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‘मानवाधिकार की धज्जियाँ उड़ाती हैं पैगम्बर की बायोग्राफी’: केरल में 2000 लोगों ने छोड़ा इस्लाम, किए जा रहे प्रताड़ित

आरिफ यह भी कहते हैं, "इस्लाम में पैगंबर मोहम्मद की बातों को पत्थर की लकीर मानते हैं, लेकिन उनके जीवन को ध्यान से पढ़ें तो उनके अपने कैरेक्टर पर ही सवाल खड़े होते हैं।"

केरल की आयशा मर्केराउज इस्लाम छोड़कर नास्तिक बन गई है। उन्होंने दैनिक भास्कर को बताया कि वह करीब 10 सालों से ऊहापोह की स्थिति में थीं। इस्लाम को लेकर उनके भीतर सवाल ही सवाल थे, जिसके चलते उन्होंने कुछ साल पहले पैगंबर मोहम्मद की बायोग्राफी पढ़ी। उनका कहना है कि जैसे-जैसे मैं इस किताब को पढ़ती गई, मेरा इरादा पक्का होता गया। उन्होंने बताया कि उस किताब में दासता और औरतों को लेकर जो बातें लिखी गई हैं, वह मानवाधिकारों की धज्जियाँ उड़ाती है।

आयशा का कहना है, “इसलिए, मैंने दिसंबर 2021 में मस्जिद जाकर इस्लाम छोड़ने का फैसला किया।” आयशा की ही तरह केरल के कई ऐसे लोग हैं, जो इस्लाम छोड़ चुके हैं, लेकिन इस मजहब को छोड़ने वालों के साथ मुस्लिम लोग बहुत बुरा बर्ताव करते हैं। आयशा बताती हैं कि मेरे घर वाले बातचीत तो करते हैं, पर अब पहले वाली बात नहीं रही।

जनवरी 2022 से केरल में एक संगठन लगातार चर्चा में बना हुआ है। उसका नाम ‘एक्स मुस्लिम्स ऑफ केरल’ (Ex-Muslim of Kerala) है। इस संगठन के अध्यक्ष डॉक्टर आरिफ हुसैन थेरुवथ कहते हैं, “पिछले एक साल में केरल में रिकॉर्ड 300 लोग इस्लाम छोड़ चुके हैं। आँकड़ों से इतर बात करें तो करीब 2000 लोग हमारे संपर्क में हैं, जो इस्लाम छोड़ चुके हैं। ऐसे भी बहुत लोग होंगे जो हमारे संपर्क में नहीं आ पाए हैं।”

डॉ. आरिफ आगे कहते हैं, “लोग इसलिए अपनी पहचान छिपाकर रखते हैं, क्योंकि समाज ऐसे लोगों को काफिर (नास्तिक) और अनैतिक करार दे देती है। यही नहीं, उस शख्स का बहिष्कार किया जाता है। उसके प्रॉपर्टी समेत तमाम तरह के अधिकार उससे छीन लिए जाते हैं। शारीरिक, सामाजिक और मानसिक हर तरह से उसे प्रताड़ित किया जाता है।” वे कहते हैं कि वैसे तो हर धर्म नास्तिक लोगों के साथ भेदभाव करता है, लेकिन इस्लाम इस मामले में कट्टर है, जो लोग इस्लाम छोड़ देते हैं, लोग उनके साथ बहुत बुरा व्यवहार करते हैं।

पूरे भारत में हजारों लोग इस्लाम छोड़ चुके हैं, लेकिन डर के कारण खुलकर नहीं बोल रहे। आरिफ यह भी कहते हैं, “इस्लाम में पैगंबर मोहम्मद की बातों को पत्थर की लकीर मानते हैं, लेकिन उनके जीवन को ध्यान से पढ़ें तो उनके अपने कैरेक्टर पर ही सवाल खड़े होते हैं।”

संगठन के प्रेसिडेंट का दावा है कि केरल में यह संस्था पहली बार खुलकर सामने आई है, लेकिन काम करीब 10 साल से चल रहा है। पूरे भारत में भी ‘एक्स मुस्लिम्स ऑफ इंडिया’ नाम से यह संस्था चल रही है। यह संगठन अभी छिपकर काम करता है, पर जल्द ही केरल की तरह पूरे भारत में इस संगठन को पहचान के साथ सामने लाया जाएगा। फिलहाल तमिलनाडु में इस संगठन के रजिस्ट्रेशन का काम जल्द ही पूरा कर लिया जाएगा।

बता दें कि केरल में इस्‍लाम को छोड़ने वाले लोगों के लिए ‘एक्स मुस्लिम्स ऑफ केरल (Ex-Muslim of Kerala)’ नाम का संगठन बनाया गया है। इसका उद्देश्य इस्लाम छोड़ने वाले लोगों को सहायता प्रदान करना और उन्‍हें समर्थन देना है।

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ऑपइंडिया स्टाफ़
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कार्यालय संवाददाता, ऑपइंडिया

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