Homeदेश-समाज'चुप! वर्दी उतरवा दूँगी.. तेरी औकात नहीं है': नैनीताल में महिला पर्यटक की पुलिस...

‘चुप! वर्दी उतरवा दूँगी.. तेरी औकात नहीं है’: नैनीताल में महिला पर्यटक की पुलिस से दबंगई, ₹6 करोड़ की कार जब्त

जब स्थानीय लोग बीच-बचाव करने आए तो महिला ने कहा कि तुम्हारे जैसे लोग हमारे घरों में पोछा लगाते हैं। इससे उत्तराखंड के स्थानीय लोग आक्रोशित हो गए।

उत्तराखंड के नैनीताल में एक महिला पर्यटक द्वारा हंगामा मचाए जाने का वीडियो वायरल हो रहा है। महिला का नाम स्मिता बताया गया है। उक्त महिला ने पुलिस को वर्दी उतरवाने की धमकी दे डाली। फ़िलहाल पुलिस ने महिला की 6 करोड़ रुपए की कार को जब्त कर लिया है और सरकारी कर्मी की ड्यूटी में बाधा डालने का आरोप लगाया गया है। दरअसल, ये सब तब शुरू हुआ जब पुलिस ने उक्त महिला से कार के शीशे पर लगी काली फिल्म को लेकर चालान कटवाने को कहा।

इस पर वो भड़क गई और पुलिस के साथ ही बहस करने लगी। पुलिसकर्मियों को अपने रसूख की बात करते हुए धमकी भी दी। महिला के साथ उसके कुछ साथी भी थे, जो लगातार पुलिसकर्मियों के साथ बदसलूकी कर रहे थे। मॉल रोड पर चेकिंग अभियान चलाने के दौरान ये घटना हुई। हिमाचल प्रदेश के नंबर की उस कार पर जेड ब्लैक फिल्म चढ़ी हुई थी। आरोप है कि तल्लीताल अध्यक्ष विजय मेहता के साथ महिला के साथियों ने गाली-गलौज की।

पुलिस इन सभी को थाने ले गई, लेकिन वहाँ भी ये लोग हंगामा करते रहे। फिर गाड़ी सीज करने की कार्रवाई की गई। उनके खिलाफ मुकदमा दर्ज कर लिया गया है और उन्हें मंगलवार (3 अगस्त, 2021) को अदालत में पेश किया जाएगा। महिला ने पुलिसकर्मी को लात मारी और बार-बार ‘चुप-चुप’ भी बोल रही थी। शीशे पर काली फिल्म चढ़ाने पर चालान काटने को लेकर ये सारा विवाद हुआ। महिला के साथियों ने पुलिस से कहा कि वो रुपए लेकर मामले को रफा-दफा करे।

बात हाथापाई तक पहुँच गई। इस दौरान वहाँ कई पर्यटक जमा थे, जो इस घटना का वीडियो बनाने लगे। महिला की पहचान कानपुर निवासी स्मिता और अन्य युवकों की पहचान दिल्ली के वसंत विहार निवासी शिवम मिश्रा, विवेक और संदीप के रूप में हुई है। IPC की धारा-504 (शांति भंग करना), 506 (आपराधिक धमकी), 353 (किसी लोक सेवक को उसके कर्तव्यों के दौरान डराना, काम में बाधा डालना) और 186 के तहत मामला दर्ज हुआ है।

महिला ने महिला दरोगा को धमकाते हुए कहा था, “तेरी औकात नहीं जो इस गाड़ी का चालान कर सको। तुमलोगों की वर्दी उतरवा दूँगी। अगर पैसे चाहिए तो बताओ, गाड़ी को कुछ नहीं कर सकते। गाड़ी को हाथ नहीं लगाना।” जब स्थानीय लोग बीच-बचाव करने आए तो महिला ने कहा कि तुम्हारे जैसे लोग हमारे घरों में पोछा लगाते हैं। इस पर स्थानीय लोग भी भड़क गए, जिसके बाद उन पर्यटकों को थाने ले जाना पड़ा।

Join OpIndia's official WhatsApp channel

  सहयोग करें  

'द वायर' जैसे राष्ट्रवादी विचारधारा के विरोधी वेबसाइट्स को कभी पैसों की कमी नहीं होती। देश-विदेश से क्रांति के नाम पर ख़ूब फ़ंडिग मिलती है इन्हें। इनसे लड़ने के लिए हमारे हाथ मज़बूत करें। जितना बन सके, सहयोग करें

ऑपइंडिया स्टाफ़
ऑपइंडिया स्टाफ़http://www.opindia.in
कार्यालय संवाददाता, ऑपइंडिया

संबंधित ख़बरें

ख़ास ख़बरें

खून वही, बस नैरेटिव बदल गया: प्राचीन बलि से ईसाई संस्कार तक, इतिहास ने ये फर्क कैसे बनाया?

पश्चिम ने पुरानी सभ्यताओं को खून और बलि के नाम पर बर्बर कहा। ईसाई परंपरा को आध्यात्मिक ऊँचाई बताया। लेकिन चर्च के केंद्र में भी रोटी और वाइन के जरिए शरीर और रक्त का अनुष्ठान बैठा है। सभ्यता की कहानी इतनी साफ नहीं।

हमें पितृसत्ता की अधूरी कहानी क्यों सुनाई गई? Patriarchy? Think Again

भारत की शुरुआती वैदिक सभ्यता में महिलाओं का समाज में बहुत सम्मानजनक स्थान था, जहाँ उन्हें शिक्षा और धार्मिक अनुष्ठानों का पूरा अधिकार था। वैदिक साहित्य में गार्गी और मैत्रेयी जैसी महिलाओं के उदाहरण मिलते हैं, जो दार्शनिक चर्चाओं और बौद्धिक विमर्श में सक्रिय थीं।
- विज्ञापन -