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खेत से कोर्ट तक भारत में AI का बढ़ता असर: स्वास्थ्य से लेकर बैंकिंग और इन्फ्रा क्षेत्र में भी डिजिटल क्रांति, जानें- मोदी सरकार ने ‘AI मिशन’ को कैसे दिया विस्तार

AI का कृषि, स्वास्थ्य, न्याय, विनिर्माण से लेकर सुशासन तक यानी हर क्षेत्र में इस्तेमाल हो रहा है। सरकार का 'विजन 2047' एआई का विश्वास के साथ पूरी जिम्मेदारी से इस्तेमाल कर भारत को सुपर पावर बनाना है।

भारत में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस यानी एआई का इस्तेमाल हर क्षेत्र में लगातार बढ़ रहा है। 2027 में ‘विकसित भारत’ के लक्ष्य को हासिल करने में एआई अहम भूमिका निभाएगा। लेकिन इसका फायदा कुछ लोगों तक ही सीमित न रह जाए, इसके लिए सरकार कई योजनाएँ लेकर आई है। मूल रूप से एआई समाज में हर तबके तक पहुँच के साथ आर्थिक विकास में अहम भूमिका निभाएगा। सरकार ने एआई इकोसिस्टम को आकार देने में लगी हुई है।

कंप्यूटरिंग पावर, जीपीयू और अनुसंधान के अवसर हर व्यक्ति तक पहुँचे, इसलिए किफायती दरों पर इसे उपलब्ध कराए जा रहे हैं। स्टार्टअप्स और इनोवेटर्स को विश्वस्तरीय एआई इंफ्रास्ट्रक्चर से जोड़ा जा रहा है। इंडिया एआई मिशन की स्थापना की गई है।

साभार-pib

इसके अंतर्गत राष्ट्रीय कंप्यूटर सुविधा के माध्यम से 38000 से अधिक जीपीयू को शामिल किया गया है। एआई कोश में 9500 से अधिक डेटासेट और 273 क्षेत्रीय मॉडल शामिल हैं। राष्ट्रीय सुपर कंप्यूटरिंग मिशन से ऐरावत और परम सिद्धि एआई समेत 40 से ज्यादा पेटाफ्लॉप सिस्टम काम कर रहे हैं। इंडिया एआई और फ्यूटरस्किल्स पहल के माध्यम से अभी 500 पीएचडी, 5000 पोस्ट ग्रेजुएट और 8000 ग्रेजुएट स्टूडेंट्स की मदद की जा रही है।

अलग-अलग राज्यों में 570 एआई डेटा लैब और 27 इंडिया एआई लैब इनोवेशन को बढ़ावा दे रही हैं। करीब 90 फीसदी स्टार्टअप किसी न किसी एआई का इस्तेमाल कर रहे हैं। इससे इनोवेशन के इकोसिस्टम में एआई की जड़ें गहरी होती जा रही है।

इंडिया एआई कंप्यूट, एआई एप्लिकेशन डेवलपमेंट पहल, एआई कोश समेत 7 स्तंभों पर आधारित ये ढाँचा भारत में अनुसंधान, कौशल विकास, नवाचार और जिम्मेदारी के साथ इस्तेमाल को बढ़ावा दे रहा है। ये सारी कवायद देश को एआई पावरहाउस बनाने की दिशा में अहम भूमिका निभा रहे हैं।

भारत में एआई का बढ़ता इकोसिस्टम

भारत में एआई इकोसिस्टम तेजी से बढ़ रहा है अब करीब 60 लाख लोग इससे जुड़ गए हैं। देश में 1800 से अधिक ग्लोबल सेंटर हैं जिसमें से 500 से ज्यादा सेंटर्स में एआई का इस्तेमाल धड़ल्ले से हो रहा है। देश में करीब 1.8 लाख स्टार्टअप्स हैं।

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पिछले साल के स्टार्टअप्स में करीब 90 फीसदी एआई का इस्तेमाल कर रहे हैं। उद्योग, बैंकिंग, बीमा, ऑटोमोटिव और उपभोक्ता वस्तुओं के क्षेत्र में एआई का करीब 60 फीसदी इस्तेमाल हो रहा है। बीसीजी के सर्वे के मुताबिक, करीब 26 फीसदी भारतीय कंपनियाँ एआई के इस्तेमाल में परिपक्व हो गई हैं।

एआई के 7 सिद्धांत

एआई के विकास में 7 बातों पर जोर दिया गया है। इसमें कहा गया है कि नवाचार की प्रगति के लिए जोखिम कम करना जरूरी है। इसके लिए विश्वास जरूरी है। विश्वास वह मूलभूत सिद्धांत है जो भारत में सभी कृत्रिम बुद्धिमत्ता के विकास और तैनाती का मार्गदर्शन करता है।

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जनता हर हाल में एआई के केन्द्र में रखा जाना चाहिए। एआई सिस्टम को इस तरह से इस्तेमाल किया जाना चाहिए ताकि मानवीय और सामाजिक मूल्यों में वृद्धि हो और सबको इसका फायदा मिले। नवाचार को वरीयता मिले और सामाजिक-आर्थिक विकास हो, समावेशी विकास को बढ़ावा मिले और बगैर भेदभाव के हाशिए पर पड़े समुदायों तक इसका फायदा पहुँचे।

कृषि क्षेत्र में एआई

फसलों को होने वाली बीमारियों का पता लगाने, मौसम की भविष्यवाणी , मिट्टी की जाँच और उसकी उर्वरकता को बढ़ाने और सिंचाई को आधुनिक बनाने में एआई का इस्तेमाल किया जा सकता है। इससे पैदावार में जबरदस्त इजाफा होगा। सरकार ‘किसान ई-मित्र’ चैटबॉट बनाई है जिसके माध्यम से 11 भाषाओं में किसानों की मदद की जा रही है। 2025 तक 93 लाख सवालों के जवाब दिए गए।

डिजिटल कृषि मिशन के तहत 7.63 करोड़ से अधिक किसान आईडी कार्ड बना कर 23.5 करोड़ खेती वाली जमीन का सर्वे कराया गया और एक डिजिटल आधार तैयार किया गया। राष्ट्रीय कीट निगरानी सिस्टम बनाया गया है जो 66 फसलों और उनमें लगने वाली 432 कीटों का पता लगाने के लिए 10000 लोगों को नियुक्त किया। ये किसानों को परामर्श देते हैं।

स्थानीय मानसून के हिसाब से खरीफ 2025 के लिए एआई आधारित परियोजना शुरू किया गया जो एसएमएस के जरिेए 13 राज्यों के 3.88 करोड़ किसानों को बुवाई और दूसरी जानकारी दी। यस टेक, क्रॉपिक और पीएमएफबीवाई व्हाट्सएप चैटबॉट बनाया गया।

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खेती की जाने वाली जमीन की मिट्टी की उर्वरकता और स्वास्थ्य का पता लगाने में एआई का इस्तेमाल हो रहा है। इससे मिट्टी में पोषक तत्वों की कमी और मृदा तनाव का पता चलता है। समय रहते किसान को बताया जाता है कि उसे क्या करना चाहिए। भारत की कृषि व्यवस्था में मानसून का काफी प्रभाव है इसलिए वर्षा के बदलते पैटर्न,तापमान में उतार चढ़ाव का पूर्वानुमान लगाता है।

इससे बुवाई का वक्त,सिंचाई, कीट प्रबंधन और खाद के उपयोग को लेकर किसानों को सही सलाह देता है। फसलों को होने वाले रोगों, कीटों की जानकारी देता है और फसलों को संभावित नुकसान से किसानों को बचाता है।

जलवायु संबंधी दूसरी जानकारी किसानों के लिए फायदेमंद हैं। उपग्रह से मिले चित्रों, ड्रोन, सेंसर और दूसरे माध्यम से मिली जानकारी को एआई एक साथ समीक्षा कर सही जानकारी उपलब्ध कराता है।

कृषि में आधुनिक मशीनों का उपयोग

खेती को सही तरीके से करने के लिए उसका विश्लेषण जरूरी है। जीपीएस, सेंसर, उपग्रहों और ड्रोन की मदद से एआई भूमि की सटीक जानकारी देता है। मिट्टी की क्वालिटी, नमी का स्तर, फसल की पौष्टिकता से संबंधित डेटा को स्थानीय स्तर पर जमा करता है और पानी, उर्वरक, कीटनाशक जैसे इनपुट का ठीक उसी स्थान और समय पर डाला जाना सुनिश्चित करता है , जहाँ और जितनी उनकी आवश्यकता होती है। इससे उत्पादकता बढ़ती है और संसाधनों का अधिकतम उपयोग करता है जिससे किसानों का खर्च कम हो जाता है।

भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान रोबॉटिक खेती को विकसित करने में लगा हुआ है। इसमें जीपीएस के सहारे खुद चलने वाले ट्रैक्टर, एआई द्वारा बीजों के चयन, जमीन की उर्वरकता का पता लगाना, सिंचाई में रॉबोट का इस्तेमाल ताकि बुवाई, कटाई से लेकर सिंचाई तक को मानव रहित बनाने पर विचार हो रहा है। इससे किसानों के खर्च कम होंगे। यहाँ तक कि फसलों की गुणवत्ता अच्छी होगी। उनकी निगरानी करना आसान हो जाएगा और फसलों की बीमारी, पोष्टिकता और बीमारियों का इलाज भी आसानी से हो जाएगा।

भारत सरकार ने 22 अक्टूबर 2025 को “फ्यूचर फार्मिंग इन इंडिया: एआई प्लेबुक फॉर एग्रीकल्चर” शीर्षक से एक बुकलेट जारी किया। इसमें छोटे किसानों को कैसे एआई का जिम्मेदारीपूर्वक इस्तेमाल किया जाए, इसकी जानकारी दी गई है। इससे किसानों को अच्छी और कम खर्च पर फसलों को पाने और बाजार तक पहुँचाने में मदद मिलेगी।

स्वास्थ्य सेवा क्षेत्र में एआई

AI का उपयोग टीबी, कैंसर और न्यूरोलॉजी डिसऑर्डर का पता लगाने और उसके निदान में अहम भूमिका निभा रहा है। एआई भारत सरकार को स्वास्थ्य सेवाओं की डिलीवरी में आ रही कमियों की जानकारी देता है। चिकित्सा उपकरणों, सेवाओं और दवाओं की गुणवत्ता में सुधार लाने और उन्हें किफायती बनाने में मदद कर रहा है। यहाँ तक कि दूर बैठ कर बीमारियों का इलाज और देखभाल करने में मदद कर रहा है।

राष्ट्रीय टीबी उन्मूलन कार्यक्रम में एआई का इस्तेमाल किया जा रहा है। रोग को फैलने से जुड़ी 4500 चेतावनी जारी की गई। अप्रैल 2023 से नवंबर 2025 के बीच 282 लाख टेलीमेडिसिन सुझावों में एआई का इस्तेमाल हुआ और एआई के बताए गए निदान के जरिए 12 लाख रोगियों की मदद की गई।

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रेडियोलॉजी एआई के द्बारा कैंसर के संभावित मामलों के लिए गांठों और केविटीज की पहचान हेतु डिजिटल एक्स-रे की ऑटोमेटेड रीडिंग लेता है। ये 8 राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों में लागू है। इससे विशेषज्ञों की कमी को पूरा करने में मदद मिल रही है।

शुगर पेशेंट की रेटिना की जाँच अक्सर होती है। इसके अलावा दिखाई कम देने पर रेटिना पर प्रेशर पड़ता है। ऐसे में एआई रेटिनल ट्रायज नॉन स्किल लोगों को भी रेटिना की तस्वीर लेने में मदद करता है, उसकी रिडिंग, ग्रेडिंग करता है और जरूरी होने पर विशेषज्ञों को दिखाने को कहता है। भारत का पहला एआई-सक्षम सामुदायिक स्क्रीनिंग कार्यक्रम दिसंबर 2025 में लॉन्च किया गया
जीनोमिक-आयुर्वेद हाइब्रिड के माध्यम से प्रकृति और प्राचीन ग्रंथों के आधार पर रोग के संकेत पहचानने के लिए एआई का उपयोग हो रहा है। पारंपरिक ज्ञान के साथ एआई को एकीकृत करने के लिए डब्ल्यूएचओ ने इसे एक ग्लोबल मॉडल के तौर पर मान्यता दी। कैंसर रोगियों के लिए बायोबैंक तैयार किया जा रहा है जिसमें कैंसर रोगियों की प्रोफाइल होगी और ये शोधकर्ताओं को कैंसर का जल्दी पता लगाने और एआई टूल्स विकसित करने में मदद करता है। स्वास्थ्य संबंधी धोखाधड़ी को रोकने में भी एआई सहायक है।

विभिन्न रोगों के निदान और हाशिए पर रहने वाले समुदायों के स्वास्थ्य परिणाम में सुधार लाने से लेकर स्वच्छ जल जैसी बुनियादी सुविधाओं तक पहुँच सुनिश्चित करने तक भारत में स्वास्थ्य सेवा में एआई का नवाचारी उपयोग मानवता के लिए फायदेमंद है। मानव जीवन से जुड़ी महत्वपूर्ण चुनौतियों को हल करने, समावेशी सामाजिक और आर्थिक विकास को बढ़ावा देने और विकसित भारत @2047 के विजन को साकार करने के लिए प्रौद्योगिकी के उपयोग को साकार कर रहा है।

शिक्षा के क्षेत्र में एआई


राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के तहत एआई को CBSE पाठ्यक्रम, DIKSHA प्लेटफॉर्म और YUVAi जैसी पहल के माध्यम से छात्रों में कौशल का विकास किया जा रहा है। 38000 से अधिक GPUs ₹65 प्रति घंटे के हिसाब से मौजूद है जिससे एआई तक पहुँच को बढ़ावा मिला है। 5G अब 99.9 प्रतिशत जिलों में मौजूद है। इससे पूरे भारत में एआई इंफ्रास्ट्रक्चर को मजबूती मिल रही है। ए

आईकोश साझा राष्ट्रीय संसाधन के रूप में 7,500+ डेटासेट और 273 मॉडल दे रहा है। क्राफ्ट्समेन ट्रेनिंग स्कीम यानी शिल्पकार प्रशिक्षण योजना के तहत, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, इंडस्ट्रियल रोबोटिक्स और पर्यावरण के अनुकूल तकनीकों सहित 31 नए जमाने के पाठ्यक्रमों में प्रशिक्षण दिया जा रहा है। ये राष्ट्रीय कौशल प्रशिक्षण संस्थानों के राष्ट्रव्यापी नेटवर्क के माध्यम से संचालित किए जा रहे हैं। अनुसंधान आधारित नवाचार को बढ़ावा देने के लिए उत्कृष्टता केंद्र स्थापित किए जा रहे हैं।

दरअसल एआई का लोकतांत्रिकरण किया जा रहा है यानी सबके लिए इसे सुलभ, किफायती और उपयोगी बनाना है। आर्थिक मौके बढ़ाना है।

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भारत की सांस्कृतिक विरासत और भाषाई विविधता इसकी सामाजिक पहचान और साझा ज्ञान प्रणालियों को आकार देती है। एआई का इस्तेमाल पांडुलिपियों के डिजिटाइज़ेशन, शैक्षणिक सामग्री के अनुवाद और आदिवासी और लुप्तप्राय भाषाओं को शामिल करके सांस्कृतिक और ज्ञान संपत्तियों को इस्तेमाल लायक बनाने के लिए किया जा रहा है।

एआई का इस्तेमाल सांस्कृतिक और रचनात्मक क्षेत्रों को डिजिटली जोड़ने के साथ-साथ कारीगरों को प्लेटफॉर्म और नए अवसर प्रदान करने के लिए किया जा रहा है। सर्वम् एआई (Sarvam AI) भारतीय भाषाओं के लिए बड़े भाषा और स्पीच मॉडल विकसित कर रहा है, जिससे वॉइस इंटरफेस, दस्तावेजों की प्रोसेसिंग और नागरिक सेवाओं की आसान बनाया जा सके।

भाषिणी, राष्ट्रीय भाषा अनुवाद मिशन के तहत, में 350+ एआई मॉडल हैं, जिनमें स्पीच रिकग्निशन, मशीनी अनुवाद, टेक्स्ट-टु-स्पीच, ओसीआर और भाषा पहचानना शामिल हैं, जिससे डिजिटल सेवाएँ बहुभाषाई हो सकें।

बैंकिंग और वित्तीय सेवा

बैंकिंग और वित्तीय क्षेत्र में एआई का इस्तेमाल धोखाधड़ी का पता लगाने, व्यक्तिगत बैंकिंग, और कस्टमर सर्विस के लिए किया जा रहा है। इसका उपयोग संदिग्ध लेनदेन, बेनामी अकाउंट्स और असामान्य म्यूल अकाउंट्स के पैटर्न की पहचान करने के लिए किया जा रहा है। मशीन लर्निंग एल्गोरिदम का उपयोग करके एआई बैंकिंग डेटा का विश्लेषण करता है, जिससे धोखाधड़ी का पता लगाने में मदद मिलती है और बैंकों को करोड़ों के नुकसान से बचाया जा सकता है।

एआई ग्राहकों के सामान्य खर्च करने के पैटर्न को सीखता है और यदि कोई लेन-देन सामान्य पैटर्न से अलग होता है, तो उसे संदिग्ध मानकर तत्काल कार्रवाई (जैसे कार्ड ब्लॉक करना) करता है।

जनरेटिव एआई का उपयोग लोन एप्रूवल के दौरान पहचान पत्रों और दस्तावेजों की सत्यता की जाँच करने के लिए किया जा रहा है, ताकि फर्जीवाड़े को रोका जा सके।

कोर्ट और न्याय दिलाने में एआई का इस्तेमाल

कानून और लोगों को न्याय दिलवाने में एआई का इस्तेमाल होने लगा है। साल 2023 में शुरू हुए ई-कोर्ट फेज III के माध्यम से कोर्ट रूम और लेखागारों में बदलाव आ गया है। एआई का उपयोग अदालती फैसलों के अनुवाद, केस प्रबंधन और अनुसूची के लिए किया जा रहा है। दस्तावेजों की डिजिटल फाइलिंग की जा रही है। वाद सूचियों को व्यवस्थित किया जा रहा है। वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए सुनवाई नियमित तौर पर हो रही है। कोर्ट के रिकॉर्ड और फैसले पूरे देश में कहीं भी देखा और पढ़ा जा सकता है।

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सरकार, उच्चतम न्यायालय, उच्च न्यायालयों, एनआईसी और आईआईटी मद्रास जैसे संस्थानों की मदद से एआई टूल्स तैयार किया गया है जिससे मौखिक दलीलों का लिखना, फैसलों का अनुवाद, ईफाइलिंग में गलतियों को पहचानना, विधिक शोध शामिल है।

इसका असर किसी केस के फैसले के दौरान दोषी ठहराने, वाद-विवाद करने और तथ्यों को कोर्ट में रखने की परंपरा पर नहीं पड़ा है। लेकिन एआई का असर ये हुआ है कि अब लंबी सुनवाई की जरूरत नहीं है, तथ्यों को खोजने में कम वक्त, मातृभाषा में कोर्ट के फैसले की जानकारी, रिकॉर्ड ढूँढने में कम वक्त लगना जैसी सुविधाएँ बढ़ी हैं। इसका न्यायिक फैसले के मूल भावना पर असर नहीं पड़ता है, बल्कि मुकदमों में होने वाली देरी और तनाव से लोग बचते हैं। तारीख पे तारीख से लोगों को निजात आगे मिलेगी, ऐसी उम्मीद है।

विनिर्माण में एआई की अहम भूमिका

विनिर्माण के क्षेत्र में एआई का इस्तेमाल धड़ल्ले से हो रहा है। उद्योग और मोटर वाहनों की परिचालन दक्षता बढ़ाने में एआई अहम भूमिका निभा रहा है। इससे उत्पादन बढ़ाने, लागत कम करने और गुणवत्ता सुधारने में मदद मिल रही है। सेंसर डेटा के द्वारा खराब होने से पहले ही मशीनों की पहचान कर उसकी मरम्मत कर दी जाती है, जिससे अचानक बंद होने जैसी परेशानियों से बचा जा सकता है।

AI-पावर्ड विज़न कम्प्यूटर सिस्टम उत्पाद की गुणवत्ता की जाँच करते हैं, जो मनुष्य द्वारा किए जाने वाले निरीक्षण से ज्यादा अच्छा होता है और गड़बड़ी जल्दी पकड़ में आ जाती है। एआई बाजार का विश्लेषण कर ये बताता है कि माँग कितनी है जिससे आपूर्ति का अंदाजा लग जाता है।

डिजिटल सार्वजनिक अवसंरचना यानी डीपीआई के साथ एआई को जोड़कर सरकारी सेवाओं को सुलभ और कुशल बनाया जा रहा है। एआई का इस्तेमाल हर क्षेत्र में हो रहा है। इसका जिम्मेदारी से उपयोग के लिए दिशानिर्देश जारी किए गए हैं और गवर्नेंस फ्रेमवर्क विकसित किए जा रहे हैं। ताकि देश में एआई सुशासन में मदद करे। विश्वास के साथ पूरे देश की भलाई और लोकतंत्र को मजबूत करने में एआई अहम भूमिका निभाए। भारत इस नजरिए के साथ भारत@ 2047 डिजिटल मिशन पर है।

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रुपम
रुपम
रुपम के पास 20 साल से ज्यादा का पत्रकारिता का अनुभव है। जामिया मिलिया इस्लामिया विश्वविद्यालय से पत्रकारिता में पीजी डिप्लोमा। जी न्यूज से टेलीविज़न न्यूज चैनल में कामकाज की शुरुआत। सहारा न्यूज नेटवर्क के प्रादेशिक और नेशनल चैनल में टेलीविज़न की बारीकियाँ सीखीं। सहारा प्रोग्रामिंग टीम का हिस्सा बनकर सोशल मुद्दों पर कई पुरस्कार प्राप्त डॉक्यूमेंट्री का निर्माण किया। एडिटरजी डिजिटल हिन्दी चैनल में न्यूज एडिटर के तौर पर काम किया।

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