आरक्षण विरोधी हैं वामपंथी, वो हिंसक और मुसलमानों के ख़िलाफ़ हैं: शाहीन बाग़ का मुख्य सरगना

"सीपीएम एक निहायती हिंसक पार्टी है। केरल और बंगाल के इतिहास को देखें तो बहुत कुछ पता चलेगा। सीपीएम मुस्लिम-विरोधी भी है। सीपीएम का इतिहास ही मुस्लिमों और आरक्षण के ख़िलाफ़ रहा है।"

शाहीन बाग़ कोआर्डिनेशन कमिटी का चेयरमैन और इस पूरे विरोध प्रदर्शन का साज़िशकर्ता शरजील इमाम ने देश के ‘टुकड़े-टुकड़े’ करने की ओर इशारा तो किया ही, साथ ही उसने लोगों को भड़काने के लिए पूरा ज़ोर लगाया। इमाम ने शाहीन बाग़ में प्रदर्शनकारियों को सम्बोधित करते हुए स्वीकार किया कि जेएनयू में लेफ्ट वालों ने एबीवीपी के छात्रों की पिटाई की थी। साथ ही उसने बड़ा आरोप लगाया कि दिल्ली पुलिस ने गुंडों के साथ मिल कर वामपंथी छात्रों की पिटाई की। उसने आरोप लगाया कि कश्मीरी छात्रों और मुस्लिमों को खोज-खोज कर निशाना बनाया गया।

इमाम ने एबीवीपी और सीपीएम, दोनों को ही बराबर रूप से निशाने पर लिया। उसने कहा, “सीपीएम एक निहायती हिंसक पार्टी है और वो एबीवीपी से जरा भी अलग नहीं है। केरल और बंगाल का इतिहास को देखें तो सीपीएम के बारे में बहुत कुछ पता चलेगा। सीपीएम के कारण आम छात्रों की पिटाई हुई। सीपीएम मुस्लिम-विरोधी है। सीपीएम का इतिहास ही मुस्लिमों और आरक्षण के ख़िलाफ़ रहा है।”

इमाम ने याद दिलाया कि वामपंथी मंडल आयोग के ख़िलाफ़ थे, उन्होंने कभी मुस्लिमों व पिछड़ों का साथ नहीं दिया। उसने कहा कि कॉन्ग्रेस ने भी ऐसा ही किया है। इमाम लोगों को ये समझा रहा था कि मुस्लिमों का दोस्त कौन है और दुश्मन कौन है? उसने सलाह दी कि एक मुस्लिम एक हिन्दू को अपने साथ ला सकता है, इससे विरोध करने वालों को कम्युनल का टैग नहीं लगेगा। लेकिन इसके लिए उसने जो शर्त रखी वो अजीबोगरीब थी – “ग़ैर-मुस्लिम मुस्लिमों की शर्तों पर प्रदर्शनकारियों के साथ खड़े हों और नारा-ए-तक़बीर लगाएँ। अगर ग़ैर-मुस्लिम ऐसा नहीं करते हैं तो इसका अर्थ है कि वो मुस्लिमों के हमदर्द नहीं हैं, उनका इस्तेमाल कर रहे हैं।”

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शरजील इमाम के ऐसा कहते ही वहाँ उपस्थित लोग नारा-ए-तक़बीर चीखने लगे। लोगों ने ‘अल्लाहु अकबर’ के नारे के साथ उसके इस बयान का स्वागत किया। उसने कन्हैया कुमार से आग्रह किया कि अगर 5 लाख लोग मुस्लिमों के साथ आ जाएँ तो पूरा नॉर्थ-ईस्ट कट कर अलग हो जाएगा। बकौल इमाम, “उत्तर-पूर्वी भारत और असम को देश से काट कर अलग करना मुस्लिमों की जिम्मेदारी है। कन्हैया कुमार सिर्फ ‘इंकलाब’ का नारा लगवा के वापस आ जाता है, जिससे कुछ भी फायदा नहीं होता।”

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उसने आरोप लगाया कि कॉन्ग्रेस और लेफ्ट वाले भारत की पूजा करते हैं। उसने स्पष्ट कहा कि वो लोग भारत की सरकार और संविधान से परेशान हैं और इसी स्पष्टता के साथ ही विरोध आगे बढ़ सकता है। मुसलमानों को संगठित होने पर वह बोला, “मैं शाहीन बाग़ में कॉन्ग्रेस के ख़िलाफ़ रोज़ बोलता हूँ। एनआरसी और सीएए के बारे में बहुत लोगों को नहीं पता। अगर मुस्लिम ख़ुद को बचा पाए, तभी ये देश बच पाएगा। मुस्लिम संगठित हों।”

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