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बाल यौन अपराध मामलों में होगी मौत की सजा, कैबिनेट ने दी POCSO एक्ट में संशोधन को मंजूरी

प्रस्तावित संशोधनों में बच्चों का यौन उत्पीड़न करने पर मौत की सजा और चाइल्ड पोर्नोग्राफी रोकने के लिए जेल एवं जुर्माने का प्रावधान किया गया है। साथ ही नाबालिगों के ख़िलाफ़ अन्य दूसरे अपराधों के लिए भी कड़ी सजा का प्रावधान शामिल है।

देश में बढ़ते बाल यौन उत्पीड़न की घटनाओं को रोकने के लिए मोदी कैबिनेट ने 10 जुलाई को पॉक्सो एक्ट (POCSO Act) को कड़ा करने के लिए इसमें संशोधन की मंजूरी दे दी।

सूचना एवं प्रसारण मंत्री प्रकाश जावडेकर ने मीडिया से बातचीत में बताया, “कैबिनेट ने बच्चों के प्रति अपराधों की गंभीरता को देखते हुए इससे निपटने के लिए पॉक्सो कानून में संशोधनों को मंजूरी दी है।” सरकार का मानना है कि इन संशोधनों से बाल उत्पीड़न पर अंकुश लगेगा, क्योंकि कानून में शामिल किए जाने वाले दंडात्मक प्रावधान निवारक का काम करेंगे।

उल्लेखनीय है कि प्रस्तावित संशोधनों में बच्चों का यौन उत्पीड़न करने पर मौत की सजा और चाइल्ड पोर्नोग्राफी रोकने के लिए जेल एवं जुर्माने का प्रावधान किया गया है। साथ ही नाबालिगों के ख़िलाफ़ अन्य दूसरे अपराधों के लिए भी कड़ी सजा का प्रावधान शामिल है।

पॉक्सो एक्ट में संशोधन करके सरकार का उद्देश्य परेशानी में फँसे असुरक्षित बच्चों के हितों का संरक्षण करना और उनकी सुरक्षा और गरिमा सुनिश्चित करना है। जिसके लिए पॉक्सो एक्ट की धारा 2, 4, 5, 6, 9, 14, 15, 34, 42 और 45 में संशोधन किया जा रहा है।

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ऑपइंडिया स्टाफ़
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कार्यालय संवाददाता, ऑपइंडिया

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