Homeदेश-समाज15 Km का वीरान रेगिस्तानी रास्ता और 45°C तापमान... 5 साल की बच्ची ने...

15 Km का वीरान रेगिस्तानी रास्ता और 45°C तापमान… 5 साल की बच्ची ने प्यास से दम तोड़ा, पास में ही बेसुध मिली नानी

पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट से पता चला है कि दोनों को डिहाइड्रेशन हो गया था और अंजलि का बीपी कम होने के कारण उसे हार्ट अटैक आ गया। बुजुर्ग महिला को रेस्क्यू करने में देरी होती तो उनकी भी जान जा सकती थी।

राजस्थान में पानी न मिलने के कारण एक बच्ची की तड़प-तड़प कर मौत हो गई। इस दुर्भाग्यपूर्ण घटना के बाद विपक्षी नेताओं ने राज्य की कॉन्ग्रेस सरकार पर हमला बोला है। ये बच्ची सिरोही के रायपुर से जालौर के डूंगरी के लिए अपनी 60 साल की नानी के साथ पैदल ही चली थी। नानी भी बेसुध अवस्था में मिली है। इन दोनों ने 22 किलोमीटर का सड़क मार्ग छोड़ कर 15 किलोमीटर का एक शॉर्टकट चुना था, जो वीरान था।

सफर में पानी भी नहीं मिला और ये छाँव के लिए भी तरसते रहे। एक चरवाहे ने मदद से इनकार कर दिया। हालाँकि, जहाँ बच्ची की मौत हुई उससे 1 किलोमीटर दूर की कृषि कुएँ थे और आबादी भी थी। ये घटना रानीवाड़ा के वीरान रेगिस्तानी क्षेत्र की है। मासूम बच्ची का नाम अंजनी था और उसकी नानी का नाम सुखी देवी। ये परिवार भील समुदाय से ताल्लुक रखता है। पुलिस ने 9 घंटे बाद सुखी देवी को रेस्क्यू किया, जिसके बाद रानीवाड़ा अस्पताल में उनका इलाज चल रहा है।

ये घटना रविवार (जून 6, 2021) की ही है, लेकिन अगले दिन इसकी जानकारी सामने आई। सुखी देवी अपने मौके में रहती थी और देखभाल के लिए कभी-कभी ससुराल जाया करती थी। इसी क्रम में वो रायपुर से डूंगरी के लिए निकली थी। बच्ची की माँ ‘नाता विवाह (किसी विवाहित स्त्री/पुरुष का किसी अन्य पार्टनर के साथ लिव-इन में रहना)’ कर चुकी है। बच्ची को वो नानी के पास ही छोड़ गई थी।

‘दैनिक भास्कर’ अख़बार में प्रकाशित खबर के अनुसार, पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट से पता चला है कि दोनों को डिहाइड्रेशन हो गया था और अंजलि का बीपी कम होने के कारण उसे हार्ट अटैक आ गया। बुजुर्ग महिला को रेस्क्यू करने में देरी होती तो उनकी भी जान जा सकती थी। सुखी देवी भी अपने जीवन की आस छोड़ चुकी थीं, लेकिन रायपुर के सरपंच और रानीवाड़ा थानाधिकारी वहाँ पानी लेकर पहुँचे, जिसके बाद उनकी जान में जान आई।

कहा जा रहा है कि लॉकडाउन के कारण आने-जाने के साधन जल्दी नहीं मिल रहे हैं, इस कारण इन्होंने शॉर्टकट रास्ता चुना था। जिस रास्ते से ये दोनों निकली थीं, वो रेतीला धोरों वाला वीरान रास्ता है और इसके उस पार सुंधा माता का सुनसान पहाड़ी क्षेत्र है। दोपहर 1 बजे तक ये दोनों 7 किलोमीटर पैदल चल चुकी थीं। पारा 45 डिग्री सेल्सियस पहुँच गया था। दोनों ने संभवतः खाना नहीं खाया था और भूखे पेट थीं।

राजस्थान में पानी न मिलने से बच्ची की मौत, नानी बेसुध मिलीं (साभार: दैनिक भास्कर)

सबसे बड़ी चूक तो ये कि उन्होंने पीने के लिए साथ में पानी नहीं रखा था, जो लम्बे सफर के लिए आवश्यक होता है। रास्ते में इक्का-दुका झाड़ियाँ तो हैं, लेकिन वो छाँव देने लायक नहीं। ऐसे में दोनों बस एक किलोमीटर आगे तक जा पातीं, तो ये घटना टल सकती थी। लेकिन, दोनों पहले ही निढाल होक गिर पड़ीं। रास्ते में एक चरवाहे ने मिन्नतों के बावजूद एक घूँट भी पानी नहीं पिलाया। आगे जाते-जाते रोड़ा गाँव में 5 वर्षीय बच्ची की मौत हो गई।

केंद्रीय वन, पर्यावरण एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री प्रकाश जावड़ेकर ने इस घटना के लिए गाँधी परिवार पर हमला बोलते हुए कहा कि इसके लिए राजस्थान सरकार ज़िम्मेदार है। उन्होंने पूछा कि सोनिया, राहुल और प्रियंका अब चुप क्यों हैं? राजस्थान भाजपा ने कहा, “इस निर्दोष को प्यास ने नहीं… उस नकारी गहलोत सरकार ने मार डाला जो जिसने अपनी निम्न स्तरीय राजनीति के चलते राज्य को भूख, प्यास, अपराध, बेरोजगारी और माफियाओं की जमीन में बदल दिया। शर्म करो गहलोत जी, गरीबों और ज़रूरतमंदों की सुध लो!”

Join OpIndia's official WhatsApp channel

  सहयोग करें  

'द वायर' जैसे राष्ट्रवादी विचारधारा के विरोधी वेबसाइट्स को कभी पैसों की कमी नहीं होती। देश-विदेश से क्रांति के नाम पर ख़ूब फ़ंडिग मिलती है इन्हें। इनसे लड़ने के लिए हमारे हाथ मज़बूत करें। जितना बन सके, सहयोग करें

ऑपइंडिया स्टाफ़
ऑपइंडिया स्टाफ़http://www.opindia.in
कार्यालय संवाददाता, ऑपइंडिया

संबंधित ख़बरें

ख़ास ख़बरें

बंगाल नगर पालिका भर्ती घोटाले में TMC MLA मदन मित्रा के ठिकानों पर ED की छापेमारी, ₹200 करोड़ का हुआ खेल: जानें- इस संगठित...

शिक्षक भर्ती जाँच से खुला नगर पालिका भर्ती घोटाले का राज। 1814 संदिग्ध नियुक्तियों के बीच मदन मित्रा समेत कई बड़े नाम जाँच के घेरे में है।

फीफा विश्व कप 2026 में पुलिसिच की कप्तानी और बालोगन के दमदार गोलों से USA ने पैराग्वे को 4-1 से रौंदा, अब ब्राजील Vs...

विश्व कप का आगाज़ सही मायनों में चुका है। पिछले चार वर्षों से जो धरा बारूद के ढर्रे पर बैठी हुई है उसे फिर मुस्कुराने की वजह मिल गई है।
- विज्ञापन -