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नेहरू ने दिया था गाँव को ‘चीनी मुक्कु’ नाम, अब गलवान झड़प के बाद स्थानीय कर रहे इसे बदलने की माँग

कोन्नी पंचायत के उपाध्यक्ष प्रवीण ने पंचायत को इस संबंध में एक ज्ञापन दिया है। इसमें उन्होंने लिखा, "चीन द्वारा युद्ध जैसी स्थिति बनाने के लिए और भारतीय सैनिकों की शहादत को गौर करते हुए इस नाम को बदला जाना चाहिए। गलवान के बाद यहाँ के लोग इस नाम को नहीं बोलना चाहते। लोग इसे बदलना चाहते हैं।"

गलवान घाटी में चल रहे भारत चीन विवाद के मद्देनजर केरल के एक गाँव ने अपना नाम बदलवाने की माँग की है। गाँव का नाम वर्तमान में चीनी मुक्कु है। ये नाम इस गाँव को देश के पहले प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू की बदौलत मिला था।

मगर, अब यहाँ के स्थानीयों का मानना है कि भारत-चीन के बीच जो कुछ भी हुआ, उसके बाद उनके लिए ये नाम किसी शर्मिंदगी से कम नहीं है। इसलिए उन्होंने अर्जी लगाई है कि कोन्नी ग्राम पंचायत के अंतर्गत आने वाले इस गाँव का नाम परिवर्तित किया जाए। इसे लेकर गाँव के लोगों ने एक प्रस्ताव भी तैयार किया है।

कोन्नी पंचायत के उपाध्यक्ष प्रवीण ने पंचायत को इस संबंध में एक ज्ञापन दिया है। इसमें उन्होंने लिखा, “चीन द्वारा युद्ध जैसी स्थिति बनाने के लिए और भारतीय सैनिकों की शहादत को गौर करते हुए इस नाम को बदला जाना चाहिए। गलवान के बाद यहाँ के लोग इस नाम को नहीं बोलना चाहते। लोग इसे बदलना चाहते हैं।”

इसी प्रकार कोन्नी के पंचायत अध्यक्ष, रजनी ने कहा कि पंचायत इस संबंध में प्रस्ताव को आगे बढ़ाने और इस जगह का नाम बदलने के लिए राज्य सरकार को एक प्रस्ताव भेजने की योजना बना रही है।

उन्होंने कहा, “ऐसा लगता है सीपीएम सहित कोई भी पार्टी इस प्रस्ताव का ज्यादा प्रतिरोध नहीं करेगी क्योंकि स्थानीय लोग खुद ही जगह का नाम बदलवाना चाहते हैं।”

कैसे पड़ा जगह का चाइना मुक्कु नाम?

कोन्नी में पिछले 23 साल से राजनीति कर रहे कॉन्ग्रेसी नेता अदूर प्रकाश इस संबंध में जानकारी देते हुए बताते हैं कि साल 1952 में जब देश में पहले आम चुनाव हो रहे थे, तब भारत के पहले प्रधानमंत्री जवाहर लाल नेहरू केरल में प्रचार के लिए पहुँचे। इसी दौरान वह पथनमथिट्टा जिले में एक इलाके से खुली जीप में गुजर रहे थे।

चारों तरफ सड़कों और लोगों के घरों पर कॉन्ग्रेस के झंडे लगे हुए थे। नेहरू तभी एक ऐसे इलाके में पहुँचे, जहाँ कॉन्ग्रेसी झंडे नहीं बल्कि केवल लाल झंडे दिखने लगे। यह कम्युनिस्ट बहुल इलाका था। इसे देखकर नेहरू ने अपने बगल में बैठे शख्स से पूछा, ‘क्या यह चीन जंक्शन है।’ इसके बाद से ही उस इलाके का नाम चीनी मुक्कू पड़ गया।

उल्लेखनीय है कि इलाके के नाम से चीन जुड़ा होने पर वहाँ के लोग लोग सहज महसूस नहीं कर पा रहे हैं। सीमा पर पड़ोसी देश के साथ तनाव के बाद से ही गाँव का नाम बदलने को लेकर चर्चा चल रही है। पंचायत समिति के वाइस चेयरमैन प्रवीन ने कहा कि मौजूदा परिस्थितियों को देखते हुए यह नाम बदल ही देना चाहिए।

हालाँकि, वर्तमान में, इस नाम के बदले में अभी कोई विकल्प सामने नहीं आया है। लेकिन ये खबर जरूर है कि पंचायत इस संबंध में रेसोल्यूशन पास करेगी और बाद में राज्य सरकार इस मामले पर अंतिम फैसला लेगा। बता दें, पंचायत पैनल में कॉन्ग्रेस यूडीएफ का बहुमत है। 18 में से 13 सदस्य यूडीएफ के हैं जबकि बाकी 5 एलडीएफ के सदस्य हैं।

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ऑपइंडिया स्टाफ़
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कार्यालय संवाददाता, ऑपइंडिया

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