Tuesday, July 23, 2024
Homeविविध विषयअन्यआप जलते हैं तो हम चलते हैं: 3 साल बस एक झाँकी, आपके साथ-समर्थन...

आप जलते हैं तो हम चलते हैं: 3 साल बस एक झाँकी, आपके साथ-समर्थन से वामपंथियों को कई और धक्के देने हैं बाकी

ऑपइंडिया हिंदी की पूरी टीम अगर मशीन है तो उसके पाठक हैं फ्यूल। आप जलते हैं तो हम चलते हैं। जब-जब बिग-टेक कंपनियों ने हमारे ऊपर उठने की गति पर ब्रेक लगाने की कोशिश की, आप ही हमारी सीढ़ी भी बने।

साल 2018 की बात है। फेसबुक पर मजाक उड़ाया जा रहा था। वजह थी एक पत्रकार की नई नौकरी। मजाक उड़ाने वाले उस पत्रकार के जानने-पहचानने वाले दोस्त-यार थे। ‘वहाँ पत्रकारिता नहीं होती’ का ज्ञान उसे दिया जा रहा था। दोस्त ‘शुभचिंतक’ बन चुके थे। कुछ तो दार्शनिक भी।

खैर, पत्रकार ने नौकरी शुरू की। चमड़ी मोटी थी उसकी। सोशल मीडिया के सवाल-जवाब उसे बेमानी लगते थे… और नई नौकरी की खुशी के समय तंज कसने वाले दोस्त बेमंटा। वो पत्रकार मन लगा कर काम करने लगा। जो-जो टास्क दिया जाता, वो समय से पूरा हो – यह सुनिश्चित करने का काम उसने तन-मन से किया।

करत-करत अभ्यास ते, जडमति होत सुजान।
रसरी आवत जात तें, सिल पर परत निसान॥

ऊपर वाली कहावत सिर्फ कहने भर को नहीं है। यही असली जीवन दर्शन है। उस पत्रकार के ‘शुभचिंतक’ दोस्तों को यह बात शायद पता नहीं थी। साल 2019 की 12 जनवरी से लेकर 2022 की 12 जनवरी तक रस्सी को घिस-घिस कर उस पत्रकार और उसके संस्थान ने पत्रकारिता भी की और ‘पत्रकार’ बने लोगों को इसके मायने भी बखूबी समझाया।

वो पत्रकार मैं हूँ और संस्थान है ऑपइंडिया हिंदी। आप पाठकों के बीच हमने शुरुआत की थी 12 जनवरी 2019 से। तब से लेकर अब तक धीरे-धीरे टीम बनी भी, बढ़ी भी। पाठकों तक पैठ भी हमने धीरे-धीरे बढ़ाई। पहले मेनस्ट्रीम मीडिया और उसकी पत्रकारिता के सहारे खबरें जानने-समझने वाले भी तीखे-चुभते तथ्यों को खोल कर सामने रख देने वाली हमारी पत्रकारिता को समझने लगे। और तो और… पत्रकारिता क्या होती है, शीर्षक क्या होना चाहिए आदि-इत्यादि – अब दूसरे संस्थान भी हमें इस मामले में फॉलो करने लगे हैं।

3 साल के साथ-समर्थन का धन्यवाद

यह सब संभव हुआ है आप जैसे पाठकों के भरोसे। सच मानिए यह हवाई बात नहीं है। न ही इस बात से आपको खुश करने की मेरी मंशा है। क्योंकि पत्रकारिता के कई मॉडल, कई दुकान और भी खुले। सबका हश्र वही है – डब्बा बंद। इसके विपरीत मेनस्ट्रीम मीडिया और उनके भारी-भरकम कॉर्पोरेट मॉडल के आगे ऑपइंडिया हिंदी न सिर्फ टिका हुआ है बल्कि मजबूती से पाँव भी जमाए हुए है तो उसका श्रेय टीम से ज्यादा पाठकों पर जाता है।

आप हमारे वो पाठक हैं, जो न सिर्फ पढ़ते हैं बल्कि टोकते भी हैं। और यही हमारी शक्ति है। हर दिन सीखने, गलती करने पर सुधारने-संभलने के लिए आप ही हमें प्रेरित करते हैं। जब-जब बिग-टेक कंपनियों ने हमारे ऊपर उठने की गति पर ब्रेक लगाने की कोशिश की, आप ही हमारी सीढ़ी भी बने। आम बोलचाल की भाषा में कहें तो ऑपइंडिया हिंदी की पूरी टीम अगर मशीन है तो उसके पाठक हैं फ्यूल। आप जलते हैं तो हम चलते हैं।

आगे भी चाहिए साथ

समय कठिन है। और यह बात सिर्फ भारत की नहीं है। पूरी दुनिया के वामपंथी लामबंद हो चुके हैं। उनके साथ तमाम पंथ-पक्ष-कंपनी-कॉर्पोरेट (भले मौका-परस्त ही) खड़े हैं। इनका लक्ष्य है दक्षिणपंथी सोच-तर्क पर चोट करना। गूगल-फेसबुक-ट्विटर सब इसी सोच के साथ चल रहे हैं। हमें इनके बीच ही चलना है… और इन्हें मात भी देना है। कैसे?

आप के भरोसे हैं हम। आप हमारे पाठक हैं। आप हमें पढ़ते हैं। अच्छा लगे तो उस पढ़े को आगे भी बढ़ाइए। यार-दोस्त-परिवार के साथ शेयर कीजिए। यही आने वाले वर्षों में हमारी ताकत होगी। यही अब तक हुई भी है। कंटेंट के मामले में कुछ जोर हम लगा रहे हैं, प्रचार-प्रसार के मामले में कुछ जोर आपसे लगाने की उम्मीद कर रहे हैं।

उर्जावान स्वामी विवेकानंद की जयंती पर ऑपइंडिया हिंदी की शुरुआत हुई थी। वो और उनके विचार हमेशा से हम सबकी प्रेरणा रहे हैं, रहेंगे। आज उनकी जयंती पर पूरी ऑपइंडिया हिंदी की टीम उनको नमन कर रही है। उन्हीं के विचारों से प्रेरित होकर आपसे एक अपील भी कर रहे हैं – कोरोना-काल में स्वस्थ रहें, सतर्क रहें।

Join OpIndia's official WhatsApp channel

  सहयोग करें  

एनडीटीवी हो या 'द वायर', इन्हें कभी पैसों की कमी नहीं होती। देश-विदेश से क्रांति के नाम पर ख़ूब फ़ंडिग मिलती है इन्हें। इनसे लड़ने के लिए हमारे हाथ मज़बूत करें। जितना बन सके, सहयोग करें

चंदन कुमार
चंदन कुमारhttps://hindi.opindia.com/
परफेक्शन को कैसे इम्प्रूव करें :)

संबंधित ख़बरें

ख़ास ख़बरें

‘एंजेल टैक्स’ खत्म होने का श्रेय लूट रहे P चिदंबरम, भूल गए कौन लेकर आया था: जानिए क्या है ये, कैसे 1.27 लाख StartUps...

P चिदंबरम ने इसके खत्म होने का श्रेय तो ले लिया, लेकिन वो इस दौरान ये बताना भूल गए कि आखिर ये 'एंजेल टैक्स' लेकर कौन आया था। चलिए 12 साल पीछे।

पत्रकार प्रदीप भंडारी बने BJP के राष्ट्रीय प्रवक्ता: ‘जन की बात’ के जरिए दिखा चुके हैं राजनीतिक समझ, रिपोर्टिंग से हिला दी थी उद्धव...

उन्होंने कर्नाटक स्थित 'मणिपाल इंस्टिट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी' (MIT) से इलेक्ट्रॉनिक एवं कम्युनिकेशंस में इंजीनियरिंग कर रखा है। स्कूल में पढ़ाया भी।

प्रचलित ख़बरें

- विज्ञापन -