Tuesday, July 23, 2024
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मोदी यूँ ही नहीं हैं अजेय, एकलव्य स्कूलों से लेकर गोवर्धन तक ‘सबका साथ-सबका विकास’ को विस्तार: खेत से लेकर जंगल तक बजट से पहुँचाई खुशहाली

भाजपा सरकार की पहल का सीधा लाभ भारत में रहने वाली 700 से अधिक जनजातियों के 13-14 करोड़ लोगों को फायदा होगा, जो देश की करीब 8 प्रतिशत आबादी हैं। सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि इन 700 में शामिल 75 प्रीमिटिव ट्राइब्स को सीधे मुख्यधारा से जुड़ सकेंगी।

केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार (Narendra Modi Government) में वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण (Finance Minister Nirmala Sitharaman) ने अपना 5वाँ और देश का 75वाँ बजट बुधवार (1 फरवरी 2023) को पेश किया। भाजपा (BJP) की सरकार ने अपनी बजट (Budget 2023) में हर वर्ग का ध्यान रखा। खासकर आदिवासियों और पिछड़ों के लिए सरकार ने विशेष व्यवस्था की है।

प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि इस बार का आम बजट अमृत काल का पहला आम बजट है, जो विकसित भारत के लक्ष्य को पूरा करने में महत्वपूर्ण भूमिका अदा करेगा। प्रधानमंत्री ने कहा कि इसमें गाँव, गरीब और किसानों का ध्यान रखा गया है। इसके साथ ही इस बजट में मध्यम वर्ग के लोगों का भी खास ध्यान रखा गया है।

अब सबसे पहले जानने की कोशिश करते हैं कि इस बार की बजट में मोदी सरकार ने जनजातीय समुदाय, गरीबों, पिछड़ों, किसानों के लिए क्या उपाय किए हैं। अगर भाजपा सरकार के साल 2014 से शासन को देखा जाए को सरकार हर स्तर पर जनजातीय समुदाय और गरीबों के कल्याण के लिए प्रयासरत है।

जनजातीय समुदाय

केंद्र सरकार ने वनवासी बच्चों को मुख्यधारा से जोड़ने के लिए उनकी शिक्षा पर विशेष बल दिया है। वनवासी बच्चों की शिक्षा के लिए सरकार ने एकलव्य मॉडल स्कूल खोलने का लक्ष्य रखा है। अगले तीन वर्षों में सरकार 3.5 लाख आदिवासी छात्रों को समर्पित 740 एकलव्य मॉडल स्कूल खोलने का निर्णय लिया है। इसके साथ ही इन स्कूलों के लिए 38,800 शिक्षकों और सहायक कर्मचारियों की भर्ती की जाएगी।

जनजातीय लोगों के कल्याण से संबंधित विभिन्न योजनाओं पर मोदी सरकार 8 वर्षों 91,000 करोड़ रुपए खर्च कर चुकी है। मोदी सरकार ने सिर्फ जनजातीय समुदाय के छात्रों पर 8,500 करोड़ रुपए खर्च कर चुकी है। इनमें इस बार के बजट की घोषणाएँ शामिल नहीं हैं।

मोदी सरकार ने जनजातीय कल्याण को लेकर केंद्रीय योजनाओं पर वित्त वर्ष 2014-15 से 2022-23 तक ₹91,000 करोड़ का आवंटन किया है। वित्त वर्ष 2014-15 से पहले जनजातीय समुदाय के कल्याण के लिए सिर्फ 19,437 करोड़ रुपए ही प्रावधान किए गए थे। प्रधानमंत्री मोदी की पहल पर पहला ट्राइबल रिसर्च सेंटर की स्थापना की गयी।

भाजपा सरकार की पहल का सीधा लाभ भारत में रहने वाली 700 से अधिक जनजातियों के 13-14 करोड़ लोगों को फायदा होगा, जो देश की करीब 8 प्रतिशत आबादी हैं। सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि इन 700 में शामिल 75 प्रीमिटिव ट्राइब्स को सीधे मुख्यधारा से जुड़ सकेंगी।

किसानों के हित के लिए उपाय

साल 2014 में जब भाजपा केंद्र की सत्ता में आई थी तो उसने किसानों की आमदनी को दुगना करने की बात कही थी। इसके लिए सरकार ने कई तरह की योजनाएँ चलाई और उन पर पड़ने वाले भार को कम करने की भी कोशिश की। इस बार के बजट में भी सरकार ने किसानों पर विशेष बल दिया है। सरकार ने हरित खेती और हरित ऊर्जा पर विशेष ज़ोर दिया है। इसके साथ ही पीएम किसान सम्मान निधि जैसी योजनाओं को भी आगे बढ़ाया है।

पीएम-प्रणाम योजना: साल 2023 के बजट में वित्त मंत्री ने कृषि प्रबंधन योजना यानी पीएम-प्रणाम योजना (PM Pranam Scheme) का विशेष तौर पर उल्लेख किया। इस योजना के तहत केंद्र सरकार वैकल्पिक उर्वरकों को बढ़ावा देने के लिए राज्य सरकारों को प्रोत्साहित करती है। इस योजना के जरिए सरकार रसायनों के इस्तेमाल को कम करके वैकल्पिक उर्वरकों के इस्तेमाल को बढ़ावा दे रही है।

अगले 3 वर्षों में एक करोड़ किसानों को प्राकृतिक खेती अपनाने के लिए मदद मुहैया कराने का लक्ष्य रखा गया है। इसके लिए देश में 10,000 जैव इनपुट संसाधन केंद्र स्थापित किए जाएँगे। इससे ना सिर्फ खेतों की मिट्टी की गुणवत्ता बरकरार रहेगी, बल्कि लंबी अवधि के बाद उनमें सुधार की भी गुंजाइश बनती है।

केंद्र सर किसानों के लिए नीम कोटेड यूरिया का प्रबंध पहले ही कर चुकी है, जिसके जरिए कीटनाशकों की जरूरत को खत्म करने का प्रयास किया रहा है। नीम कोटेड यूरिया के इस्तेमाल से पौधों में कीट लगने की आशंका कम गुना कम हो जाती है। वहीं, सरकार ऑर्गेनिक खाद को भी बढ़ावा दे रही है।

सहकारी समितियों की स्थापना: इस योजना के तहत 63,000 एग्री सोसायटी को कंप्यूटराइज्ड किया जाएगा। इसके लिए 2,516 करोड़ रुपए का आवंटन किया गया है। इनके लिए राष्ट्रीय डेटाबेस तैयार किया जा रहा है। इससे किसानों को अपनी उपज को स्टोर करने और अपनी उपज के लिए बेहतर मूल्य प्राप्त करने में मदद मिलेगी।

बजट में कहा गया है कि सरकार अगले 5 वर्षों में वंचित गाँवों में बड़ी संख्या में सहकारी समितियों, प्राथमिक मत्स्य समितियों और डेयरी सहकारी समितियों की स्थापना करेगी। इसके साथ ही ग्रामीण महिलाओं के लिए सेल्फ हेल्प ग्रुप को और बढ़ाया जाएगा। अभी तक ऐसी 81 लाख समितियाँ बनी हैं।

किसान डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर: किसानों के लिए किसान डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर प्लेटफॉर्म तैयार किया जाएगा। इस प्लेटफॉर्म पर किसानों के लिए उनकी जरूरत से जुड़ी सारी जानकारियाँ उपलब्ध होंगी। इससे किसानों को कई तरह की समस्याओं का समाधान हो जाएगा।

एग्री स्टार्टअप को प्रोत्साहन:  केंद्र सरकार ने कृषि से जुड़े स्टार्ट अप को प्रोत्साहित करने की बात कही है। कृषि स्टार्टअप के लिए डिजिटल एक्सीलेटर फंड बनाया जाएगा। इसे कृषि निधि का नाम दिया गया है। इस फंड के माध्यम से सरकार स्टार्टअप शुरू करने वालों को मदद करेगी। इससे किसानों को खेती को आधुनिक बनाने में मदद मिलेगी और उत्पादकता बढ़ेगी।

20 लाख किसान क्रेडिट कार्ड: केंद्र सरकार ने किसानों के बीच क्रेडिट कार्ड और बढ़ावा देगी, ताकि उन्हें ऋण जैसी सहूलियत आसानी से मिल सके। इस साल केंद्र सरकार ने 20 लाख करोड़ रुपए तक ऋण किसानों के बीच बाँटने का लक्ष्य रखा है। ये क्रेडिट कार्ड के जरिए दिया जाएगा।  

मछली पालन एवं बागवानी को प्रोत्साहन: केंद्र सरकार मत्स्य संपदा की नई उपयोजना में 6,000 करोड़ रुपए निवेश करेगी। इसके जरिए मछुआरों को बीमा कवर, वित्तीय सहायता और किसान क्रेडिट कार्ड की सुविधा भी प्रदान की जाती है। इसके साथ ही बागवानी के लिए 2,200 करोड़ रुपए का प्रावधान किया है। इसका उद्देश्य ग्रामीण संसाधनों का उपयोग करके ग्रामीण विकास और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को तेज़ी से बढ़ावा देना है।

मोटे अनाज को बढ़ावा: सीतारामन ने मोटे अनाज के उत्पादन के लिए इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ मिलेट्स का गठन की घोषणा की है। भारत को मोटे अनाज उत्पादन का ग्लोबल हब बनाने की घोषणा की गई है। मोटे अनाज के लिए कम पानी और उर्वरक की जरूरत पड़ती है। यह स्वास्थ्य के उत्तम होने के साथ-साथ इसका उत्पादन लागत भी कम आता है।

गोवर्धन योजना: (गैल्वनाइजिंग ऑर्गेनिक बायो-एग्रो रिसोर्सेज धन) योजना के तहत सरकार 500 नए ‘कचरे से संपदा’ निर्माण करने वाले संयंत्रों की स्थापना करेगी। इनमें शहरी क्षेत्रों में 75 संयंत्रों सहित 200 संपीड़ित बायोगैस (सीबीजी) संयंत्र लगाए जाएँगे। इसके अलावा, इसमें 300 समुदाय या क्लस्टर आधारित संयंत्र भी शामिल हैं। इसके लिए सरकार ने 10,000 करोड़ रुपए का आवंटन किया है।

MSP का पैसा सीधे किसानों के खाते में: वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने कहा है कि न्यूनतम समर्थन मूल्य यानी MSP का पैसा अब सीधे किसानों के खाते में ट्रांसफर किया जाएगा। इससे पहले यह पैसा मंडियों और आढ़तियों के जरिए किसानों तक पहुँचता था। अब सीधे किसानों के खाते में ट्रांसफर करने से भ्रष्टाचार रोकने में मदद मिलेगी।

अन्य योजनाएँ

केंद्र सरकार ने इससे जुड़ी अन्य योजनाओं को भी लागू किया है, जिसका सीधा फायदा किसानों और गरीबों को मिलेगा। इनमें PM आवास योजना एक प्रमुख योजना है। PM आवास योजना के लिए केंद्र सरकार ने 66% बढ़ोतरी की है। इसके लिए सरकार ने अब 79,000 करोड़ रुपए का आवंटन किया है।

सरकार युवाओं के लिए स्किल यूथ सेंटर बनाने पर जोर देगी। इसके साथ ही 30 स्किल इंडिया सेंटर भी बनाए जाएँगे। स्किल इंडिया सेंटर उन छात्रों को लिए होगा, जो विदेशों में नौकरी करने जाने के बारे में सोचते हैं। इन सेंटर से उन्होंने मदद पहुँचाई जाएगी। इसके अलावा, नेशनल अप्रेंटाइशिप प्रमोशन स्कीम बनाकर छात्रों को सीधे मदद पहुँचाई जाएगी।

विपक्षी दल इस बजट को चाहे जो कहें, लेकिन इसमें समाज के सबसे कमजोर तबकों पर विशेष ध्यान दिया गया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की ये योजनाएँ सीधे लोगों से जुड़ी हैं। ऐसे में इस तरह की योजनाएँ भी उनकी लोकप्रियता में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही हैं।

 

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सुधीर गहलोत
सुधीर गहलोत
इतिहास प्रेमी

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