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‘हिन्दुओं के खिलाफ भी दिए जाते हैं द्वेषपूर्ण भाषण, सेलेक्टिव न हो सुप्रीम कोर्ट’: हेट स्पीच पर सुनवाई के दौरान सॉलिसिटर जनरल की दो टूक, SC ने सरकारों को कहा नाकाम

प्रीम कोर्ट की तरफ से कहा गया कि हर दिन असामाजिक तत्व इस तरह के भाषण दे रहे हैं जिससे समाज में बैर की भावना पनप रही है।

बुधवार (23 मार्च, 2023) को हेट स्पीच मामले में सुप्रीम कोर्ट में दूसरे दिन भी सुनवाई हुई। इस दौरान अदालत में सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने याचिका कर्ता की मंशा पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि याचिकाकर्ता ने कुछ सेलेक्टिव खबरों के आधार पर याचिका दायर की है। तुषार मेहता ने कहा कि हिंदुओं के खिलाफ भी लगातार द्वेषपूर्ण भाषण दिए जा रहे हैं। कोर्ट को इसमें सेलेक्टिव नहीं होना चाहिए।

दरअसल, सुप्रीम कोर्ट शाहीन अब्दुल्ला की याचिका पर सुनवाई कर रही है। बुधवार को केएम जोसेफ और बीवी नागरत्ना की पीठ ने मामले पर सुनवाई की। इस दौरान कोर्ट ने हेट स्पीच को लेकर कई सख्त टिप्पणियाँ की। कोर्ट ने कहा कि हम इन याचिकाओं पर इसलिए सनवाई कर रहे हैं क्योंकि राज्य सरकारें समय पर कार्रवाई नहीं कर पा रही हैं। राज्य सरकारें इन मामलों में नाकाम और शक्तिहीन हो चुकी हैं।

सुप्रीम कोर्ट की तरफ से कहा गया कि हर दिन असामाजिक तत्व इस तरह के भाषण दे रहे हैं जिससे समाज में बैर की भावना पनप रही है। कोर्ट में तुषार मेहता और जजों के बीच तीखी बहस भी देखने को मिली। तुषार मेहता ने हिंदुओं के खिलाफ दिए गए कई बयानों का उल्लेख किया। उन्होंने केरल के एक कार्यक्रम में फैलाए जा रहे हिंदू घृणा और तमिलनाडु में डीएमके नेता द्वारा ब्राह्मणों के वध की बात करने का उल्लेख किया।

सॉलिसिटर जनरल ने कहा कि याचिका कर्ता ने इन घटनाओं का उल्लेख अपनी याचिका में नहीं किया है। याचिका कर्ता अब्दुल्ला ने खास घटनाओं को ही अपने पेटिशन में शामिल किया है जो उनकी मंशा जाहिर करता है। कोर्ट को ऐसे मामलों में सेलेक्टिव नहीं होना चाहिए। इस पर जस्टिस जोसेफ ने कहा कि हर क्रिया की प्रतिक्रिया होती है। तुषार मेहता ने इसपर अदालत से इस तरह की टिप्पणी न करने का आग्रह किया। उन्होंने कहा कि इससे इस तरह के हेट स्पीचों को उचित ठहराया जाना माना जाएगा।

एसजी तुषार मेहता ने कहा कि यदि इन मामलों को वास्तव में कम करना है तो ऐसे मामलों में किसी खास धर्म, वर्ग या राज्य की बात न कर के सभी मामलों को एक साथ देखना होगा। कोर्ट ने 28 अप्रैल 2023 को ममले पर विचार करने की बात कही है।

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ऑपइंडिया स्टाफ़
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कार्यालय संवाददाता, ऑपइंडिया

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