Homeदेश-समाजजिन जस्टिस यशवंत वर्मा ने 'कैश कांड' में दिया इस्तीफा, उन्होंने 13 पन्नों का...

जिन जस्टिस यशवंत वर्मा ने ‘कैश कांड’ में दिया इस्तीफा, उन्होंने 13 पन्नों का लिखा पत्र: पढ़ें- अपने ऊपर लगे आरोपों का क्या दिया जवाब?

जस्टिस यशवंत वर्मा ने कहा कि यह जाँच केवल उन्हें हटाने के मकसद से की जा रही है, न कि सच जानने के लिए और इसलिए वह इस अपमानजनक और अन्यायपूर्ण प्रक्रिया का हिस्सा नहीं बने रहेंगे। अंत में जस्टिस यशवंत वर्मा ने आत्मसम्मान के लिए इस्तीफा देने का सोचा।

इलाहाबाद हाई कोर्ट के जज जस्टिस यशवंत वर्मा ने अपने पद से इस्तीफा देकर न्यायिक गलियारों में खलबली मचा दी है। उन्होंने राष्ट्रपति को अपना इस्तीफा भेजकर तत्काल प्रभाव से पद छोड़ने की घोषणा की है। यह इस्तीफा उस समय आया है जब उनके खिलाफ महाभियोग की प्रक्रिया चल रही थी।

पूरा विवाद 14 मार्च 2025 को उनके दिल्ली स्थित सरकारी आवास के एक स्टोररूम में लगी आग से शुरू हुआ था। आग बुझाने के दौरान वहाँ से भारी मात्रा में कैश बरामद हुआ था, जिसके बाद से उन पर भ्रष्टाचार के आरोप लगने लगे थे। जस्टिस यशवंत वर्मा ने अब ‘जजों की जाँच समिति’ को एक 13 पन्नों का विस्तृत पत्र लिखा है।

जस्टिस यशवंत वर्मा ने इस पत्र में पूरी घटना को अपने खिलाफ एक सुनियोजित साजिश बताया है। उन्होंने आरोप लगाया कि पूरी जाँच प्रक्रिया में उनके अधिकारों का हनन किया गया और उन्हें अपनी बेगुनाही साबित करने का कोई उचित मौका भी नहीं दिया गया।

छुट्टियों के बीच लगी आग और साजिश का दावा

जस्टिस यशवंत वर्मा ने अपने पत्र में स्पष्ट किया कि जिस दिन यह घटना हुई, वे वहाँ मौजूद नहीं थे। वे 12 मार्च 2025 को होली की छुट्टियों के लिए दिल्ली से बाहर गए हुए थे। वे एक ऐसे दुर्गम इलाके में थे जहाँ मोबाइल नेटवर्क बहुत कम काम कर रहा था। उन्हें 15 मार्च की रात करीब सवा एक बजे आग लगने की सूचना मिली। तब तक फायर सर्विस और पुलिस ने न केवल आग बुझा दी थी, बल्कि वहाँ मौजूद कैश के Video भी रिकॉर्ड कर लिए थे।

जस्टिस वर्मा का कहना है कि उन्हें इन Video या कैश के बारे में कोई जानकारी पहले से नहीं थी। उनके वापस आने से पहले ही ये वीडियो Supreme Court की बेवसाइट पर डाल दिए गए। मीडिया में इस खबर को इस तरह पेश किया गया जैसे वह सारा पैसा उनका ही हो। जस्टिस यशवंत वर्मा ने सवाल उठाया कि जब वे वहाँ थे ही नहीं, तो उन्हें इस कैश के लिए जिम्मेदार कैसे ठहराया जा सकता है? उनके अनुसार, यह उन्हें सार्वजनिक रूप से बदनाम करने की एक कोशिश थी।

स्टोररूम का रहस्य और सुरक्षा में सेंध

जस्टिस यशवंत वर्मा ने उस स्टोररूम की बनावट और इस्तेमाल पर भी कई चौंकाने वाले फैक्ट्स रखे हैं। उन्होंने बताया कि वह स्टोररूम मुख्य घर और उनके ऑफिस से बिल्कुल अलग बना हुआ था। वहाँ जाने के लिए पीछे के गेट का इस्तेमाल होता था, जहाँ कोई सुरक्षा तैनात नहीं थी। इस कमरे का इस्तेमाल घरेलु कर्मचारी, मेंटेनेंस स्टाफ और बाहरी लोग पुराना सामान रखने के लिए करते थे। वहाँ अक्सर कबाड़, पुराने बर्तन और बागबानी के औजार रखे जाते थे।

जस्टिस यशवंत वर्मा के मुताबिक, वह कमरा अक्सर बिना ताले के रहता था और चाबी उनके पास नहीं होती थी। वे खुद दो साल में सिर्फ चार या पाँच बार ही उस कमरे में गए थे। सबसे अहम बात यह है कि स्टोररूम के बाहर एक CCTV कैमरा लगा था, लेकिन उसका कंट्रोल जज साहब के पास नहीं था। उन्होंने कई बार इस कैमरे की फुटेज माँगी ताकि सच सामने आ सके, लेकिन जाँच एजेंसियों ने उन्हें फुटेज देने से बार-बार मना कर दिया। जस्टिस वर्मा के अनुसार, उनके पास सुरक्षा का कोई नियंत्रण नहीं था, फिर भी उन्हें जवाबदेह ठहराया गया।

जाँच प्रक्रिया में गंभीर खामियाँ और पक्षपात

जस्टिस वर्मा ने जाँच करने वाली समितियों (IHC और इन्क्वायरी कमेटी) की कार्यप्रणाली पर कड़े प्रहार किए हैं। उन्होंने बताया कि अगस्त 2025 में बनी कमेटी से पहले एक इन-हाउस कमेटी (IHC) ने जाँच की थी। उस समय गवाहों के बयान जस्टिस यशवंत वर्मा की अनुपस्थिति में दर्ज किए गए। उन्हें गवाहों से सवाल पूछने या जिरह करने का कोई मौका नहीं दिया गया। जस्टिस यशवंत वर्मा ने लिखा कि IHC की रिपोर्ट गोपनीय होनी चाहिए थी, लेकिन इसे सार्वजनिक कर दिया गया।

जस्टिस यशवंत वर्मा ने आरोप लगाया कि जाँच समिति ने सिर्फ उन्हीं सबूतों को चुना जो उनके खिलाफ जा सकते थे। जो सबूत जस्टिस यशवंत वर्मा के पक्ष में थे, उन्हें जानबूझकर हटा दिया गया। उदाहरण के तौर पर उन्होंने ‘आधिकारिक फायर रिपोर्ट’ का जिक्र किया। इस सरकारी रिपोर्ट में कहीं भी कैश मिलने का कोई जिक्र नहीं था। साथ ही रिपोर्ट दिखाती थी कि अधिकारी आग बुझने के काफी बाद तक वहाँ मौजूद थे। जस्टिस वर्मा ने जब इस रिपोर्ट को गवाहों के सामने पेश करना चाहा, तो समिति ने उन्हें ऐसा करने की अनुमति नहीं दी।

गवाहों को हटाने का संदिग्ध पैटर्न

पत्र का एक बड़ा हिस्सा गवाहों के साथ हुए व्यवहार पर केंद्रित है। जस्टिस वर्मा ने बताया कि जाँच के दौरान कुल 54 गवाहों में से 27 को बिना कोई कारण बताए हटा दिया गया। इसमें दिल्ली फायर सर्विस और दिल्ली पुलिस के वे वरिष्ठ अधिकारी शामिल थे, जिनकी गवाही से यह सच सामने आ सकता था कि कैश को लेकर क्या खेल हुआ। जिरह में यह बात सामने आई थी कि बड़े अफसरों ने रात 12:15 बजे ही तय कर लिया था कि वे कैश मिलने की बात सरकारी रिकॉर्ड में दर्ज नहीं करेंगे।

जस्टिस यशवंत वर्मा का तर्क है कि उस समय तक तो उन्हें आग की खबर भी नहीं थी, तो इसमें उनकी मिलीभगत कैसे हो सकती है? जैसे ही यह तथ्य सामने आया, उन अधिकारियों को गवाहों की सूची से निकाल दिया गया। इसी तरह उनके 3 निजी सुरक्षा अधिकारियों (PSO) के मामले में भी खेल हुआ। जब जस्टिस वर्मा ने उनके मोबाइल लोकेशन और गूगल रिकॉर्ड्स की जाँच की माँग की ताकि उनके झूठ को पकड़ा जा सके, तो कमेटी ने तुरंत तीनों PSO को गवाह के रूप में हटा दिया।

साबित करने का उल्टा भार और इस्तीफा

जस्टिस यशवंत वर्मा ने बड़े दुख के साथ लिखा कि उनके 13 साल के न्यायिक करियर में उन पर कभी भ्रष्टाचार का आरोप नहीं लगा। इस मामले में भी उन पर सीधे कोई आरोप या सबूत नहीं है। पूरी जाँच सिर्फ ‘अनुमानों’ और ‘इशारों’ पर आधारित है। उनसे यह उम्मीद की गई कि वह उन बातों को गलत साबित करें जो उन्होंने की ही नहीं। आमतौर पर अभियोजन को दोष साबित करना होता है, लेकिन यहाँ जज साहब से अपनी बेगुनाही का सबूत माँगा जा रहा था।

जस्टिस यशवंत वर्मा ने लिखा कि उनसे ‘मल्टीपल नेगेटिंव’ साबित करने को कहा गया, जो कानून के सिद्धांतों के खिलाफ है। उन्हें लगा कि यह जाँच केवल उन्हें हटाने के मकसद से की जा रही है, न कि सच जानने के लिए। अंत में उन्होंने फैसला किया कि वह इस अपमानजनक और अन्यायपूर्ण प्रक्रिया का हिस्सा नहीं बने रहेंगे। जस्टिस यशवंत वर्मा ने इस्तीफा देते हुए लिखा कि वह संस्था के प्रति अपनी जिम्मेदारी समझते हैं और आत्मसम्मान के लिए पद छोड़ रहे हैं। उन्होंने उम्मीद जताई कि इतिहास एक दिन उनके साथ हुए इस व्यवहार का हिसाब जरूर करेगा।

Join OpIndia's official WhatsApp channel

  सहयोग करें  

'द वायर' जैसे राष्ट्रवादी विचारधारा के विरोधी वेबसाइट्स को कभी पैसों की कमी नहीं होती। देश-विदेश से क्रांति के नाम पर ख़ूब फ़ंडिग मिलती है इन्हें। इनसे लड़ने के लिए हमारे हाथ मज़बूत करें। जितना बन सके, सहयोग करें

ऑपइंडिया स्टाफ़
ऑपइंडिया स्टाफ़http://www.opindia.in
कार्यालय संवाददाता, ऑपइंडिया

संबंधित ख़बरें

ख़ास ख़बरें

जिस ‘पाकिस्तानी ग्रूमिंग गैंग’ पर कीर स्टार्मर समेत ब्रिटेन के तमाम PM रहे मौन, उसके खिलाफ सिर्फ ऋषि सुनक ने उठाई थी आवाज: जानिए...

कीर स्टार्मर ने प्रधानमंत्री पद से इस्तीफा दे दिया। उन्होंने पाकिस्तानी 'ग्रूमिंग गैंग्स' पर लगाम नहीं कसा, जबकि पूर्व पीएम ऋषि सुनक ने रेपिस्टों की टोली के खिलाफ कड़े कदम उठाए थे।

6 पर FIR, 4 गिरफ्तार और 4 अधिकारी सस्पेंड: लखनऊ अलीगंज अग्रिकांड में CM योगी ने रातोंरात लिया सख्त एक्शन, SIT गठित कर कहा-...

लखनऊ में अलीगंज क्षेत्र में हुए भीषण अग्निकांड के बाद मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने देर रात तक लगातार मॉनिटरिंग करते हुए सख्त कार्रवाई के निर्देश दिए।
- विज्ञापन -