उत्तर प्रदेश के कोडिन युक्त कफ सिरप विवाद में बीते दिनों वाराणसी में पुलिस ने नई गिरफ्तारियाँ की हैं। वाराणसी पुलिस ने खुलासा किया कि गिरफ्तार किए गए 5 अभियुक्तों के जरिए 23 करोड़ रुपए का अवैध कारोबार किया गया है।
इस मामले में भी सेल कंपनियों के जरिए इस अवैध कारोबार को अंजाम दिया जा रहा था। ये सभी आरोपित अपने सरगना शुभम जायसवाल के इशारे पर फर्जी कंपनियाँ बनाकर पैसे और सिरप को रूट करते थे। कफ सिरप की तस्करी बांग्लादेश की जाती थी और पैसे को सोने और हवाला के माध्यम से बनारस लाया जाता था।
इसके अलावा मिर्जापुर पुलिस के द्वारा 25,000 रुपए के एक इनामी को गिरफ्तार किया गया है। गिरफ्त में आए आरोपी का नाम कृष्ण कुमार यादव है। इसकी मेसर्स सिटी मेडिसेल्स के जरिए दिल्ली की फर्मों से 4.5 लाख से ज्यादा 100ML वाला कोडिन युक्त कफ सिरप खरीदा गया। इसके अन्य साथियों को पुलिस पहले ही पकड़ चुकी है। कंपनियों के खातों की जाँच करने पर सामने आया कि इनसे 15 करोड़ रुपए का व्यापार किया जा चुका है।
मुख्यमंत्री का जीरो टॉलरेंस का आदेश
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने प्रदेश के पुलिस-प्रशासन को सीधा आदेश दिया हुआ है कि इस कोडिन युक्त कफ सिरप के कारोबार में शामिल किसी भी आरोपित को बख्शा नहीं जाना चाहिए। इसीलिए पुलिस के द्वारा पहले मुख्य आरोपितों पर नकेल कसी गई। अब पुलिस जिला स्तर पर ऑपरेट करने वाले गुनहगारों को भी पकड़ रही है। तेजी के साथ इस पूरे नेटवर्क पर नकेल कसी जा रही है।
कफ सिरप मामले का सपा कनेक्शन
इस मामले की जाँच करते हुए पुलिस के सामने समाजवादी पार्टी के पूर्व विधायक का जिक्र भी बार बार उठ रहा है। News18 की रिपोर्ट के अनुसार, STF अभी तक उस विधायक का नाम नहीं बता रही है लेकिन बताया जा रहा है कि वो पूर्व विधायक पूर्वांचल में समाजवादी पार्टी का बड़ा चेहरा है। सूत्रों के अनुसार, ED अभी उस विधायक के बैंक खातों और संपर्कों की जाँच कर रही है।
आपको याद होगा कि विधानसभा के शीतकालीन सत्र के दौरान जब समाजवादी पार्टी के नेताओं की तरफ से सदन में हंगामा किया गया तो मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की तरफ से कफ सिरप कांड के एक मुख्य आरोपित आलोक सिंह (पूर्व सिपाही) का जिक्र किया गया था। मुख्यमंत्री ने कहा था कि आलोक सिपाही है, पक्का सपाई। सपा मुखिया अखिलेश यादव के साथ आलोक सिंह की एक तस्वीर सामने आने के बाद प्रदेश में मामला पहले से ही गरम था।
इसके बाद जब आलोक सिंह के पूर्व अपराधों की फाइल खुली तो 2006 में हुए 3 किलो सोने के लूटकांड का मामला भी उछल गया। 2006 में राज्य में मुलायम सिंह यादव की सरकार थी और आलोक सिंह की तैनाती लखनऊ क्राइम ब्रांच में थी। 19 सितंबर 2006 को प्रयागराज के एक व्यापारी ने उत्तर प्रदेश पुलिस के कई कर्मचारियों पर आरोप लगाया कि उन्होंने उसका 3 किलो सोना लूट लिया है। इसके बाद 2019 में लखनऊ में माफिया मुख्तार अंसारी के एक करीबी पर गोली चली तो आलोक सिंह का नाम भी सामने आया। इस मामले में तत्कालीन SSP कला निधि नैथानी ने आलोक सिंह को बर्खास्त कर दिया था।
अब STF की जाँच में एक और समाजवादी पार्टी के नेता का नाम उठने के बाद फिर से बहस शुरू हो गई है कि आखिर इस हजारों करोड़ के अवैध कारोबार के पीछे का असली मास्टरमाइंड कौन है? फिलहाल जाँच में सीधे तौर पर जो नाम सामने आ रहा है वो है शुभम जायसवाल का।
कौन है कोडिन युक्त सिरप मामले का मास्टरमाइंड शुभम जायसवाल?
शुभम जायसवाल वाराणसी का रहने वाला है और बनारस हिंदू विश्वविद्यालय से ग्रेजुएट करने के बाद अपने परिवार के कथित फार्मास्यूटिकल बिजनेस में उतरा था। ज्यादा पैसे कमाने के लालच में कोडिन युक्त कफ सिरप का नेटवर्क बनाया। 2018 के आसपास उसने पिता भोला प्रसाद के साथ दवा कारोबार को तेजी से फैलाया और 2022–23 में रांची की मेसर्स शैली ट्रेडर्स व वाराणसी की न्यू वृद्धि फार्मा जैसी 93 फर्मों के जरिए भारी मात्रा में कफ सिरप खरीदना शुरू किया। इसे कागजों पर उत्तर प्रदेश और दूसरे राज्यों में दिखाकर असल में बांग्लादेश, नेपाल व पूर्वी भारत के इलाकों में सप्लाई करने के आरोप हैं।
जाँच एजेंसियाँ के मुताबिक, शुभम ने फर्जी ड्रग लाइसेंस, शेल कंपनियाँ और फर्जी ई‑बिल बनवाकर करीब 100 करोड़ रुपए से ज्यादा कीमत की लाखों बोतलें रूट कराईं जिनसे कमाया गया पैसा हवाला और सोने के जरिए वापस बनारस लाया जाता था। इस मामले में शुभम के पिता भोला जायसवाल को भी STF के द्वारा गिरफ्तार किया गया है।
भोला जायसवाल खुद को सिर्फ साइनिंग अथॉरिटी बताकर सारी जिम्मेदारी बेटे और चार्टर्ड अकाउंटेंट पर डाल रहा है। इस पूरे मामले में शुभम पर कई जिलों में NDPS और आर्थिक धाराओं में केस दर्ज हैं, वह अभी फरार है और पुलिस, STF व ED उसे इस अवैध धंधे का मास्टरमाइंड बता रही हैं।
कौन है भोला प्रसाद जिसने 7000 की नौकरी की आड़ में बनाया हजारों करोड़ का कारोबार?
कोडिन कफ सिरप तस्करी के इस बड़े रैकेट में शुभम जायसवाल के पिता भोला प्रसाद ने फर्जी बिल और ड्रग लाइसेंसों के जरिए शेल कंपनियाँ बनाने का जाल बिछाकर मुख्य भूमिका निभाई है। भोला ने झारखंड में शैली ट्रेडर्स का गोदाम 3 लाख रुपए मासिक किराए पर लिया। इसके साथ-साथ ड्रग विभाग से लाइसेंस प्राप्त करने के लिए एक मेडिकल फर्म में मात्र 7000 रुपए प्रति माह की नौकरी का अपना एक नकली अनुभव प्रमाण-पत्र भी हासिल कर लिया।
इसी शैली ट्रेडर्स के जरिए अमित टाटा, आलोक सिंह सिपाही और अन्य आरोपितों ने फर्जी फर्में खड़ी कर उत्तर प्रदेश की 100 से ज्यादा फार्मों के माध्यम से कफ सिरप की फर्जी बिक्री दिखाकर तस्करी के अवैध कारोबार को चलता रहा। फिलहाल झारखंड में भोला प्रसाद के नाम पर दो FIR दर्ज हैं जिनमें फर्जी दस्तावेजों से गोदाम शुरू करने का खुलासा हुआ है।
दरअसल, भोला प्रसाद ने उस गोदाम को किराए पर हासिल कर लिया था जिसे रांची इंडस्ट्रियल अथॉरिटी ने भिलाई केमिकल्स के जगन्नाथ साहू को लीज पर दिया था। उसे अवैध रूप से किराए पर हासिल करके सरकारी संपत्ति का दुरुपयोग किया। राँची के दुर्गा हटिया थाने में ड्रग इंस्पेक्टर ने NDPS के तहत शुभम-भोला के खिलाफ FIR दर्ज कराई, जिसमें अमित सिंह, टाटा आलोक प्रताप सिंह की फर्मों समेत आठ अन्य फार्मों का जिक्र है। सोनभद्र SIT जांच में सामने आया कि शैली ट्रेडर्स के ज़रिए सिलीगुड़ी-दार्जिलिंग तक कोडिन सिरप की तस्करी हुई।
हालाँकि, मामला खुलने के बाद भोला प्रसाद खुद को केवल साइनिंग अथॉरिटी बताकर बचाना चाह रहा है। विदेश में छुपकर बैठे अपने बेटे शुभम जायसवाल के ऊपर सारे आरोपों को डाल देना चाह रहा है। लेकिन पुलिस की मंशा है कि सिरप को नशे का मध्यम बना देने वाले अपराधियों के पूरे नेक्सस को ही खत्म कर दिया जाए। ED की तरफ़ से फ़िलहाल जायसवाल परिवार की 30 करोड़ की संपत्ति को कुर्क करने की तैयारी की जा रही है।


