बीते दिनों जम्मू-श्रीनगर हाईवे से ट्रक में सवार होकर आए चार आतंकियों ने टोल पर तैनात सीआरपीआफ के जवानों पर हमला कर दिया था। इस जवाबी कार्रवाई में सेना के जवानों ने तीनों आतंकियों को मौके पर ही ढेर कर दिया था।
"केजरीवाल ने कहा था कि वो इनकम टैक्स की नौकरी छोड़ कर आए हैं, ये कर दूँगा, वो कर दूँगा- और मैं उन चक्करों में फँस गया। पहले कहते थे कि उप-राज्यपाल उनकी छाती पर दाल रगड़ रहे थे। अब वो दाल कहाँ चली गई?"
पुलिस ने सुरक्षा व्यवस्था कड़ी करने के लिए सड़क को दोनों ओर दो स्थानों पर बेरिकेडिंग लगाई है। इसके साथ ही धरने में शामिल होने वाले लोगों की कड़ाई से जाँच की जा रही है। धरने से करीब 100 मीटर दूर बेरिकेडिंग लगाई गई है।
“जब मैं SDPI के नाम का उल्लेख करता हूँ तो विपक्ष क्यों उत्तेजित हो रहा है? क्या वे कह रहे हैं कि मुझे SDPI और उग्रवाद के बारे में बात नहीं करनी चाहिए?” SDPI एक चरमपंथी इस्लामी राजनीतिक संगठन है, जो केरल और देश के अन्य कई हिस्सों में कई सांप्रदायिक हमलों के पीछे है।
सीएए विरोध के दौरान दिल्ली में हिंसा भड़काने के पीछे केजरीवाल की पार्टी के विधायक अमानतुल्ला खान का नाम आया था। जहाँ एक तरह ये ख़बर सुर्खियाँ बन रही हैं, दूसरी तरफ केजरीवाल हनुमान चालीसा का पाठ कर के हिन्दू वोटरों को रिझाने में लगे हैं।
इस नेक काम के लिए उन्होंने बैंक में एक खाता भी खुलवा लिया है। जिसमें वे हमेशा पैसे डालेंगे ताकि गौरी (बच्ची) की शिक्षा और परवरिश में कोई दिक्कत ना आए। उनके अनुसार उन्होंने गौरी को गोद लेने के लिए देश-विदेश से कई लोगों ने संपर्क किया है।
वहाँ भारत का ऐसा नक्शा लगाया गया है, जहाँ उत्तर-पूर्व भारत को देश से अलग दिखाया गया है। ऐसा दिखाया गया है कि उत्तर पूर्वी भारत को शेष भारत से अलग काट दिया गया है। इससे साफ़ मालूम होता है कि शाहीन बाग़ प्रदर्शन के पीछे देशविरोधी मानसिकता काम कर रही है।
"केजरीवाल मासूम चेहरा बनाकर दिल्ली की जनता से बार-बार पूछ रहे हैं कि क्या मैं आतंकवादी हूँ। हाँ, आप आतंकवादी हो, इसके बहुत सबूत हैं। आपने खुद कहा था कि मैं अराजकतावादी हूँ। अराजकतावादी और आतंकवादी में बहुत ज्यादा अंतर नहीं होता।"
शाहीन बाग़ के एक प्रदर्शनकारी ने मृत बच्ची के सम्बन्ध में पूछे गए सवाल के जवाब में कहा- "वो अल्लाह की बच्ची थी, अल्लाह ने उसे बुला लिया।" कितनी आसानी से एक इंसानी ग़लती को उपरवाले के सिर मढ़ दिया गया और कोई मीडिया आउटरेज भी नहीं। उस बच्ची ने क्या अपनी सहमति दी थी कि मुझे सीएए-NRC के विरोध में प्रदर्शन करने ले चलो?
"यह कोई संयोग नहीं है, बल्कि सोचा-समझा प्रयोग है। ये राष्ट्र की सौहार्दता को खंडित करने का एक कुत्सित प्रयास है। संविधान और तिरंगे को सामने रखते हुए ज्ञान बॉंटा जा रहा है और असली साजिश से ध्यान हटाया जा रहा है।"