Sunday, July 14, 2024
Homeदेश-समाजहरियाणा: औरंगजेब के डर से बने थे मुस्लिम, अब 6 मुस्लिम परिवारों के 35...

हरियाणा: औरंगजेब के डर से बने थे मुस्लिम, अब 6 मुस्लिम परिवारों के 35 सदस्यों ने की हिंदू धर्म में घर वापसी

गाँव के सरपंच पुरुषोत्तम शर्मा ने बताया कि डूम के परिवार के सदस्यों ने बिना किसी दबाव और अपनी इच्छा से हिंदू धर्म में वापसी की है। संविधान के अनुसार कोई भी व्यक्ति किसी भी धर्म को अपना सकता है। इसमें किसी को कोई आपत्ति भी नहीं, बल्कि पूरे गाँव ने इनके इस फैसले का सम्मान किया है।

20 वर्षों से हिंदू रीति-रिवाज से जीवन यापन कर रहे हरियाणा के 6 मुस्लिम परिवारों ने बीते दिन एक घटना के बाद हिंदू धर्म में घर वापसी कर ली। डूम समाज से ताल्लुक रखने वाले 6 परिवारों के मुखिया ने कहा कि औरंगजेब के समय उनके पूर्वज हिंदू थे, जिन्होंने दवाब में आकर मुस्लिम धर्म को अपना लिया था, लेकिन आज हम सभी ने अपनी मर्जी से हिंदू धर्म में वापसी की है।

जानकारी के मुताबिक हरियाणा जींद जिले के दनौदा गाँव में रहने वाले 6 मुस्लिम परिवारों के बुजुर्ग निक्काराम का चार दिन पूर्व (18 अप्रैल) को देहांत हो गया। मुस्लिम धर्म के अनुसार शव को दफन किया जाता है, लेकिन परिवार के सदस्यों ने शव का हिंदू रीति से दाह संस्कार किया। इसी के बाद पूरे परिवार ने हिंदू धर्म में वापसी की इच्छा जताई और फिर घर पर हवन यज्ञ करा जनेऊ पहनकर परिवार के सभी 35 सदस्यों ने फिर से हिंदू धर्म में वापसी कर ली।

जानकारी के मुताबिक डूम जाति से ताल्लुक रखने वाला परिवार पिछले करीब 20 सालों से हिंदू रीति रिवाजों का पालन कर रहा था। वह हर वर्ष अपने घरों में हिंदू त्यौहारों को ही मनाते हैं। इन्हीं परिवार से रमेश कुमार ने बताया कि उन्होंने कभी भी कोई धार्मिक कार्य मुस्लिम रीति रिवाज से नहीं किया है। इतना ही नहीं परिवार में उनका एक भाई प्रवीण आरएसएस से संबंध रखता है और कावड़ भी लाता है।

औरंगजेब के डर से हरियाणा में पूर्वजों ने अपनाया था इस्लाम

रमेश कुमार के अनुसार उन्होंने छह महीने पहले मकान बनाया था। तब भी घर में हवन करवाया था। अब कोरोना के चलते गाँव में लगने वाले ठीकरी पहरे व नाके पर सरपंच को बोलकर खुद हवन करवाया। इतना ही नहीं गाँव में डूम जाति के छह परिवारों में से चार के यहाँ मंदिर बने हुए हैं और परिवार में सभी के नाम हिंदू धर्म के हैं। उन्होंने बताया कि औरंगजेब के समय उनके पूर्वज हिंदू थे और दवाब के चलते पूर्वजों ने मुस्लिम धर्म को अपना लिया था, लेकिन अब शिक्षित परिवार के युवकों को इसका ज्ञान हुआ तो पूरे परिवार ने सहमति से बिना किसी दवाब में आकर हिंदू धर्म को अपना लिया।

जागरण में प्रकाशित खबर की कटिंग

रमेश ने वर्तमान हालाात पर अपना दुख प्रकट करते हुए कहा कि कहा कि आज पूरे विश्व के साथ-साथ देश भी कोरोना वायरस से जूझ रहा है। बचाव के लिए पूरे देश में लॉक डाउन लगा हुआ है, लेकिन कुछ लोग प्रधानमंत्री के आदेशों को दरकिनार करके जमात में शामिल हुए और फिर हजारों लोगों की जिंदगी को खतरे में डाल दिया। ऐसा करना मानव धर्म के खिलाफ है।

वहीं गाँव के सरपंच पुरुषोत्तम शर्मा ने बताया कि डूम के परिवार के सदस्यों ने बिना किसी दबाव और अपनी इच्छा से हिंदू धर्म में वापसी की है। संविधान के अनुसार कोई भी व्यक्ति किसी भी धर्म को अपना सकता है। इसमें किसी को कोई आपत्ति भी नहीं, बल्कि पूरे गाँव ने इनके इस फैसले का सम्मान किया है।

विश्व हिन्दू परिषद ने रखे थे धर्मान्तरण के बड़े आँकड़े

पिछले साल ही विश्व हिन्दू परिषद् ने भी जो स्वेच्छा से हिन्दू धर्म में वापस आना चाहते हैं उनका स्वागत करते हुए यह कहा था कि बड़े पैमाने पर इस्लाम और ईसाईयत में होने वाले मज़हबी मतांतरण देश पर भी एक हमला हैं, और देश के लोगों को बाँट देने की एक साजिश हैं। उन्होंने कहा कि विश्व हिन्दू परिषद की माँग है कि सरकार मज़हबी मतांतरण के खिलाफ एक कठोर कानून लेकर आए।

Join OpIndia's official WhatsApp channel

  सहयोग करें  

एनडीटीवी हो या 'द वायर', इन्हें कभी पैसों की कमी नहीं होती। देश-विदेश से क्रांति के नाम पर ख़ूब फ़ंडिग मिलती है इन्हें। इनसे लड़ने के लिए हमारे हाथ मज़बूत करें। जितना बन सके, सहयोग करें

ऑपइंडिया स्टाफ़
ऑपइंडिया स्टाफ़http://www.opindia.in
कार्यालय संवाददाता, ऑपइंडिया

संबंधित ख़बरें

ख़ास ख़बरें

NITI आयोग की रिपोर्ट में टॉप पर उत्तराखंड, यूपी ने भी लगाई बड़ी छलाँग: 9 साल में 24 करोड़ भारतीय गरीबी से बाहर निकले

NITI आयोग ने सस्टेनेबल डेवलपमेंट गोल्स (SDG) इंडेक्स 2023-24 जारी की है। देश में विकास का स्तर बताने वाली इस रिपोर्ट में उत्तराखंड टॉप पर है।

लैंड जिहाद की जिस ‘मासूमियत’ को देख आगे बढ़ जाते हैं हम, उससे रोज लड़ते हैं प्रीत सिंह सिरोही: दिल्ली को 2000+ मजार-मस्जिद जैसी...

प्रीत सिरोही का कहना है कि वह इन अवैध इमारतों को खाली करवाएँगे। इन खाली हुई जमीनों पर वह स्कूल और अस्पताल बनाने का प्रयास करेंगे।

प्रचलित ख़बरें

- विज्ञापन -