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मुंडन, गंगाजल से स्नान… अनवर शेख बने राधेश्याम, घर वापसी के बाद बोले- इस्लाम में महिलाओं का सम्मान नहीं, सनातन में देवियों की भी होती है पूजा

अनवर शेख का राधेश्याम के रूप में बदलना न सिर्फ उनका ह्रदय परिवर्तन था बल्कि सनातन की खासियत बताते हुए उन्होने कहा कि यहां महिलाओं को देवी का दर्जा दिया जाता है

हिन्दू धर्म के वैभव से प्रभावित होकर अनवर शेख ने इस्लाम छोड़कर सनातन धर्म अपनाया। मध्यप्रदेश के खंडवा के रहने वाले शेख अनवर अब राधेश्याम बन गए हैं। इस दौरान उनका मुंडन हुआ और गंगाजल से स्नान कराया गया। इसके बाद पूरे विधि विधान से सनातन धर्म में शामिल कर राधेश्याम नाम दिया गया।

मंदिर पर हुए अनुष्ठान के दौरान भगवान शिव के जयकारे हुए। इस मौके पर लोगों ने राधेश्याम को बधाई दी। राधेश्याम ने हिन्दू धर्म की अच्छाईयों की चर्चा की।

राधेश्याम का कहना है कि हिन्दू धर्म में वैभव और परंपराएं हैं। सभी लोगों को समान भाव से देखा जाता है। सनातन धर्म में धार्मिक स्थलों और अनुष्ठान सभी के लिए एक जैसे हैं। राधेश्याम का कहना है कि बचपन से ही उसके मन में सनातन धर्म की परंपरा का असर पड़ने लगा था।

महिलाओं के प्रति हिन्दू धर्म में जितनी श्रद्धा है, देवी के रूप में महिलाओं की पूजा की जाती है। महिलाओं के प्रति जितनी श्रद्धा है वो दूसरे किसी धर्म में नहीं है। यहां तक कि धरती और नदियों को भी माँ का दर्जा दिया जाता है। राधेश्याम का पेड़-पौधों से भी गहरा लगाव है।

अनवर शेख यानी राधेश्याम ने लक्ष्मी नाम की हिन्दू लड़की से शादी किया। पत्नी का हिन्दू धर्म के प्रति लगाव ने भी अनवर को राधेश्याम बनने के लिए आकर्षित किया। हालाँकि 23 साल तक उन्होने धर्म परिवर्तन नहीं किया था। इस बीच सनातन को समझा।

राधेश्याम का कहना है कि खंडवा के महादेवगढ़ में इससे पहले 5 अन्य लोग भी हिन्दू धर्म में शामिल हो चुके हैं। फिरोज राहुल बन गया था जबकि इमरान का नाम ईश्वर पड़ा। आदिल को आदित्य नाम दिया गया जबकि मुस्तफा को मारुति नंदन के नाम से अब जाना जाता है। इनलोगों ने जीवन की नई शुरुआत की। इस्लाम छोड़कर सनातन की शरण में आए इनलोगों के दिनचर्या में भी काफी परिवर्तन आ गया।

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ऑपइंडिया स्टाफ़
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कार्यालय संवाददाता, ऑपइंडिया

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