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इस बार दिल्ली-गुरुग्राम में शिमला-देहरादून से भी ज्यादा सर्दी, जलवायु परिवर्तन या वजह कुछ और? पढ़ें- हर सवाल का जवाब

उत्तर-पश्चिमी हवाएँ बर्फीले पहाड़ों से ठंडी हवा ला रही हैं, जिससे मैदानी इलाकों में ठंड और बढ़ गई है। IMD ने दिल्ली-एनसीआर के लिए ऑरेंज अलर्ट जारी किया है और अगले 48 घंटे गंभीर ठंड की चेतावनी दी है।

उत्तर भारत इस समय भीषण शीतलहर की चपेट में है, जिससे जनजीवन पूरी तरह अस्त-व्यस्त हो गया है। दिल्ली, गुरुग्राम समेत पूरे NCR में मंगलवार (13 जनवरी 2026) को कड़ाके की ठंड ने लोगों को घरों में कैद रहने पर मजबूर कर दिया। हड्डियाँ जमा देने वाली ठंडी हवाओं और गिरते तापमान के कारण सड़कों पर आवाजाही बेहद कम देखी गई, जबकि सुबह और रात के समय ठंड का असर और ज्यादा तीखा रहा।

लगातार जारी इस ठंड ने आम लोगों की दिनचर्या, कामकाज और यातायात व्यवस्था को बुरी तरह प्रभावित किया है। स्कूल, दफ्तर और खुले बाजारों में भी सर्दी का साफ असर देखा जा रहा है।

गुरुग्राम में ऐतिहासिक गिरावट

भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (IMD) के आंकड़ों के अनुसार, सोमवार सुबह (12 जनवरी 2026) को गुरुग्राम में न्यूनतम तापमान मात्र 0.6 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया। यह पिछले 50 वर्षों में जनवरी महीने की सबसे ठंडी सुबह रही।

हिंदुस्तान टाइम्स से छवि

यह तापमान 22 जनवरी 1977 को दर्ज न्यूनतम तापमान के बराबर है और ऐसा बहुत कम बार ही देखने को मिला है। इससे पहले 5 दिसंबर 1966 को तापमान शून्य से नीचे गिरकर माइनस 0.4 डिग्री सेल्सियस रहा था, 11 जनवरी 1970 को 0 डिग्री और 22 जनवरी 1979 को 0.3 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया था। वहीं दिल्ली भी ज्यादा पीछे नहीं रही, जहाँ सफदरजंग मौसम केंद्र पर न्यूनतम तापमान 3 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया।

हरियाणा और राजस्थान के आसपास के इलाकों में भी तापमान शून्य के आसपास या उससे नीचे दर्ज किया गया। हरियाणा के हिसार में न्यूनतम तापमान 2.6 डिग्री सेल्सियस, करनाल में 3.5 डिग्री सेल्सियस रहा, जबकि राजस्थान के सीकर जिले के फतेहपुर में तापमान शून्य से नीचे चला गया। वहीं, पंजाब के अमृतसर और हरियाणा के गुरुग्राम में भी कड़ाके की ठंड देखने को मिली, जहाँ न्यूनतम तापमान मात्र 1.1 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया।

दिल्ली शिमला से ज्यादा ठंडा है

इस बार सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि मैदानी इलाकों में पहाड़ी क्षेत्रों से भी ज्यादा ठंड पड़ रही है। दिल्ली और आसपास के इलाकों में तापमान, शिमला जैसे हिल स्टेशनों से भी नीचे चला गया है।

सोमवार (12 जनवरी 2026) को शिमला में अधिकतम तापमान करीब 16 डिग्री सेल्सियस और न्यूनतम तापमान 9 डिग्री सेल्सियस रहने का अनुमान था, जबकि दिल्ली में न्यूनतम तापमान 3 से 4.2 डिग्री सेल्सियस और अधिकतम 18 से 20 डिग्री सेल्सियस के बीच रहने की संभावना जताई गई थी।

तापमान अपेक्षाकृत अधिक रहने के कारण हिमालयी राज्यों के कई हिल स्टेशनों पर इस साल बर्फबारी नहीं हुई या फिर पिछले वर्षों की तुलना में काफी कम बर्फबारी दर्ज की गई।

ग्राफ वाया ईज वेदर

हिमाचल प्रदेश के शिमला और कुल्लू जैसे इलाकों में फिलहाल किसी तरह की मौसम को लेकर चेतावनी जारी नहीं की गई है। वहीं दिल्ली में हर दिन ‘कोल्ड डे’ जैसी स्थिति बने रहने की संभावना है और बाद के दिनों में आसमान आंशिक रूप से बादल छाए रहने का अनुमान है। हैरानी की बात यह है कि इस समय दिल्ली और चंडीगढ़ जैसे मैदानी इलाके, शिमला जैसे पहाड़ी क्षेत्र से भी अधिक ठंडे बने हुए हैं।

मैदानी इलाके पहाड़ों से ज्यादा ठंडे क्यों होते हैं?

इस जनवरी में मैदानी इलाकों का पहाड़ों से ज्यादा ठंडा होना मौसम के कुछ खास कारणों का नतीजा है। सक्रिय पश्चिमी विक्षोभ (वेस्टर्न डिस्टर्बेंस) के कारण शिमला जैसे ऊँचे पहाड़ी इलाकों में बादल छाए रहे, जो रात के समय एक तरह से कंबल की तरह काम करते हैं और जमीन की गर्मी को बाहर निकलने से रोकते हैं।

IMD के महानिदेशक एम मोहापात्रा के अनुसार, बादल छाए रहने की वजह से शिमला में न्यूनतम तापमान अपेक्षाकृत अधिक, करीब 8.8 डिग्री सेल्सियस रहा। वहीं कांगड़ा और पालमपुर में 3 डिग्री, जम्मू में 3.4 डिग्री, उत्तराखंड के मुक्तेश्वर में करीब 4.1 डिग्री और मसूरी में 7.7 डिग्री सेल्सियस न्यूनतम तापमान दर्ज किया गया।

इसके उलट दिल्ली-एनसीआर में आसमान साफ रहा, जिससे रात में जमीन की गर्मी तेजी से बाहर निकल गई। इसे रेडिएटिव कूलिंग कहा जाता है। बादल न होने के कारण तापमान तेजी से गिरा और दिल्ली में न्यूनतम तापमान 3 डिग्री सेल्सियस तक पहुँच गया, जबकि आसपास के इलाकों में इससे भी कम रहा। ऊपर से उत्तर-पश्चिमी हवाएँ बर्फ से ढके पहाड़ों से बेहद ठंडी हवा सीधे मैदानी इलाकों में ले आईं, जिससे कड़ाके की ठंड पड़ गई।

NDTV की रिपोर्ट के अनुसार, IMD के नरेश कुमार ने बताया कि फिलहाल उत्तर-पश्चिम भारत में कोई सक्रिय पश्चिमी विक्षोभ नहीं है, बल्कि 5 से 6 किलोमीटर ऊँचाई तक फैली ठंडी हिमालयी हवाएँ मैदानी इलाकों में ठंडी हवा जमा कर रही हैं। पहाड़ी क्षेत्रों में ऊँचाई, ढलान और बादलों के कारण तापमान संतुलित रहता है और जमीन की गर्मी फँस जाती है, जिससे शिमला अपेक्षाकृत गर्म बना रहता है।

दिल्ली में प्रदूषण और शुष्क हवा के कारण तापमान इनवर्जन भी बन रहा है, जिससे ठंड सतह के पास ही फँसी रहती है। अन्य मैदानी इलाकों में भी यही हाल रहा हिसार में 2.6 डिग्री, अमृतसर में 1.1 डिग्री, चूरू में 1.3 डिग्री, करनाल में 3.5 डिग्री और मेरठ में 4.5 डिग्री सेल्सियस न्यूनतम तापमान दर्ज किया गया। पंजाब के बठिंडा में गुरुग्राम के बराबर 0.6 डिग्री तापमान रहा, जबकि राजस्थान के फतेहपुर में पारा शून्य से नीचे माइनस 0.4 डिग्री तक गिर गया।

गुरुग्राम के बाहरी इलाकों और हरियाणा के ग्रामीण क्षेत्रों में पाला जम गया, गाड़ियों और फसलों पर बर्फ की सफेद परत दिखी, सरसों के खेत मानो चीनी से ढक गए हों। उत्तर प्रदेश के शहरों में दिन का तापमान 13 से 19 डिग्री के बीच रहा, जबकि जम्मू-कश्मीर में चिल्ला-ए-कला के दौरान डल झील के कुछ हिस्से जम गए, जो सर्दी की सबसे खराब स्थिति को दर्शाता है।

अन्य मैदानी इलाकों में भी कड़ाके की ठंड

ठंड सिर्फ दिल्ली तक सीमित नहीं है, यह उत्तर-पश्चिम भारत के कई हिस्सों में जोरदार असर डाल रही है। मौसम विशेषज्ञों का कहना है कि साफ आसमान, तेज उत्तर-पश्चिमी हवाएँ, सक्रिय पश्चिमी विक्षोभ का अभाव और हाड़ कंपाने वाली शुष्क सर्द हवाएँ इस रेडिएटिव कूलिंग की स्थिति को बढ़ावा दे रही हैं।

NCR के हर इलाके में पाले ने दस्तक दे दी है, फरीदाबाद से लेकर रेवाड़ी तक खेत, वाहन और खुला क्षेत्र जम गए हैं। कई जगहों पर यह इतनी घनी ठंड बनी कि दिखना लगभग बंद हो गया।

IMD ने जारी की चेतावनी

भारतीय मौसम विभाग (IMD) ने दिल्ली-एनसीआर के लिए ऑरेंज अलर्ट जारी किया है, जिसमें अगले 48 घंटों तक ठंड लहर या गंभीर सर्दी बनी रहने की चेतावनी दी गई है। विशेषज्ञों का कहना है कि गुरुवार (15 जनवरी 2026) के बाद एक नया मौसम प्रणाली सक्रिय होने से न्यूनतम तापमान में थोड़ी बढ़ोतरी होगी और ठंड कुछ कम होगी। तब तक उत्तर भारत ऐतिहासिक कड़ाके की ठंड की चपेट में है।

अधिकारियों ने लोगों को खासकर बच्चों और बुजुर्गों, को सुबह जल्दी या रात देर तक बाहर न निकलने की सख्त हिदायत दी है। स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि कांपना शरीर का पहला संकेत है कि शरीर गर्मी खो रहा है और इसे नजरअंदाज नहीं करना चाहिए।

(मूल रूप से यह खबर अंग्रेजी में लिखी गई है। मूल रिपोर्ट पढ़नें के लिए यहाँ क्लिक करें।)


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Shriti Sagar
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Journalist

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