअसल मूल रूप से भारतीय नहीं हैं इसीलिए उन्हें अक्सर विरोध का सामना करना पड़ता है।