सुधीर चौधरी ने ज़ी न्यूज़ पर ही एक शो के दौरान जम्मू-कश्मीर में 'कमजोर कानूनों' की आड़ में चल रहे जमीन घोटालों के सच को 'जमीन जिहाद' के नाम से सामने लाया था।
सबा नकवी खुद को पत्रकार कहती हैं। लेकिन ऐसा लगता है कि सिंधिया के इस्तीफे से कॉन्ग्रेस से ज्यादा उन्हें दर्द हुआ है। भाजपा के खिलाफ अक्सर जहर उगलने वाली सबा नकवी को उम्मीद है कि कमलनाथ सब ठीक कर देंगे।
NDTV की निधि राजदान 'Kashmirosint' नामक ट्विटर हैंडल से अक्सर बातचीत किया करती थीं। अब सामने आया है कि ये ट्विटर अकाउंट आतंकवादियों द्वारा संचालित किया जाता था और इसके द्वारा प्रोपेगंडा व फेक न्यूज़ फैलाया जाता था। दिल्ली दंगों में भी इसका इस्तेमाल किया गया।
दिलबर नेगी की उम्र महज 20 साल थी। दंगाइयों ने हाथ-पैर काट उन्हें जिंदा जला दिया था। मुस्लिम भीड़ की दरिंदगी को छिपाने के लिए प्रोपेगेंडा पोर्टल वायर ने लिखा है कि नेगी की मौत 'जलने के कारण हुए घाव से हुई'। न इस मामले में गिरफ्तार शाहनवाज का जिक्र है न नेगी के साथ हुई क्रूरता का।
राह चलते किसी को पकड़ लो। उससे कुछ बुलवा दो। फिर उसे TV पर दिखाओ... और किसी को बदनाम कर दो। जब हंगामा हो तो सोशल मीडिया पर चुपके से एक ट्वीट डाल दो। - यह NDTV का फॉर्मूला है। दिल्ली में हुए हिंदू विरोधी दंगों में कपिल मिश्रा को बदनाम करने के लिए भी यही तरीका अपनाया NDTV ने, लेकिन दाँव उल्टा पड़ गया - बहुत गाली पड़ रही है।
NDTV का रिपोर्टर, कैमरा और माइक - सामने खड़ा संजय गुप्ता नाम का एक आदमी। इस आदमी के अनुसार कपिल मिश्रा के 'भड़काऊ' भाषण के बाद हिंसा भड़की। लेकिन असली खबर इसके बाद है। NDTV इस आदमी को कपिल मिश्रा का मकान मालिक बताता है, जबकि सच्चाई यह है कि संजय नाम को कोई भी शख्स कपिल मिश्रा का कभी भी मकान मालिक नहीं रहा।
दोनों प्रतिबंधित चैनलों पर आरोप है कि दिल्ली दंगों के दौरान रिपोर्टिंग में किसी विशेष समुदाय के पूजा स्थल पर हमले की खबर दिखाई गई है और उस पर एक समुदाय का पक्ष लिया गया। केंद्र सरकार ने अपने आदेश में कहा कि चैनलों ने दिल्ली हिंसा में पक्षपातपूर्ण रिपोर्टिंग की थी।
द वायर नामक इस प्रोपोगंडा साइट ने अंकित शर्मा के वीभत्स मर्डर को झुठलाने की न सिर्फ कोशिश की थी बल्कि दिल्ली के हिन्दू विरोधी दंगों में इस्लामिक भीड़ द्वारा हिन्दुओं पर बरपाए गए कहर को भी नजरअंदाज करने का कुत्सित प्रयास किया था।
वेम्पती ने बीबीसी की योगिता लिमये की उस रिपोर्ट का भी हवाला दिया है जिसमें दिल्ली पुलिस को एकपक्षीय बताया गया है। लेकिन, उस दंगाई भीड़ का जिक्र नहीं है जिसने हेड कॉन्स्टेबल रतनलाल की जान ली।
द प्रिंट के पत्रकार ने कपिल मिश्रा से इंटरव्यू के लिए समय देने की गुहार लगाते हुए कहा कि बीजेपी नेता को हर जगह से ख़ासा समर्थन मिल रहा है। उसने कहा कि वो 'द प्रिंट' में उन पर लेख अथवा प्रोफाइल तैयार करना चाहता है।