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‘PM या किसी भी नागरिक को गाली देना अभिव्यक्ति की आज़ादी नहीं’: FIR रद्द करने से HC का इनकार, मोदी-शाह को दी गई थी गाली

\“इस देश का संविधान हर नागरिक को अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का अधिकार देता है, लेकिन इस अधिकार के तहत कोई व्यक्ति किसी नागरिक को गाली नहीं दे सकता या उसके खिलाफ अपमानजनक टिप्पणी नहीं कर सकता।”

इलाहाबाद हाई कोर्ट (Allahabad High Court) ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह और केंद्रीय मंत्रियों के खिलाफ अपमानजनक टिप्पणी करने के आरोपित मुमताज मंसूरी नामक व्यक्ति की याचिका खारिज कर दी। आरोपित मंसूरी ने अपने खिलाफ दर्ज FIR को रद्द करने का अनुरोध किया था। 

न्यायमूर्ति अश्विनी कुमार मिश्रा और न्यायमूर्ति राजेंद्र कुमार की पीठ ने याचिका खारिज करते हुए कहा, “इस देश का संविधान हर नागरिक को अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का अधिकार देता है, लेकिन इस अधिकार के तहत कोई व्यक्ति किसी नागरिक को गाली नहीं दे सकता या उसके खिलाफ अपमानजनक टिप्पणी नहीं कर सकता। प्रधानमंत्री या अन्य मंत्रियों के खिलाफ भी नहीं।”

कोर्ट ने न सिर्फ FIR को रद्द करने से मना कर दिया बल्कि मामले को लेकर अधिकारियों को कार्रवाई करने के लिए भी कहा। यह आदेश जस्टिस अश्वनी कुमार और जस्टिस राजेंद्र कुमार चतुर्थ की खंडपीठ ने मुमताज मंसूरी की याचिका पर सुनवाई करते हुए दिया है।

पीएम और गृह मंत्री के खिलाफ मंसूरी ने की थी अपमानजनक टिप्पणी

बता दें कि ये मामला प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, गृह मंत्री अमित शाह सहित अन्य मंत्रियों को अपशब्द बोलने का है। मुमताज मंसूरी ने फेसबुक पोस्ट में पीएम मोदी, गृह मंत्री अमित शाह और अन्य केंद्रीय मंत्रियों को ‘कुत्ता’ कहा था। इसके बाद 2020 में मंसूरी के खिलाफ आईपीसी की धारा 504 और आईटी एक्ट की धारा 67 के तहत मामला दर्ज किया गया। एफआईआर दर्ज करने को चुनौती देते हुए उन्होंने इसे रद्द करने की माँग को लेकर हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था।

अदालत ने FIR रद्द करने से इनकार करते हुए कहा, “उस FIR से स्पष्ट तौर पर संज्ञेय अपराध प्रदर्शित होता है। हमें मौजूदा रिट याचिका में हस्तक्षेप करने का कोई उचित आधार नजर नहीं आता। अधिकारी इस मामले में कानून के मुताबिक कार्रवाई करने और जल्द से जल्द जाँच पूरी करने के लिए स्वतंत्र हैं।”

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ऑपइंडिया स्टाफ़
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कार्यालय संवाददाता, ऑपइंडिया

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