Wednesday, December 2, 2020
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बिस्किट लाने गए रिजवान को UP पुलिस ने मारा, हुई मौत: वामपंथी मीडिया ने फैलाई खबर, डॉक्टर ने बताई सच्चाई

"मैंने उनसे जब पूछा कि मोटरसाइकिल पर ऐसे क्यों बैठते हो कि ऐसी चोट लगी तो घर पर किसी ने भी पुलिस के मारने की बात नहीं कही, ना ही पुलिस के मारने जैसी बात के बारे में बाहर मोहल्ले में किसी को पता है। घर पर भी बस मोटरसाइकल से गिरने की ही बात थी।"

अम्बेडकरनगर में बिस्किट लेने दुकान पर गए रिजवान (Rizwan) की पुलिस की पिटाई से मौत की खबर का अम्बेडकरनगर पुलिस ने खंडन किया है। पुलिस ने रिजवान का इलाज करने वाले डॉक्टर का वीडियो जारी किया है। इसमें डॉक्टर ने स्पष्ट किया है कि रिजवान की मौत पुलिस के मारने से नहीं बल्कि मोटरसाइकल से गिरने से हुई थी।

दावा: बिस्कुट लेने गए थे रिजवान जब पुलिस की पिटाई से हुई मौत

हाल ही में कुछ प्रमुख मीडिया संस्थानों ने एक खबर प्रकाशित की, जिसमें बताया गया था कि उत्तर प्रदेश के अम्बेडकरनगर जिले में 19 साल के रिजवान नाम के एक युवक की मौत हुई। उनके परिवार के लोगों का आरोप था कि रिजवान अपने घर से जरूरी सामान लेने के लिए निकले थे, जिसके बाद पुलिस ने उनकी पिटाई की थी।

यहाँ तक कि रिजवान की मौत के मामले में मृतक के पिता इसराइल (Israil) ने टांडा कोतवाली में अज्ञात पुलिसकर्मियों के खिलाफ तहरीर देकर कार्रवाई तक की माँग की थी।

मृतक रिजवान के पिता ने कहा कि अम्बेडकरनगर के छज्जापुर इलाके का निवासी रिजवान वहाँ के ताज टॉकीज के पास बिस्किट लेने गए था। इसी दौरान वहाँ पुलिसकर्मियों ने उनकी पिटाई कर दी, जिसके कारण उन्हें गंभीर चोट आई। उनके पिता का कहना था कि घायल अवस्था में ही युवक को हालत बिगड़ने पर तत्काल जिला अस्पताल शिफ्ट कर दिया गया था। जहाँ इलाज के दौरान ही शुक्रवार रात रिजवान की मौत हो गई।

क्या है सच्चाई

अम्बेडकरनगर पुलिस रिजवान के साथ ही उनके पिता इसराइल द्वारा पुलिस पर लगाए गए आरोपों की सच्चाई उनके परिवार के डॉक्टर के माध्यम से सामने लेकर आई है। अम्बेडकरनगर पुलिस ने ट्विटर पर एक वीडियो को तीन भागों में ट्वीट किया है, जिसमें रिजवान के घर के डॉक्टर ने खुद बताया है कि रिजवान चरस-भाँग का नशा करता था और उनकी मौत पुलिस की पिटाई से नहीं हुई।

अब्दुल हक़ीम ने बताया कि उनकी क्लीनिक छज्जापुर में है। रिजवान की फूफी उनके पास गई थीं, जिसने बताया कि रिजवान की मोटर साइकल से गिरने के बाद चोट आई है। जब डॉक्टर अगली सुबह रिजवान के घर उसे देखने गए तो उनके दाहिने पैर में जाँघ के हिस्से में चोट लगी थी, जबकि बाएँ पैर में सूजन थी।

डॉक्टर ने कहा कि उन्होंने चोट की गंभीरता को देखते हुए रिजवान और उनके परिवार को एक्स-रे लेने और पूरा इलाज कराने के लिए अस्पताल जाने की सलाह दी। लेकिन पुलिस के मारने की बात उन्होंने नहीं की। डॉक्टर ने कहा:

मैंने उनसे जब पूछा कि मोटरसाइकिल पर ऐसे क्यों बैठते हो कि ऐसी चोट लगी तो घर पर किसी ने भी पुलिस के मारने की बात नहीं कही, ना ही पुलिस के मारने जैसी बात के बारे में बाहर मोहल्ले में किसी को पता है। घर पर भी बस मोटरसाइकल से गिरने की ही बात थी।

इसके आगे इस वीडियो को बना रहे व्यक्ति ने डॉक्टर से मृतक रिजवान के आचरण के बारे में पुछा तो उन्होंने कहा- “लड़के को उसके बाप ने घर से निकाला हुआ था। वो ठेला चलाता था और मोहल्ले में रहता था, घर नहीं जाता था। उसके बारे में ये खबरें भी हैं कि चरस वगैरह भी पीता है, या जो इंजेक्शन होते हैं नशे के उन्हें भी लेता है। बहुत दुबला-पतला था। एक झापड़ मारो तो मर जाएगा।”

‘रिजवान को मोटरसाइकल से गिरने से जो चोट लगी थी, उससे वो मर सकता था’

पुलिस ने बाईट देते हुए कहा है- “स्थानीय डॉक्टर का बयान लिया गया है, CCTV भी जाँच की गई, लेकिन पुलिस द्वारा पिटाई की बात कहीं भी सामने नहीं आई है। मृतक की पोस्टमॉर्टेम रिपोर्ट भी आ चुकी है, जिसमें उनके शरीर पर कहीं भी चोट या लाठी का निशान नहीं था। उनके फेफड़े और दिल में इन्फेक्शन था और जो मोटरसाइकल से गिरने की बात आई थी, वह एकदम सही थी।”

The Hindu, The Telegraph और कश्मीर वाला ने लगाए पुलिस पर आरोप

रिजवान नाम के इस युवक की बात पर तत्परता से ‘संज्ञान’ लेने वाले द टेलीग्राफ और द हिन्दू ने इस खबर में पुलिस पर आरोप लगाए थे। उल्लेखनीय है कि ये वही टेलीग्राफ है, जिसे कल ही एक ऐसी खबर में आरएसएस को बदनाम करने की साजिश करते हुए देखा गया, जिसमें आरोपित एक मुस्लिम युवक था।

अक्सर देखा जाता है कि इस प्रकार की घटनाओं में महज मुस्लिम समुदाय का जिक्र होने के कारण टेलीग्राफ जैसे वामपंथी समाचार पत्र पुलिस से लेकर समाज के एक वर्ग को भी कटघरे में खड़े कर देते हैं। हालाँकि, हर बार इसी तरह से और इतनी जल्दी सच्चाई सामने नहीं आ पाती है।

रिजवान के पिता इजराइल ने पुलिस पर आरोप लगाते हुए विक्टिम कार्ड खेलने की कोशिश की, जिसमें उनका साथ देने के लिए वामपंथी मीडिया हमेशा तैयार बैठा रहता है। खासतौर पर देशव्यापी बंद के दौरान मीडिया ने पुलिस के आचरण को गलत साबित करने के अथक प्रयास किए हैं।

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ऑपइंडिया स्टाफ़http://www.opindia.in
कार्यालय संवाददाता, ऑपइंडिया

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