Monday, July 15, 2024
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72 करोड़+ धार्मिक पुस्तकें छापने वाले गीताप्रेस के अध्यक्ष राधेश्याम खेमका: जीवन भर किया पत्तल में भोजन, मरणोपरांत मिला पद्म विभूषण सम्मान

पूरी जिंदगी चमड़े की वस्तुओं से परहेज करने वाले राधेश्याम उसूलों के इतने पक्के थे कि उन्होंने कभी चर्म वस्तुओं से बने जूते भी नहीं पहने। आज उन्हें पद्म विभूषण पुरस्कार मिलने की घोषणा पर गीताप्रेस खुशियाँ मना रहा है।  

73 वें गणतंत्र दिवस के मौके पर गीता प्रेस के अध्यक्ष रहे ‘राधेश्याम खेमका (RadheyShyam Khemka)’ को पद्म पुरस्कार से सम्मानित किए जाने का ऐलान हुआ है। उन्हें ये अवार्ड मरणोपरांत साहित्य एवं शिक्षा के क्षेत्र में उत्कृष्ट योगदान के लिए दिया गया है। खेमका ने अपना पूरा जीवन गीता प्रेस को समर्पित किया था और वह लंबे समय तक सनातन धर्म की पत्रिका ‘कल्याण’ के संपादन कार्य से जुड़े थे। वर्ष 2002 में उन्होंने काशी में वेद विद्यालय की स्थापना भी की थी।

राधेश्याम खेमका का जीवन

साल 2014 से अपने निधन तक गीता प्रेस ट्रस्ट बोर्ड के अध्यक्ष रहे राधेश्याम मूलत: मुंगेर के रहने वाले थे। उनका जन्म 12 दिसंबर 1935 को मुंगेर में ही हुआ था। लेकिन, बाद में पढ़ाई के साथ-साथ बनारस में उनका ज्यादातर समय बीता। उनके पिता मुंगेर जिले से यूपी के वाराणसी आए थे। वाराणसी में राधेश्याम ने अपना अधिक से अधिक समय संतों के बीच गुजारा और शंकराचार्य स्वामी स्वरुपानंद सरस्वती व पुरी के शंकराचार्य स्वामी निरंजन देव तीर्थ का सानिध्य पाकर अपना विकास किया। उनकी पढ़ाई बीएचयू से हुई थी।

काशी हिंदू विश्वविद्यालय से उन्होंने एमए किया और बाद में गीताप्रेस की कल्याण पत्रिका के संपादक बने। इसके बाद उनका पूरा जीवन गीता प्रेस के लिए बीता। राधेश्याम खेमका ने गीताप्रेस से जुड़े रहते हुए ‘कल्याण’ के 38 वार्षिक विशेषाँक, 460 संपादित अंक प्रकाशित करवाए। रिपोर्ट्स के अनुसार, आँकड़े बताते हैं कि उनके संपादन काल के दौरान ‘कल्याण’ की 9 करोड़ 54 लाख 46 हजार प्रतियाँ प्रकाशित हुई थीं।

सात्विक प्रवृत्ति के राधेश्याम बेहद धार्मिक थे। उन्होंने आजीवन पत्तल में खाना खाया और कुल्हड़ में पानी पिया। पूरी जिंदगी चमड़े की वस्तुओं से परहेज करने वाले राधेश्याम उसूलों के इतने पक्के थे कि उन्होंने कभी चर्म वस्तुओं से बने जूते भी नहीं पहने। आज उन्हें पद्म विभूषण पुरस्कार मिलने की घोषणा पर गीताप्रेस खुशियाँ मना रहा है।  

गीताप्रेस के ट्रस्टी देवीदयाल अग्रवाल व प्रबंधक लालमणि तिवारी ने खुशी जताते हुए कहा कि राधेश्याम खेमका ने गीता प्रेस के शताब्दी वर्ष की तैयारियों के क्रम में पिछले साल 7 मार्च को वाराणसी में गीताप्रेस प्रबंधन के साथ बैठक की थी। बता दें कि इस बैठक के 1 माह बाद ही अप्रैल 2021 में उनका निधन हो गया था। अपने जीते जी उन्होंने जिन संगठनों को सेवा दी उसमें मारवाड़ी सेवा संघ, मुमुक्षु भवन, श्रीराम लक्ष्मी मारवाड़ी अस्पताल गोदौलिया, बिड़ला अस्पताल मछोदरी, काशी गोशाला ट्रस्ट शामिल हैं।

गीता प्रेस से छपी 72 करोड़ से ज्यादा पुस्तकें

यहाँ मालूम हो कि गीताप्रेस में कर्मकांड व संस्कारों से संबंधित पुस्तकों का प्रकाशन राधेश्याम खेमका के सुझाव पर शुरू हुआ। जिस गीता प्रेस को जीवन समर्पित करने के बाद राधेश्याम को पद्म पुरस्कार से सम्मानित किया गया। उसकी  स्थापना के बाद से अब तक 72 करोड़ से ज्यादा सनातन से जुड़ी किताबें प्रकाशित की हैं।

एक जानकारी के मुताबिक गीता प्रेस से प्रकाशित 72 करोड़ से ज्यादा की पुस्तकों में सर्वाधिक संख्या  15 करोड़ 60 लाख श्रीमद्भगवत गीता की है। इसके अलावा रामचरित मानस, पुराण, हनुमान चालीसा, दुर्गा, सप्तशती, सुंदरकांड की संख्या भी करोड़ों में छपी है। 

गीता प्रेस से प्रकाशित राम चरित मानस की संख्या 11 करोड़ 39 लाख है। पुराण, उपनिषद् आदि ग्रंथ 2 करोड़ 61 लाख है, महिला एवं बालकोपयोगी पुस्तकें 11 करोड़ 6 लाख, भक्त चरित्र एवं भजनमाला की किताबें मिलाकर 17 करोड़ 40 लाख प्रकाशित हुई हैं। अन्य प्रकाशन 12 करोड़ 73 लाख हैं। इस तरह अब तक गीता प्रेस से प्रकाशित होने वाली कुल किताबें 71 करोड़ 77 लाख है।

पद्म पुरस्कार 2022 का ऐलान

उल्लेखनीय है कि राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने मंगलवार (25 जनवरी 2022) को पद्म पुरस्कारों की घोषणा की थी। सूची के अनुसार इस बार 4 हस्तियों को पद्म विभूषण, 17 को पद्म भूषण, 107 को पद्म श्री पुरस्कार से सम्मानित किया जाएगा। इस लिस्ट में यूपी के पूर्व मुख्यमंत्री कल्याण सिंह, सीडीएस बिपिन रावत, शास्त्रीय गायिका प्रभा अत्रे और राधेश्याक खेमका पद्म विभूषण से सम्मानित होने वाले नाम हैं।

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ऑपइंडिया स्टाफ़
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कार्यालय संवाददाता, ऑपइंडिया

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