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कानपुर में ITBP जवानों के कमिश्नरेट घेराव की खबर फर्जी: माँ का हाथ काटने के मामले में पुलिस-CMO करेंगे दोबारा जाँच, जानें पूरा मामला

उत्तर प्रदेश के कानपुर में ITBP जवानों के कमिश्नरेट घेराव की वायरल खबर गलत निकली, माँ का हाथ कटने के मामले में अब पुलिस, CMO और ITBP संयुक्त जाँच करेंगे।

उत्तर प्रदेश के कानपुर की एक घटना शनिवार (23 मई 2026) को सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल होने लगी। जिसमें दावा किया गया कि भारत-तिब्बत बॉर्डर पुलिस (ITBP) के जवानों ने पुलिस कमिश्नरेट कार्यालय का घेराव कर दिया और परिसर में तनावपूर्ण स्थिति बन गई।

हालाँकि बाद में पुलिस और ITBP अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि घेराव जैसी कोई स्थिति नहीं थी। अधिकारियों के मुताबिक जवान अपने साथी को न्याय दिलाने और जाँच रिपोर्ट पर आपत्ति दर्ज कराने के लिए वरिष्ठ अधिकारियों के साथ कमिश्नर कार्यालय पहुँचे थे।

पुलिस कमिश्नर रघुबीर लाल और ITBP कमांडेंट गौरव प्रसाद दोनों ने साफ कहा कि जवान अपॉइंटमेंट लेकर आए थे और पुलिस प्रशासन की ओर से पूरा सहयोग दिया गया। ऐसे में सोशल मीडिया पर फैलाया गया कमिश्नरेट घेराव का दावा भ्रामक और बढ़ा-चढ़ाकर पेश किया गया मामला है।

क्या है पूरा मामला?

दरअसल पूरा मामला ITBP के जवान विकास सिंह की माँ निर्मला देवी के इलाज और उनका हाथ काटे जाने से जुड़ा है। विकास सिंह इस समय महाराजपुर स्थित ITBP की 32वीं बटालियन में तैनात हैं और मूल रूप से फतेहपुर जिले के हथगाम क्षेत्र के रहने वाले हैं।

विकास के अनुसार उनकी 56 साल की माँ को सांस लेने में दिक्कत, कमजोरी और कब्ज की शिकायत थी। पहले उनका इलाज ITBP अस्पताल में हुआ, लेकिन 13 मई को अचानक हालत बिगड़ने पर उन्हें हायर सेंटर रेफर किया गया।

विकास अपनी माँ को एंबुलेंस से लेकर निकला, लेकिन रास्ते में भीषण जाम लग गया। माँ की हालत गंभीर होने पर वे उन्हें टाटमिल चौराहे स्थित कृष्णा सुपर स्पेशियलिटी हॉस्पिटल ले गए। आरोप है कि अस्पताल में इलाज के दौरान उनके हाथ में कैनुला लगाया गया और गलत इंजेक्शन दे दिया गया, जिसके बाद हाथ में सूजन और संक्रमण बढ़ने लगा।

बाद में हालत बिगड़ने पर उन्हें बिठूर रोड स्थित पारस हॉस्पिटल में भर्ती कराया गया, जहाँ डॉक्टरों के काफी प्रयास के बाद भी संक्रमण को नहीं रोका जा सका और अंततः 17 मई को उनका हाथ काटना पड़ा।

घटना के बाद पुलिस से माँगी मदद

इस घटना के बाद विकास सिंह 19 मई को अपनी माँ का कटा हुआ हाथ लेकर पुलिस कमिश्नर कार्यालय पहुँचे। उन्होंने कृष्णा हॉस्पिटल पर गंभीर लापरवाही का आरोप लगाते हुए कार्रवाई की माँग की थी। विकास ने कहा था कि “मेरी माँ ने इन्हीं हाथों से मुझे बचपन से पाला-पोसा और आज मेरे सामने उनका हाथ काटना पड़ा। मैं सेना में होने के बाद भी अपनी माँ को इंसाफ नहीं दिला पा रहा हूँ।”

मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस कमिश्नर रघुबीर लाल ने जाँच CMO कार्यालय को सौंप दी थी। CMO डॉ हरिदत्त नेमी की ओर से गठित जाँच कमेटी ने अपनी रिपोर्ट सौंपी, लेकिन उस रिपोर्ट पर ही सवाल उठ गए। ITBP अधिकारियों का आरोप था कि रिपोर्ट साफ है और उसमें यह साफ नहीं किया गया कि आखिर लापरवाही किस स्तर पर हुई।

ITBP के जवान पहुँचे कार्यालय  

इसी को लेकर शनिवार को ITBP के अधिकारी और कुछ जवान पुलिस कमिश्नर के कार्यालय पहुँचे थे। कई जवान परिसर में मौजूद जरूर थे, क्योंकि वे अपने अधिकारी के साथ आए थे, लेकिन पुलिस और ITBP दोनों ने घेराव या किसी टकराव से इनकार किया।

पुलिस कमिश्नर रघुबीर लाल ने कहा कि “कार्यालय में किसी तरह का कोई घेराव नहीं हुआ। सेना के अधिकारियों को एस्कॉर्ट मिलता है और वही जवान उनके साथ थे। विवाद जैसी कोई स्थिति नहीं थी।”

ITBP कमांडेंट गौरव प्रसाद ने भी कहा कि जवान केवल अपने साथी के समर्थन में आए थे। उन्होंने कहा कि पुलिस प्रशासन की तरफ से पूरा सहयोग मिल रहा है और दोबारा जाँच कराने पर सहमति बनी है। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि मामले को गलत तरीके से दिखाया गया है।

बैठक के बाद लिया निर्णय

बैठक के दौरान पुलिस अधिकारियों, CMO और ITBP अधिकारियों के बीच करीब तीन घंटे तक चर्चा हुई। इसके बाद निर्णय लिया गया कि मामले की दोबारा जाँच होगी और इस बार जाँच में ITBP के अधिकारी भी शामिल रहेंगे।

CMO डॉ हरिदत्त नेमी ने कहा कि पहले की रिपोर्ट तथ्यों और उपलब्ध दस्तावेजों के आधार पर तैयार की गई थी, लेकिन अब ITBP और पुलिस अधिकारियों के सवालों को ध्यान में रखते हुए दोबारा जाँच की जाएगी।

जाँच कमेटी के अध्यक्ष ACMO डॉ रमित रस्तोगी ने कहा कि दोनों अस्पतालों से वेरिफाइड दस्तावेज लिए गए थे और उन्हीं के आधार पर रिपोर्ट तैयार की गई। उन्होंने बताया कि महिला हृदय रोगी थीं और उनके हाथ की नसों में ब्लॉकेज पाया गया था।

उन्होंने कहा कि ब्लॉकेज के पीछे दो संभावनाएँ हो सकती हैं। पहली थ्रोम्बोसिस जिसमें खून के थक्के नसों में फंस जाते हैं और दूसरी कंपार्टमेंट सिंड्रोम, जिसमें दर्द और सूजन को समय पर गंभीरता से नहीं लिया जाता। उन्होंने कहा कि कटे हुए हाथ की हिस्टोपैथोलॉजी जाँच से स्थिति पूरी तरह साफ हो सकती है।

वहीं पुलिस कमिश्नर ने CMO को फटकार लगाते हुए कहा कि जाँच रिपोर्ट स्पष्ट होनी चाहिए और अगर किसी अस्पताल या डॉक्टर की लापरवाही सामने आती है तो उसके खिलाफ कार्रवाई की जाए। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि रिपोर्ट संतोषजनक नहीं हुई तो राज्य स्तरीय समिति से जाँच कराई जाएगी।

मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए पुलिस ने कृष्णा हॉस्पिटल और पारस हॉस्पिटल के CCTV फुटेज भी सुरक्षित करा लिए हैं। पुलिस यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि आखिर 12 घंटे के भीतर ऐसा क्या हुआ जिससे मरीज के हाथ में संक्रमण तेजी से फैल गया। यह भी जाँच की जा रही है कि कौन सा इंजेक्शन लगाया गया और किस डॉक्टर या स्टाफ ने उपचार किया।

इस पूरे मामले में अपर पुलिस आयुक्त कानून व्यवस्था डॉ विपिन ताडा और कल्याणपुर थाना प्रभारी डॉ सुमेध जाधव को भी जिम्मेदारी दी गई है। दोनों अधिकारियों के पास मेडिकल की पढ़ाई का अनुभव होने के कारण वे मेडिकल जाँच और रिपोर्ट की बारीकियों को समझ रहे हैं। शनिवार को दोनों अधिकारियों ने ITBP के प्रतिनिधियों के साथ लंबी बैठक भी की।

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विवेकानंद मिश्र
विवेकानंद मिश्र
एक पत्रकार और कंटेंट क्रिएटर। राजनीति, संस्कृति, समाज से जुड़ी अनसुनी कहानियाँ सामने लाने के लिए प्रतिबद्ध।

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