प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा कृषि कानूनों को वापस लिए जाने की घोषणा के बाद अब मौलाना अरशद मदनी ने 'नागरिकता संशोधन कानून (CAA)' को भी रद्द करने की माँग की है।
कार्यकर्ताओं को भरोसे में नहीं लिया या संचार व्यवस्था कमजोर रही? भीड़तंत्र वाले 'ठेकेदारों' के हिंसक आंदोलन के बाद क्या करे केंद्र सरकार? आगे इस तरह की बलैकमेलिंग से निपटने का रास्ता क्या हो?