Monday, July 22, 2024
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हिजाब ही तो पहनना है… लोकतंत्र में ज्यादा माँग लिया क्या: बुर्का विवाद पर SC के जस्टिस धुलिया, कहा- उन्हें रोकना, मतलब निजता पर आक्रमण

जस्टिस धुलिया ने कहा कि स्कूल गेट पर हिजाब उतरवाना छात्राओं की निजता और सम्मान का हनन है। ऐसा करवाना मतलब अनुच्छेद 19(1) और 21 का उल्लंघन करना है।

हिजाब विवाद के ऊपर सुप्रीम कोर्ट में दो अलग फैसले आए हैं। जस्टिस हेमंत गुप्ता ने जहाँ कहा कि हिजाब इस्लाम में अनिवार्य नहीं इसलिए कर्नाटक हाईकोर्ट का फैसला सही है। वहीं जस्टिस सुधांशु धुलिया ने कर्नाटक हाईकोर्ट के फैसले पर सवाल खड़ा किया। जस्टिस धुलिया ने कहा कि आखिर लड़कियाँ लोकतंत्र में कहाँ कुछ ज्यादा माँग रही हैं, उन्हें सिर्फ हिजाब ही तो पहनना है, क्या ये अधिकार उन्हें नहीं दिया जा सकता।

फैसला सुनाते हुए जस्टिस धुलिया ने कहा कि स्कूल गेट पर हिजाब उतरवाना छात्राओं की निजता और सम्मान का हनन है। ऐसा करवाना मतलब अनुच्छेद 19(1) और 21 का उल्लंघन करना है। उन्हें अधिकार है कि वो अपने सम्मान और निजता को साथ रखें, चाहे फिर वो स्कूल के बाहर हों या फिर क्लासरूम के अंदर।

जस्टिस धुलिया हिजाब के पक्ष में बोलते हुए स्कूल प्रशासन और राज्य से पूछते हैं कि आखिर उन लोगों के लिए लड़कियों की शिक्षा जरूरी है या फिर ड्रेस कोड को लागू करवाना जरूरी है। जस्टिस धुलिया कहते हैं कि हर याचिकाकर्ता चाहता है कि मुस्लिम लड़कियाँ हिजाब पहनें क्या उन्होंने आपसे लोकतंत्र में कुछ ज्यादा माँग लिया है। ये सार्वजनिक व्यवस्था, नैतिकता और स्वास्थ्य के विरुद्ध कैसे हो गया? या ये शालीनता और संविधान के भाग 3 के किसी प्रावधान के विरुद्ध कैसे है।

जस्टिस धुलिया ने कहा कि लड़की का अधिकार है कि वो घर-बाहर कहीं भी हिजाब पहनें और ये अधिकार स्कूल गेट के बाहर खत्म नहीं हो जाए। लड़की की इज्जत और निजता स्कूल के गेट के बाहर भी उसके साथ होती है और क्लासरूम में भी। ये उसके मौलिक अधिकार हैं। ये कहना कि ये अधिकार क्लासरूम में आकर बदल जाते हैं बिलकुल गलत है।

सुनवाई के दौरान वह बोले कि लड़कियों से स्कूल के बाहर ही हिजाब उतरवा लेना पहले उनकी निजता पर आक्रमण है, फिर उनके सम्मान पर हमला है और फिर उनको धर्मनिरपेक्ष शिक्षा से वंचित रखने जैसा है।

बता दें कि सुप्रीम कोर्ट में हिजाब मुद्दे पर जहाँ जस्टिस सुधांशु धुलिया की यह राय रही। वहीं जस्टिस हेमंत गुप्ता ने ने माना कि हिजाब पहनना इस्लाम मजहब का अनिवार्य हिस्सा नहीं है और राज्य सरकार का आदेश शिक्षा तक पहुँच की भावना के लिहाज से सही है। उन्होंने कर्नाटक हाईकोर्ट ने राज्य सरकार के उस आदेश को सही ठहराया, जिसमें स्कूल-कॉलेज के प्रबंधनों को यूनिफॉर्म के रूप में हिजाब को बैन करने का अधिकार मिल गया था।

मुस्लिम लड़कियाँ इसी फैसले के  खिलाफ सुप्रीम कोर्ट पहुँची थीं। कोर्ट ने इस मामले में 10 दिन सुनवाई करने के बाद 22 सितंबर को ऑर्डर रिजर्व रख लिया था और आज इस पर बँटा हुआ फैसला दिया। अब इस केस में अंतिम निर्णय सीजेआई करेंगे।

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ऑपइंडिया स्टाफ़
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कार्यालय संवाददाता, ऑपइंडिया

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