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खुदा हाफिज-2 में ‘हक हुसैन’ गाना सुन शिया समुदाय ने जताई आपत्ति: निर्माता बोले- माफ करें, हम ‘लिरिक्स-सीन’ सब बदल देंगे

सेंसर बोर्ड से परामर्श लेने के बाद फिल्म निर्माताओं द्वारा फैसला लिया गया है कि हक हुसैन की जगह जुनून है शब्द का प्रयोग होगा जबकि मातम जंजीर वाले सीन काटे जाएँगे।

बॉलीवुड अभिनेता विद्युत जामवाल की खुदा हाफिज चैप्टर-टू फिल्म 8 जुलाई 2022 को सिनेमाघरों में रिलीज होने जा रही है। इस फिल्म में एक गाना है जिसे कुछ दिन पहले यूट्यूब पर जारी किया गया था। इसमें विद्युत के फाइटिंग सीन दिखाए गए हैं और बैकग्राउंड में ‘हक-हुसैन’ गाना चल रहा है। तमाम लोगों ने इस फिल्म के लिए विद्युत को शुभकामनाएँ दी हैं। लेकिन शिया समुदाय इस गाने को सुन खफा हो गया।

बॉलीवुड अभिनेता विद्युत जामवाल की खुदा हाफिज चैप्टर-टू फिल्म का ‘हक-हुसैन’ गाना रिलीज होने के बाद नाराज शिया समुदाय लोगों को मनाने के लिए फिल्म निर्माताओं ने माफी माँगी।

अपने माफी नामे में उन्होंने कहा, “हम ‘खुदा हाफिज चैप्टर-2 अग्नि परीक्षा’ के निर्माता शिया समुदाय द्वारा की गई शिकायत पर संज्ञान लेते हुए गंभीरता से माफी माँगते हैं कि फिल्म के ‘हक हुसैन’ गाने के कारण अंजाने में आपकी भावनाएँ आहत हुईं। लोगों ने आपत्ति हुसैन शब्द पर जताई थी और जो गाने में मातम जंजीर का प्रयोग किया गया उसपर जताई थी। हमने सब ध्यान रखकर गाने में बदलाव का फैसला किया। सेंसर बोर्ड के परामर्श के बाद हम जंजीर, ब्लेड को गाने से हटा देंगे और हक हुसैन की जगह गाने का नाम ‘जुनून है’ करेंगे।”

इसके बाद फिल्म निर्माताओं ने माफीनामे में यह भी साफ किया है कि उन्होंने फिल्म में किसी शिया समुदाय के व्यक्ति को नकारात्मक नहीं दिखाया है और न ही ये दिखाया है कि वो किसी पर हमला कर रहे हैं। ये गाना बनाया गया था ताकि इमाम हुसैन की बहादुरी का बखान हो सके। मकसद कभी भी मजहबी भावनाएँ आहत करना नहीं था। शिया समुदाय को ध्यान में रखते हुए फिल्म में बताए गए बदलाव कर दिए हैं।

बता दें कि विद्युत जामवाल की खुदा हाफिज फिल्म 8 जुलाई को सिनेमाघरों में रिलीज होने वाली है। उनकी फिल्म का ‘हक हुसैन’ गाना 21 जून को रिलीज हुआ था। इसे सुनने के बाद शिया समुदाय के मुस्लिमों ने निर्माताओं से गाने से हक हुसैन शब्द और जंजीर मातम का दृश्य हटाने को कहा था। शिया समुदाय के लोगों का कहना था कि इससे उनकी भावनाएँ आहत हुई हैं। शिकायत में ये भी कहा गया था कि उन्हें इससे मतलब नहीं कि किस संदर्भ में हुसैन शब्द का प्रयोग हुआ, बस वो चाहते हैं कि हुसैन शब्द को हटाया जाए और इसका प्रयोग व्यापार के लिए न किया जाए।

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ऑपइंडिया स्टाफ़
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कार्यालय संवाददाता, ऑपइंडिया

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