Homeदेश-समाजबदायूँ के काजी मो. सालिमुल कादरी के इंतकाल पर उमड़ी हजारों मुस्लिमों की भीड़,...

बदायूँ के काजी मो. सालिमुल कादरी के इंतकाल पर उमड़ी हजारों मुस्लिमों की भीड़, जनाजे में उड़ी कोरोना प्रोटोकॉल की धज्जियाँ: वीडियो

वीडियो के वायरल होने के बाद भी मीडिया गिरोह और वामपंथी समूह के मुँह से एक शब्द नहीं निकल रहा है। यही लोग पहले भी सेलेक्टिव आउटरेज दिखाते और अपने चहेतों पर आँख मूँदते नजर आए हैं।

उत्तर प्रदेश के बदायूँ जिले के काजी हजरत अब्दुल हमीद मोहम्मद सालिमुल कादरी (सालिम मियाँ) का इंतकाल हो गया है। रमजान के महीने में शनिवार (8 मई 2021) की देर रात 3:51 बजे उन्होंने अंतिम साँस ली। काजी मोहम्मद सालिमुल कादरी के इंतकाल के बाद उनके पार्थिव शरीर के अंतिम दर्शन और जनाजे के लिए कोरोना प्रोटोकॉल का उल्लंघन करते हुए भारी भीड़ उमड़ पड़ी।

उत्तर प्रदेश में कोरोना वायरस के कहर के बीच सरकार ने कड़े आदेश दे रखे हैं कि अंतिम संस्कार में किसी भी सूरत में अधिकतम 20 लोग ही शामिल हो सकेंगे। लेकिन, काजी की मौत के बाद हजारों की संख्या में मुस्लिम बेकाबू भीड़ शामिल थी। सोशल डिस्टेंसिंग तो पूरी तरह से नदारद रही। लोगों के बीच एक इंच की भी दूरी नहीं दिखी।

यही नहीं वीडियो में स्पष्ट देखा जा सकता है कि अधिकतर लोगों ने मास्क नहीं पहन रखे थे। इस दौरान पूरी तरह से कोरोना के प्रोटोकॉल की धज्जियाँ उड़ाई गई। कोरोना के इस दौरान जनाजे के दौरान लापरवाही बरतने से प्रदेश में कोरोना विस्फोट होने का खतरा बढ़ गया है।

वीडियो के वायरल होने के बाद भी मीडिया गिरोह और वामपंथी समूह के मुँह से एक शब्द नहीं निकल रहा है। यही लोग पहले भी सेलेक्टिव आउटरेज दिखाते और अपने चहेतों पर आँख मूँदते नजर आए हैं।

उत्तर प्रदेश सरकार के नियम के मुताबिक, सार्वजिनक स्थानों पर कोई भी व्यक्ति बिना मास्क के घूमता-फिरता मिलता है, तो उस पर एक हजार रुपए तक का जुर्माना लगाया जाएगा। साथ ही दोबारा ऐसा करने पर 10 हजार रुपए तक का जुर्माना लगाया जा सकता है।

इससे पहले राजस्थान के सीकर स्थित खीरवा गाँव में एक व्यक्ति के जनाजे में लापरवाही होने के कारण अब तक 21 लोगों की जान जा चुकी है। पिछले 21 दिनों में इस गाँव के 21 घरों से जनाजे उठ चुके हैं। पहले तो गाँव के ही लोग इसे गंभीरता से नहीं ले रहे थे, लेकिन लगातार होती मौतों से अब वो भी दहशत में हैं। प्रशासनिक अमला भी देर से सक्रिय हुआ और अब लोगों की जाँच कर के उन्हें क्वारंटाइन करने की प्रक्रिया चालू की गई है।

Join OpIndia's official WhatsApp channel

  सहयोग करें  

'द वायर' जैसे राष्ट्रवादी विचारधारा के विरोधी वेबसाइट्स को कभी पैसों की कमी नहीं होती। देश-विदेश से क्रांति के नाम पर ख़ूब फ़ंडिग मिलती है इन्हें। इनसे लड़ने के लिए हमारे हाथ मज़बूत करें। जितना बन सके, सहयोग करें

ऑपइंडिया स्टाफ़
ऑपइंडिया स्टाफ़http://www.opindia.in
कार्यालय संवाददाता, ऑपइंडिया

संबंधित ख़बरें

ख़ास ख़बरें

अखिलेश सरकार में हुए 62+ हत्याओं को याद करा रहा ‘न भूले थे, न भूले हैं, न भूलेंगे’ पोस्टर: मुजफ्फरनगर दंगों की बरसी पर...

मुजफ्फरनगर दंगों की बरसी पर उत्तर प्रदेश के कई शहरों में ‘न भूले थे, न भूले हैं, न भूलेंगे’ लिखे पोस्टर लगा गए हैं। इन पोस्टर्स ने 2013 की उस भयावह हिंसा की याद फिर ताजा कर दी है।

हैशटैग लगाओ, दुनिया बदलो… कितना आसान है न? क्या सोशल मीडिया लोकतंत्र को बर्बाद कर रहा है?

लोकतंत्र इंसान की कमियों को स्वीकार कर समझौतों से चलता है। लेकिन सोशल मीडिया का अनियंत्रित दौर हर छोटी कमी को भ्रष्टाचार बताकर लोकतंत्र की बुनियाद पर चोट कर रहा है। कैसे आज का सोशल मीडिया और डिजिटल यूटोपियनवाद हमारी लोकतांत्रिक व्यवस्था के लिए सबसे बड़ा खतरा बन चुका है।
- विज्ञापन -