Wednesday, April 1, 2020
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मजहबी घृणा से पोषित जामिया का प्रोफेसर हुआ सस्पेंड, कुछ मुसलमान ऑपइंडिया को कर रहे टार्गेट

भड़काऊ बयानों से फॉलोवर इकट्ठा करने वाला कथित पत्रकार अली सोहराब ने कहा है कि ऑपइंडिया इस्लाम को गाली देने वालों को प्रमोट करता है और आतंकी संगठन आरएसएस का मुखपत्र हैं। ये हर रोज मुस्लिमों को टारगेट करता है। हाल में शरजील को टारगेट किया, आज अबरार को टारगेट किया है। कल आप का नंबर हो सकता है।

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ऑपइंडिया स्टाफ़http://www.opindia.in
कार्यालय संवाददाता, ऑपइंडिया

जामिया मिल्लिया इस्लामिया का असिस्टेंट प्रोफेसर अबरार अहमद ट्वीट करता है कि उसने सीएए का समर्थन करने वाले अपने 15 गैर मुस्लिम छात्रों को फेल कर दिया है। ऑपइंडिया इस पर रिपोर्ट करता है। मामला तूल पकड़ता है। फिर अबरार सफाई देते हुए कहता है कि वह मजाक कर रहा था। यूनिवर्सिटी प्रशासन उसकी करतूत को गंंभीर मानता है। उसे जाँच पूरी होने तक सस्पेंड कर देता है। सब कुछ एक प्रक्रिया की तरह होता है। लेकिन इसी दौरान कुछ मुसंघी अबरार के निलंबन की खबर पढ़कर चिढ़ जाते हैं और ऑपइंडिया को गैर प्रमाणिक बताकर उसे टारगेट करने लगते हैं।

अब पढ़िए कि प्रशासन के एक्शन पर कैसे ये लोग ऑपइंडिया पर अपनी भड़ास निकाल रहे हैं।

मोहम्मद अरशद खान प्रशासन के फैसले को पढ़कर हैरानी जताता है और कहता है, “क्या सच में? प्रशासन ने पक्षपाती दक्षिणपंथी संघी समाचार पोर्टल की रिपोर्ट पर संज्ञान लिया और अति सम्मानित संकाय फैकल्टी को कुछ ही घंटों में निलंबित कर दिया। मगर इतने समय से पुलिस के ख़िलाफ़ कोई एफआईआर दर्ज नहीं की। जिन्होंने परिसर में घुसकर बर्बरता की।”

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मोहम्मद सरफराज नाम का यूजर लिखता है, “मैं जामिया मिलिया इस्लामिया का छात्र हूँ। प्रोफेसर अबरार मेरे क्लास टीचर थे। मुझे अच्छी तरह से पता है कि वे कितना प्यारे प्रोफेसर हैं और यहाँ तक ​​गैर मुस्लिम छात्र भी मेरी कक्षा में उनके साथ बहुत खुश थे। अपनी सीमा में रहो।”

मिर्ज़ा बिला बेग ऑपइंडिया की खबर को फेक न्यूज बताता है और कहता है, “एक प्रतिष्ठित प्रोफेसर अबरार अहमद को ऑपइंडिया द्वारा लगाए झूठे आरोपों के आधार पर निलंबित कर दिया गया।”

मोहम्मद अरशद वारसी ने जामिया प्रशासन को पागल बताते हुए लिखा, “क्या…जामिया मिल्लिया इस्लामिया प्रशासन तुम पागल हो गए हो। ऑपइंडिया के फेक ट्वीट पर एक आदर्श टीचर के ख़िलाफ़ एक्शन ले लिया। क्या तुम बहरे और अंधे हो। तुम्हें दिखता नहीं कि अबरार अहमद ने एक व्यंग्य लिखा था।”

जिक्र नायक नामक यूजर लिखता है कि आखिर जामिया प्रशासन क्या कर रहा है? पहले अबरार सर को उनका मत रखने का मौका दो, फिर एक्शन लो। ये सब बिलकुल एकतरफा है। तुम्हें सारे चार्ज वापस लेने चाहिए।

अबु बकर, अबरार के ट्वीट का मतलब समझाने की कोशिश करता है और कहता है कि प्रोफेसर अबरार ने वैसा बिलकुल नहीं कहा, जैसा ऑपइंडिया द्वारा फैलाया जा रहा है। प्रोफेसर अबरार ने कभी भी बच्चों के साथ जाति-पाति पर भेदभाव नहीं किया। मैं सलाह देता हूँ कि अगर आपको सबूत चाहिए तो कॉलेज के नॉन मुस्लिम छात्रों से बात करें। किसी को अंधा होकर फ़ॉलो न करें।

इसके अलावा भड़काऊ बयानों के कारण फॉलोवर इकट्ठा करने वाला पत्रकार अली सोहराब भी इस मामले में ऑपइंडिया को आरएसएस का मुखपत्र कहने से नहीं चुकता। काकावाणी नाम के अकाउंट से सोहराब अपने फॉलोवर्स को भड़काते हुए लिखता है कि ऑपइंडिया इस्लाम को गाली देने वालों को प्रमोट करता है और आतंकी संगठन आरएसएस का मुखपत्र हैं। ये हर रोज मुस्लिमों को टारगेट करता है। अभी हाल फिलहाल में शरजील इमाम और खुद मुझे टारगेट कर चुका है। आज अबरार को टारगेट किया है। कल आप का नंबर हो सकता है।

अब जिस बात को लेकर अबरार के मुस्लिम समर्थक इतना जहर उगल रहे हैं वह खुद उसने ट्वीट कर कबूला था। सीएए समर्थक छात्रों को फेल करने की बात करना, उन्हें धमकी देना किस तरह का व्यंग्य है यह समझ से परे है। ऑपइंडिया ने अपने तरफ से कोई झूठ दावे नहीं किए। जैसा अबरार ने सोशल मीडिया में कहा है वही सब पाठकों को बताया है। अबरार के इसी कबूलनामे पर यूनिवर्सिटी प्रशासन भी एक्शन लिया है।

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