डॉक्टर के मुताबिक उन लोगों ने इस बीच उनकी 3 वीडियो बनाई और बाद में उन्हें नारोल ड्रॉप कर दिया। जिसके बाद वे शिकायत करने थाने पहुँचे और आपबीती पुलिस को बताई।
"मेरी हालत बहुत ख़राब है और मैंने पाकिस्तान और दुनियाभर में कई लोगों से मदद की गुहार लगाई है लेकिन अभी तक मुझे कोई मदद नहीं मिली है। हालाँकि, पाकिस्तान में कई क्रिकेटरों की समस्याओं को सुलझाया गया है। मैंने एक क्रिकेटर के नाते पाकिस्तान के लिए अपना सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन किया और मुझे इसका गर्व है।"
CAA विरोध में सिर्फ़ तिरंगा और महात्मा गाँधी की तस्वीर लेकर लोग चल रहे? सब कुछ शांति से हो रहा? देश में कहीं कोई दंगा नहीं? प्रोपेगेंडा पत्रकार राजदीप ने तो यही कहा है। लेकिन सोशल मीडिया पर उन्हें उनकी औकात बता दी गई - फोटो, वीडियो के साथ, प्रमाण देकर।
सोनिया गाँधी इटली से यहाँ आई हैं और उन्होंने नागरिकता ले ली थी, लेकिन यह लोग पाकिस्तान में सताए गए हमारे हिन्दू और सिख भाइयों को मिल रही नागरिकता का विरोध कर रहे हैं। पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान भी उनके समूह का हिस्सा हैं, वे एक ही भाषा बोलते हैं।"
"नैशनल एनआईसीयू रेकॉर्ड के अनुसार, शिशुओं की 20 प्रतिशत मौतें स्वीकार्य हैं, जबकि कोटा में शिशु मृत्यु दर 10 से 15 प्रतिशत है जो खतरनाक नहीं है क्योंकि अधिकतर बच्चों को गंभीर हालत में अस्पताल लाया गया था।"
ईसाई संगठनों की अगुआई कर रहे सोनू जाफ़र ने अपनी शिक़ायत में बताया कि शो की एंकर फ़राह खान ने भारती सिंह और रवीना टंडन को एक अंग्रेज़ी शब्द ‘Hallelujah’ लिखने को कहा। इन दोनों ने ब्लैकबोर्ड पर ‘Hallelujah’ शब्द की स्पेलिंग लिखी। इसी दौरान...
24 साल तक कानूनी लड़ाई के अलावा नाम्बी नारायणन की एक कहानी और भी है। कहानी राजनीति और साजिश वाली। उस कहानी के अनुसार पूर्व रॉ अधिकारी ने भारत के उप-राष्ट्रपति रहे हामिद अंसारी पर कई गंभीर आरोप लगाए। यह तब हुआ जब एक पत्रकार चिरंजीवी भट ने...
शुक्रवार को होने वाली जुमे की नमाज़ के मद्देनज़र पूरे उत्तर प्रदेश में हाई अलर्ट घोषित। शरारती तत्वों पर ड्रोन से भी नज़र रखी जा रही है। 20 ज़िलों में इंटरनेट सेवा बंद। इसके अलावा, राज्य में पहले से ही धारा-144 लगी हुई है।
जिस पैम्पलेट में प्रोफेसरों के हस्ताक्षर के साथ दावा किया गया था कि 51 प्रोफेसर CAA के विरोध में हैं, फ़र्ज़ी है। उस पैम्पलेट में कहा गया था कि ये क़ानून स्वीकार्य नहीं है और ये बँटवारे की भावना फैला रहा है। अब कई प्रोफेसरों ने ऐसी किसी बात का समर्थन करने से इनकार किया है।
सीपीआई सरीखे राजनीतिक दलों ने जनरल रावत के बयान की आलोचना की है। कॉन्ग्रेस नेता दिग्विजय सिंह ने कहा कि नेता वो भी नहीं होते हैं, जो अपने लोगों को सांप्रदायिक हिंसा के लिए उकसाते हैं। साथ ही उन्होंने पूछा कि क्या 'जनरल साहब' उनकी बातों से सहमत हैं?