इस दौरान कॉन्ग्रेस कार्यकर्ताओं और मीडिया को दूर रखा गया, जिसका कॉन्ग्रेसी कार्यकर्ताओं ने विरोध किया। कार्यकर्ताओं ने अपनी ही पार्टी के नेताओं पर आरोप लगाया कि वे उन्हें प्रियंका से मिलने नहीं दे रहे। नाराज कार्यकर्ता आपस में ही भिड़ गए और...
इंडिया टुडे समूह के पत्रकार राहुल कंवल इस वीडियो में बता रहे हैं कि किस प्रकार उनके 2 खोजी पत्रकारों- जमशेद खान और नितिन जैन की स्पेशल इन्वेस्टिगेशन टीम ने कथित ABVP कार्यकर्ता अक्षत अवस्थी का पर्दाफाश किया है।
जम्मू के जगती कैंप जाइए, दिल्ली के मजनू का टीला जाइए। देखिए वहाँ के कश्मीरी पंडितों के कुछ परिवारों की हालत। देखिए उनकी महिलाएँ क्या काम करने को मजबूर हैं! इनके लिए संविधान क्या कहता था 1990 में? इनके लिए संविधान अब क्या कहता है? इसके लिए न्यायपालिका क्या कह रही थी 1990 में? इनके लिए न्यायपालिका अब क्या कह रही है?
"वे चारों लोग चाहते थे कि मैं अरेबिक में वो शब्द बोलूँ। मैं डर गया था और मेरे मन में ख्याल आ रहा था कि वे मुझे मार देंगे क्योंकि उन्होंने कहा था कि उनके पास चाकू है और उन्हें कोई गवाह नहीं चाहिए।"
पुलिस ने बताया कि पीड़िता और इस अपराध के पीछे का मास्टमाइंड महबूर मियाँ खान पिछले एक साल से संबंध में थे। रविवार को लड़की अपने घर से बाजार जाने को कहकर निकली थी। लेकिन महबूर उसे अपने साथ बेलखोर इलाके में सुनसान जगह ले गया और...
उस समय के कैबिनेट मंत्री मोरारजी देसाई ने तो विपक्षी दलों को भी इस संधि के खिलाफ एकसाथ होने की सलाह दे डाली थी। तत्कालीन गृहमंत्री गोविन्द बल्लभ पन्त भी पाकिस्तान को दी जाने वाली इस आर्थिक राशि से नाखुश थे। वो चाहते थे कि इस आर्थिक राशि का उस धन के साथ सामन्जस्य बैठाया जाए, जो हिन्दू शरणार्थी पाकिस्तान में छोड़ कर आ चुके थे।
यह मैथिली की खूबसूरती है कि 'हम देखेंगे' की 'बुतपरस्ती' सगुण-निर्गुण ब्रह्म में बदल जाती है। लेकिन, फैज कट्टर पाकिस्तानी थे। यह बात सालों पहले हरिशंकर परसाई दुनिया को बता चुके हैं।
जिहाद के जरिए ये आतंकी मारत में इस्लामी राज लाना चाहते थे। इसके लिए मजहबी कक्षाएँ संचालित की गईं। गतिविधियों को अंजाम देने के लिए एक आतंकी मॉड्यूल 'अंसारुल्लाह' बनाया गया।
JNU में हुई हिंसा में छात्र संघ प्रेसीडेंट आइशी घोष समेत चुनचुन कुमार, पंकज मिश्रा, प्रियरंजन, योगेंद्र भारद्वाज, वास्कर विजय मेक, सुचिता तालुकदार, डोलन सामंता और विकास पटेल का नाम शामिल है। हिंसा के पीछे एक व्हाट्सएप ग्रुप का भी हाथ है, जिसका नाम है- यूनिटी अगेन्स्ट लेफ्ट।
"ये हमारे लिए हैरानी की बात नहीं है कि वो उन लोगों के साथ खड़ी हुईं, जो भारत की बर्बादी चाहते हैं। वो उनके साथ खड़ी हुईं, जिन्होंने लाठियों से लड़कियों के प्राइवेट पार्ट्स पर हमला किया। मैं उनका ये अधिकार छीन नहीं सकती।"