Thursday, February 25, 2021
Home विचार मीडिया हलचल TheTelegraph का झूठ: दलित का खाना सिराज अहमद ने नहीं खाया था लेकिन खबर...

TheTelegraph का झूठ: दलित का खाना सिराज अहमद ने नहीं खाया था लेकिन खबर RSS को बदनाम करने के लिए लिखी

UP के कुशीनगर में ग्राम प्रधान लीलावती देवी ने क्वारंटाइन सेंटर में रसोईया ना होने की वजह से खुद ही क्वारंटाइन में रखे गए 5 लोगों के लिए खाना बनाया। इन पाँच लोगों में से 2 मुस्लिम थे। इनमें से एक सिराज अहमद ने दलित के हाथ बना खाना खाने से इंकार कर दिया।

मीडिया का प्रोपेगेंडा कैसे काम करता है, इसको TheTelegraph के झूठ से समझिए। TheTelegraph का झूठ विचार को लेकर नहीं बल्कि पत्रकारिता के साथ है, खबरों के साथ है। भ्रामक हेडलाइन, गुमराह करने वाली तस्वीरें और बेहद अतार्किक आँकड़े, दक्षिणपंथी सत्ता-विरोधी मीडिया गुटों का यह प्रमुख हथियार हमेशा से ही रहा है। लेकिन यह चिंता का विषय तब बन जाता है, जब द टेलीग्राफ़ (The Telegraph) जैसे प्रोपेगेंडा-प्रमुख, कोरोना जैसी वैश्विक महामारी के बीच भी ऐसे कुत्सित प्रयास करने से बाज नहीं आते।

द टेलीग्राफ़ ने उत्तर प्रदेश में एक व्यक्ति द्वारा दलित से खाना ना लेने की घटना को बेहद भ्रामक तरह से पेश करने का नया कारनामा किया है। इसमें उसने आरएसएस की छवि खराब करने का एक और असफल प्रयास किया है। लेकिन, अब कम से कम यह तो स्पष्ट है कि दलितों की तुलना कोरोना वायरस से करने वाले द टेलीग्राफ के लिए अस्पृश्यता और छुआ-छूत समाजिक चिंतन से कहीं अधिक उसके अपने निजी प्रोपेगेंडा का हिस्सा है और इससे अधिक कुछ नहीं।

अस्पृश्यता, क्वारंटाइन में भी – TheTelegraph के झूठ का फैक्ट चेक

द टेलीग्राफ़ ने उत्तर प्रदेश की एक घटना में 3 तरह की कलाकारी कर के पेश की है, जो निम्नवत हैं –

शीर्षक – खबर का शीर्षक है: “क्वारंटाइन में भी अस्पृश्यता” (Untouchability, even in quarantine)
फीचर फोटो – इस खबर के साथ बेहद अप्रासंगिक तस्वीर लगाई गई है, जिसमें कि आरएसएस की ड्रेस पहने कुछ लोग खाना खिला रहे हैं
आरोपित का नाम – इस घटना में दलित से खाना ना लेने वाले का नाम सिराज अहमद है, जो कि ना ही खाना परोसने वाला आरएसएस कार्यकर्ताओं में से एक है, ना ही पीड़ित दलित! सिराज वह आदमी है, जिसने दलित प्रधान के हाथों से खाना लेने से इनकार कर दिया था।

द टेलीग्राफ की रिपोर्ट

दलित महिला प्रधान के हाथ बना भोजन नहीं करने पर सिराज अहमद पर केस दर्ज

वास्तव में, यह घटना गत 10 अप्रैल को घटी है। घटना उत्तर प्रदेश के कुशीनगर जिले की है, जहाँ ग्राम प्रधान लीलावती देवी ने भुजौली खुर्द गाँव के स्कूल में बने क्वारंटाइन सेंटर में रसोईया ना होने की वजह से खुद ही क्वारंटाइन में रखे गए पाँच लोगों के लिए खाना बनाया था।

इन पाँच लोगों में से 2 मुस्लिम थे। इनमें से एक सिराज अहमद नाम के व्यक्ति ने दलित के हाथ बना खाना खाने पर बिरादरी से बहिष्कृत हो जाने की बात कहकर भोजन करने से इंकार कर दिया था।

इस घटना के बाद ग्राम प्रधान ने उप जिलाधिकारी देश दीपक सिंह और खंड विकास अधिकारी रमाकांत यादव को इस बारे में सूचना दी और पुलिस से लिखित शिकायत की। उन्होंने बताया कि इस मामले में सिराज अहमद के खिलाफ दलित अत्याचार विरोधी अधिनियम के तहत केस दर्ज किया गया है।

TheTelegraph का झूठ व्यापक स्तर तक

बंगाल से छपने वाले इस दैनिक अंग्रेजी ‘द टेलीग्राफ’ ने इस एक खबर के जरिए कई निशाने साधने की कोशिश की है। सबसे पहला मकसद तो यह कि लोगों का ध्यान खींचने में सफलता। क्योंकि भारत में ‘कॉन्ग्रेस काल’ से वैचारिकता दासता का प्रतीक यह तथाकथित समाचार पत्र निरंतर ही ऐसी हरकतें करता आया है, जिस कारण यह चर्चा का विषय बना रहा।

हाल ही में यही वामपंथी अखबार देश के राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद पर अपमानजनक और जातिसूचक व्यंग्य करते हुए उन्हें वायरस तक कह चुका है। अब द टेलीग्राफ़ के दोगले स्तर की पहचान यहीं पर की जा सकती है, कि महज कुछ दिन पहले ही समाज के वंचित समुदाय के किसी व्यक्ति को उसकी निजी गरिमा और पद को नजरअंदाज करते हुए उन्हें ‘वायरस’ तक कह देता है और कुछ ही दिन में अस्पृश्यता जैसे गंभीर विषय पर ज्ञान देते हुए एक हेडलाइन में बेचता नजर आता है।

द टेलीग्राफ के लिए अपनी विषैली मानसिकता के प्रसार के लिए तथ्यों से लेकर नैरेटिव को लेकर झूठ और भ्रम परोसना कोई नई बात नहीं है, वह सावरकर से लेकर देश के प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी तक पर अपमानजनक व्यंग्य करता हुआ पाया गया है।

एक सबसे बड़ा ध्येय जो टेलीग्राफ का इस खबर के पीछे रहा, वह ये कि आरएसएस की छवि को धूमिल करने का प्रयास! इस रिपोर्ट में द टेलीग्राफ ने सभी बातों से ऊपर फीचर इमेज के लिए चुनी गई तस्वीर को रखा है, जिसमें आरएसएस के लोगों को खाना परोसते हुए दिखाया गया है, ताकि पहली दृष्टि में भ्रामक शीर्षक के साथ यही सन्देश जाए कि सिराज अहमद ने नहीं बल्कि खाना परोसने में आरएसएस लोगों को साथ जातिगत भेदभाव कर रहा है।

वास्तविकता तो यह है कि आरएसएस के कार्यकर्ता देशभर में क्वारंटाइन में भी वंचित, बेसहारा और भूखे लोगों को राशन उपलब्ध कराने से लेकर लोगों को हर प्रकार की मदद उपलब्ध करवा रहा है। लेकिन द टेलीग्राफ यहाँ पर बस यही साबित करता नजर आता है कि वह एक ‘घृणोपजीवी’ है और वह कभी भी विरोधी विचारधारा के कार्यों से संतुष्ट नहीं रहेगा। क्योंकि यदि वह ऐसा समझौता करता है, तो उसका अस्तित्व ही कुछ शेष नहीं रह जाता।

  सहयोग करें  

एनडीटीवी हो या 'द वायर', इन्हें कभी पैसों की कमी नहीं होती। देश-विदेश से क्रांति के नाम पर ख़ूब फ़ंडिग मिलती है इन्हें। इनसे लड़ने के लिए हमारे हाथ मज़बूत करें। जितना बन सके, सहयोग करें

आशीष नौटियाल
पहाड़ी By Birth, PUN-डित By choice

संबंधित ख़बरें

ख़ास ख़बरें

LoC पर युद्धविराम समझौते के लिए भारत-पाक तैयार, दोनों देशों ने जारी किया संयुक्त बयान

दोनों देशों ने तय किया कि आज, यानी 24-45 फरवरी की रात से ही उन सभी पुराने समझौतों को फिर से अमल में लाया जाएगा, जो समय-समय पर दोनों देशों के बीच हुए हैं।

यहाँ के CM कॉन्ग्रेस आलाकमान के चप्पल उठा कर चलते थे.. पूरे भारत में लोग उन्हें नकार रहे हैं: पुडुचेरी में PM मोदी

PM मोदी ने कहा कि पहले एक महिला जब मुख्यमंत्री के बारे में शिकायत कर रही थी, पूरी दुनिया ने महिला की आवाज में उसका दर्द सुना लेकिन पूर्व मुख्यमंत्री ने सच बताने की बजाए अपने ही नेता को गलत अनुवाद बताया।

‘लोकतंत्र सेनानी’ आज़म खान की पेंशन पर योगी सरकार ने लगाई रोक, 16 सालों से सरकारी पैसों पर कर रहे थे मौज

2005 में उत्तर प्रदेश की मुलायम सिंह यादव की सपा सरकार ने आजम खान को 'लोकतंत्र सेनानी' घोषित करते हुए उनके लिए पेंशन की व्यवस्था की थी।

RSS कार्यकर्ता नंदू की हत्या के लिए SDPI ने हिन्दूवादी संगठन को ही बताया जिम्मेदार: 8 गुंडे पुलिस हिरासत में, BJP ने किया बंद...

BJP ने RSS कार्यकर्ता की हत्या के विरोध में अलप्पुझा जिले में सुबह 6 बजे से शाम 6 बजे तक ‘हड़ताल’ का आह्वान किया है। 8 SDPI कार्यकर्ता हिरासत में हैं।

दिल्ली दंगों का 1 साल: मस्जिदों को राशन, पीड़ित हिन्दुओं को लंबी कतारें, प्रत्यक्षदर्शी ने किया खालसा व केजरीवाल सरकार की करतूत का खुलासा

ऑपइंडिया ने उत्तर-पूर्वी दिल्ली के स्थानीय लोगों से बात की, जिन्होंने दंगों को लेकर अपने अनुभव साझा किए और AAP सरकार के दोहरे रवैए के बारे में बताया।

केजरीवाल की रैली में ₹500 देने का वादा कर जुटाई भीड़, रूपए ना मिलने पर मजदूरों का हंगामा

वीडियो में देखा जा सकता है कि रैली में आने के लिए तय किए गए रुपए न मिलने के कारण मजदूर भड़के हुए हैं और पैसों की माँग कर रहे हैं। उनमें महिलाएँ भी शामिल हैं।

प्रचलित ख़बरें

उन्नाव मर्डर केस: तीसरी लड़की को अस्पताल में आया होश, बताई वारदात से पहले की हकीकत

विनय ने लड़कियों को कीटनाशक पिलाकर बेहोश किया और बाद में वहाँ से चला गया। बेहोशी की हालत में लड़कियों के साथ किसी तरह के सेक्सुअल असॉल्ट की बात सामने नहीं आई है।

ई-कॉमर्स कंपनी के डिलीवरी बॉय ने 66 महिलाओं को बनाया शिकार: फीडबैक के नाम पर वीडियो कॉल, फिर ब्लैकमेल और रेप

उसने ज्यादातर गृहणियों को अपना शिकार बनाया। वो हथियार दिखा कर रुपए और गहने भी छीन लेता था। उसने पुलिस के समक्ष अपना जुर्म कबूल कर लिया है।

कला में दक्ष, युद्ध में महान, वीर और वीरांगनाएँ भी: कौन थे सिनौली के वो लोग, वेदों पर आधारित था जिनका साम्राज्य

वो कौन से योद्धा थे तो आज से 5000 वर्ष पूर्व भी उन्नत किस्म के रथों से चलते थे। कला में दक्ष, युद्ध में महान। वीरांगनाएँ पुरुषों से कम नहीं। रीति-रिवाज वैदिक। आइए, रहस्य में गोते लगाएँ।

महिला ने ब्राह्मण व्यक्ति पर लगाया था रेप का झूठा आरोप: SC/ST एक्ट में 20 साल की सज़ा के बाद हाईकोर्ट ने बताया निर्दोष

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा, "पाँच महीने की गर्भवती महिला के साथ किसी भी तरह की ज़बरदस्ती की जाती है तो उसे चोट लगना स्वाभाविक है। लेकिन पीड़िता के शरीर पर इस तरह की कोई चोट मौजूद नहीं थी।”

UP: भीम सेना प्रमुख ने CM आदित्यनाथ, उन्नाव पुलिस के खिलाफ SC/ST एक्ट के तहत दर्ज की FIR

भीम सेना प्रमुख ने CM योगी आदित्यनाथ और उन्नाव पुलिस अधिकारियों पर गुरुग्राम में SC/ST एक्ट के तहत शिकायत दर्ज करवाई है।

लोगों को पिछले 10-15 सालों से थूक वाली रोटियाँ खिला रहा था नौशाद: पूरे गिरोह के सक्रीय होने का संदेह, जाँच में जुटी पुलिस

नौशाद के साथ शादी समारोह में लगे ठेकेदारों की जानकारी भी जुटाई जा रही है। वो शहर की कई मंडपों और शादियों में खाना बना चुका है।
- विज्ञापन -

 

हमसे जुड़ें

291,994FansLike
81,859FollowersFollow
392,000SubscribersSubscribe