Sunday, July 14, 2024
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‘स्वास्थ्य और पर्यावरण को होगा नुकसान’: 5G के खिलाफ HC में जूही चावला, 2 जून को सुनवाई

"भारत में 5G टेक्नोलॉजी को लागू किए जाने से पहले RF रेडिएशन से मानव जाति, महिला, पुरुषों, व्यस्कों, बच्चों, शिशुओं, जानवरों, जीव-जंतुओं, वनस्पतियों और पर्यावरण पर पड़ने वाले प्रभावों को लेकर अच्छे से अध्ययन किया जाए और इससे संबंधित किए गए अथवा किए जाने वाले तमाम रिपोर्ट्स को सार्वजनिक किया जाए।"

मोबाइल नेटवर्क सेवा 5G को लेकर भारत में लंबे समय से चर्चा हो रही है। इस सेवा से निकले वाली रेडिएशन को लेकर भी कई तरह की खबरें आ रही हैं। बहुत से लोगों का मानना है कि 5G सेवा से निकलने वाली रेडिएशन काफी खतरनाक है। ऐसे में बॉलीवुड की मशहूर अभिनेत्री जूही चावला ने भारत में 5G सेवा के खिलाफ अदालत का दरवाजा खटखटाया है।

जूही चावला काफी समय से 5G टावरों से निकलने वाले हानिकारक रेडिएशन के खिलाफ लोगों में जागरूक कर रही हैं। उन्होंने भारत में 5G टेक्नोलॉजी को लागू करने के खिलाफ मुंबई हाई कोर्ट में एक याचिका दायर की है। अभिनेत्री ने अपनी इस याचिका में माँग की है कि 5G टेक्नोलॉजी को लागू करने से पहले इससे जुड़े तमाम तरह के अध्ययनों पर गौर किया जाए और फिर उसके बाद ही इस टेक्नोलॉजी को भारत में लागू करने पर विचार किया जाए। मामले की सुनवाई 2 जून को होगी।

जूही चावला के प्रवक्ता ने एक आधिकारिक बयान में कहा कि भारत में 5G टेक्नोलॉजी को लागू किए जाने से पहले RF रेडिएशन से मानव जाति, महिला, पुरुषों, व्यस्कों, बच्चों, शिशुओं, जानवरों, जीव-जंतुओं, वनस्पतियों और पर्यावरण पर पड़ने वाले प्रभावों को लेकर अच्छे से अध्ययन किया जाए और इससे संबंधित किए गए अथवा किए जाने वाले तमाम रिपोर्ट्स को सार्वजनिक किया जाए। प्रवक्ता का कहना है कि इस तरह के अध्ययन से स्पष्ट किया जाना जरूरी है कि क्या 5G टेक्नोलॉजी भारत की मौजूदा और आने वाली पीढ़ी के लिए सुरक्षित या नहीं और इसके बाद ही इसे लागू करने को लेकर विचार किया जाए।

इस पूरे मामले पर बात करते हुए जूही चावला ने कहा, “हम तकनीक को लागू किए जाने के खिलाफ नहीं हैं। इसके उलट हम टेक्नोलॉजी की दुनिया से निकलने वाले नए उत्पादों का भरपूर लुत्फ उठाते हैं जिनमें वायरलेस कम्युनिकेशन भी शामिल है। हालाँकि इस तरह के डिवाइस को इस्तेमाल करने को लेकर हम हमेशा ही असमंजस की स्थिति में रहते हैं, क्योंकि वायरफ्री गैजेट्स और नेटवर्क सेल टावर्स से संबंधित हमारी खुद की रिसर्च और अध्ययन से यह पता चलता है कि इस तरह की रेडिएशन लोगों के स्वास्थ्य और उनकी सुरक्षा के लिए बेहद हानिकारक है।”

उल्लेखनीय है कि इन दिनों, खास कर महामारी के दौरान 5G तकनीक को लेकर काफी षड्यंत्रकारी सिद्धांत फैलाए जा रहे हैं। कई षड्यंत्र सिद्धांतकारों ने विशेषज्ञों द्वारा बार-बार स्पष्टीकरण के बाद भी बीमारी के लिए 5G नेटवर्क को दोषी ठहराया है, जबकि इसका बीमारी से कोई लेना-देना नहीं है।

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ऑपइंडिया स्टाफ़
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कार्यालय संवाददाता, ऑपइंडिया

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