सोशल मीडिया के जरिए सामने आ रहे ये वीडियो दिल्ली के अशोक नगर के बताए जा रहे हैं। वीडियो में देखा जा सकता है कि कुछ लोग मस्जिद के ऊपर चढ़कर मस्जिद के स्पीकर नीचे फेंक रहे हैं और उस पर कोई झंडा फहरा रहे हैं।
डोनाल्ड ट्रंप और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मंगलवार को दिल्ली में संयुक्त प्रेस कॉन्फ्रेंस किया। इस दौरान उन्होंने कई विषयों पर बातचीत की। CAA के सवाल पर डोनाल्ड ट्रम्प ने प्रधानमंत्री मोदी की जमकर तारीफ की। उन्होंने हुए कहा कि धार्मिक आजादी पर भारत अच्छा काम कर रहा है।
"लोग असंवेदनशील और अदूरदर्शी लोगों को सत्ता में बैठाने की कीमत चुका रहे हैं। भारत में नागरिकता कानून 1955 लागू था और उसमें किसी संशोधन की जरूरत नहीं पड़ी थी। तो कानून में अब संशोधन की जरूरत क्यों पड़ी? संशोधन (सीएए) को तुरंत रद्द कर देना चाहिए।’’
भारतीय प्रवासियों ने पाकिस्तान में एक नाबालिग हिंदू लड़की महक कुमारी, जिसे जबरन इस्लाम में परिवर्तित किया गया था और सिंध में मुस्लिम व्यक्ति से शादी कराई गई थी, के लिए न्याय की माँग की। प्रदर्शन के दौरान प्रदर्शनकारियों ने 'जस्टिस फॉर महक कुमारी', 'स्टैंड अप फॉर ह्यूमन राइट्स' जैसे पोस्टर लेकर नारे लगाते दिखे।
"अपने-आप को कमतर मत आँकिए। विरोध प्रदर्शन जारी रहेगा। ये तब तक चलता रहेगा, जब तक दोनों उल्टी न कर दें। इंशाअल्लाह, हमारे बहुत सारे लोग जो ज़मीन पर उतरे हुए हैं और इस कोशिश में लगे हुए हैं कि एनआरसी एवं एनपीआर लागू नहीं हो, वे सफल होंगे।"
दंगाई मोहम्मद शाहरुख जब बन्दूक से फायरिंग करते हुए आगे बढ़ रहा था, तब एक जाँबाज पुलिसकर्मी को उसकी बन्दूक के सामने आकर उसे रोकने का प्रयास करते हुए देखा गया। बावजूद इसके शाहरुख गोलियाँ बरसता रहा।
देश के लिए जान देने वाले, दंगाइयों के हाथों मारे जाने वाले और अपना पूरा जीवन जनता की सुरक्षा में खपा देने वाले जवान के लिए कोई नेता आवाज़ क्यों नहीं उठा रहा? हिंसा करने वालों का नाम क्यों नहीं ले रहा?
सोशल मीडिया पर लिबरल गिरोह ने दंगाइयों के बचाव का सिलसिला तेज़ कर दिया है। पुलिस किसी पत्थरबाज को शिकंजे में ले रही है, तो उसकी फोटो वायरल कर उसे 2002 के गुजरात दंगे से जोर कर दिखाया जा रहा है। दंगाइयों को बढ़ावा दिया जा रहा है।
"गुजरात में 2002 में मुस्लिमों के हुए नरसंहार में दलित फुट सोल्जर थे। उन्होंने मुस्लिम महिलाओं का रेप कर और आदमियों की हत्या करने का घृणित काम किया था। मैं उन पर कभी यकीन नहीं करती।"