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लिबरल गैंग ने पहले खूब किया प्रचार- जामिया में कश्मीरी छात्रा से हुई छेड़छाड़, जैसे ही दरिंदा निकला मेवात का आबिद अली छाया सन्नाटा: पत्रकार से कहा- खबर दबाओ

कश्मीरी छात्रा से बात करने वाला आरोपित हॉस्टल की कैंटीन में काम करने वाला मोहम्मद आबिद है। वह हरियाणा के मेवात (नूह) के भैसी गाँव का रहने वाला है। यह नाम सामने आने के बाद इस खबर को लेकर कोई ख़ास हो-हल्ला नहीं मचा।

दिल्ली स्थित जामिया मिल्लिया इस्लामिया विश्वविद्यालय में एक कश्मीरी लड़की से छेड़छाड़ की घटना हुई। पहले इसे वामपंथी गैंग ने प्रचारित किया लेकिन बाद में आरोपित मुस्लिम निकलने खबर दबाने को कहा गया। इस मामले की पूरी सच्चाई अब सामने आई है।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, जामिया मिलिया इस्लामिया विश्विद्यालय में रविवार (27 अप्रैल 2025) की रात एक कश्मीरी छात्रा से कैंपस में ही छेड़छाड़ की गई। इस खबर को खूब हवा दी गई और बताया गया कि पहलगाम में हुए आतंकी हमले के बाद कश्मीरी छात्रों को निशाना बनाया जा रहा है।

यह घटना जामिया मिलिया इस्लामिया के गेट नंबर आठ पर रविवार (27 अप्रैल 2025) को हुई। छात्रा लगभग 9.30 बजे छात्रा घर जा रही थी। इसी दौरान एक लड़के ने उसे रोककर बदसलूकी की। साथ ही उसे गलत तरीके से छुआ। घटना के समय विश्वविद्यालय की सुरक्षाकर्मी भी वहाँ थे। छात्रा ने विश्वविद्यालय प्रशासन को घटना की जानकारी दी। 

जामिया के छात्रों ने प्रशासन से त्वरित कार्रवाई की माँग की। विश्वविद्यालय के प्रॉक्टोरियल और सुरक्षा दलों ने जामिया नगर पुलिस स्टेशन को बताया। पुलिस ने जाँच की तो पता चला कि आरोपित हॉस्टल की कैंटीन में काम करने वाला मोहम्मद आबिद है। वह हरियाणा के मेवात (नूह) के भैसी गाँव का रहने वाला है।

यह सूचना सामने आने के बाद कथित तौर पर इस खबर को दबाने का प्रयास किया गया। इस मामले को लेकर पत्रकार उबैर उल हमीद ने एक्स (पहले ट्विटर) पर इस संबंध में लिखा। उन्होंने कहा, “कल जामिया मिलिया इस्लामिया के कश्मीरी छात्रों ने हमसे एक स्टोरी हटाने को कहा, क्योंकि उन्हें डर था कि इससे समस्याएँ पैदा होंगी।”

हमीद ने बताया, “हमने हटा दिया, लेकिन आज यह हर जगह प्रकाशित हुई है। रातों-रात क्या बदल गया और अब यह ‘सुरक्षित’ क्यों है?” इस मामले में एक और खुलासा पत्रकार स्वाति गोयल शर्मा ने किया। उन्होंने बताया कि संभवतः खबर दबाने को इसलिए कहा गया क्योंकि आरोपित मुस्लिम है और मेवाती है।

पहलगाम में हिन्दुओं पर हमले के तुंरत बाद यह नैरेटिव चलाया गया था कि देश भर में कश्मीरी छात्रों पर हमले हुए हैं। हालाँकि, एकाध जगह को छोड़ कर, ऐसी घटनाएँ सामने नहीं आई थीं। लेकिन इसे बड़ा बताने के लिए जामिया से सम्बन्धित खबर चलाई और गई जब आरोपित मुस्लिम और मेवाती निकल गया, तो इसे दबाने को कहा गया।

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ऑपइंडिया स्टाफ़
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कार्यालय संवाददाता, ऑपइंडिया

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