पश्चिम बंगाल की राजनीति में सत्ता परिवर्तन की बयार सिर्फ सचिवालय तक सीमित नहीं रही, बल्कि इसकी गूँज उन सुदूर गाँवों में भी सुनाई दे रही है जहाँ पिछले कई वर्षों से सत्ताधारी दल के स्थानीय नेताओं का ‘जंगलराज’ चल रहा था। बुधवार (06 मई 2026) की सुबह दक्षिण 24 परगना जिले के झरखली में एक ऐसा दृश्य देखने को मिला जिसने लोकतंत्र में न्याय की उम्मीद को फिर से जीवित कर दिया है। करीब दो साल से अखिल भारतीय तृणमूल कॉन्ग्रेस (TMC) के स्थानीय नेताओं के अवैध कब्जे में रहा अरण्यज स्कूल आखिरकार मुक्त करा लिया गया है।
हालाँकि डराने वाली बात ये है कि चुनाव के समय में लगातार बीते 1 माह से अरण्यज स्कूल के कर्ताधर्ताओं को टीएमसी के स्थानीय काडर की तरफ से लगातार जान से मारने की धमकियाँ मिलती रही, लेकिन वो पीछे नहीं हटे और राज्य में टीएमसी की सरकार ढहते ही स्कूल को मुक्त करा लिया गया। ये अलग बात है कि सुंदरवन के जिस इलाके में ये स्कूल है, वहाँ मौजूदा चुनाव में एससी-सुरक्षित सीट से टीएमसी की उम्मीदवार नीलिमा की जीत हुई है।
सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे एक वीडियो में स्थानीय लोग और बच्चे उस स्कूल का ताला खुलवाते दिखाई दे रहे हैं, जिस पर जुलाई 2024 से कथित तौर पर टीएमसी के स्थानीय नेताओं का कब्जा था। जैसे ही स्कूल के गेट पर लगा अवैध ताला टूटा, पूरे परबतीपुर इलाके में खुशी की लहर दौड़ गई। जो बच्चे दो साल से अपनी शिक्षा और अपने सुनहरे भविष्य से दूर कर दिए गए थे, उनकी आँखों में खुशी के आँसू और चेहरे पर वह मासूम मुस्कान थी, जिसे जुलाई 2024 की उस काली सुबह ने छीन लिया था।
ऑपइंडिया से बातचीत में अरण्यज ग्रुप से जुड़े अभिजीत मुखर्जी ने बताया, “साल 2023 में अमृता बोस गुप्ता द्वारा शुरू किया गया यह फ्री इंग्लिश मीडियम स्कूल गरीब बच्चों की शिक्षा और महिलाओं के सशक्तिकरण का केंद्र था। जुलाई 2024 में टीएमसी के स्थानीय नेताओं ने इसे छीन लिया था। अब दो साल बाद स्कूल वापस मिलने पर पूरे परबतिपुर में उत्सव का माहौल है।”
यह सिर्फ एक इमारत की मुक्ति नहीं है, बल्कि उस शिक्षा और सामाजिक सशक्तिकरण के विचार की जीत है जिसे टीएमसी के गुंडों ने अपने पैरों तले रौंदने की कोशिश की थी।
वह ‘खौफनाक सुबह’ जब इंसानियत हुई शर्मसार
अरण्यज स्कूल की सचिव अमृता बोस गुप्ता द्वारा दर्ज कराई गई प्राथमिकी (FIR) और उनके बयानों से उस दिन की जो तस्वीर उभरती है, वह किसी भी सभ्य समाज को दहलाने के लिए काफी है। झरखली कोस्टल थाना क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले परबतीपुर में यह स्कूल गरीब बच्चों को निःशुल्क अंग्रेजी माध्यम की शिक्षा देने के पवित्र उद्देश्य से 2023 में शुरू किया गया था।
अमृता बोस के अनुसार, 8 जुलाई 2024 की सुबह करीब 7:30 बजे, जब स्कूल परिसर में मौजूद लोग अभी सोकर भी नहीं उठे थे, तब झरखली के उप-प्रधान दिलीप मंडल के नेतृत्व में दर्जनों उपद्रवियों ने हमला बोल दिया। हमलावरों ने सबसे पहले स्कूल की बिजली काट दी और सीसीटीवी कैमरों के तार काट दिए ताकि उनके कुकर्मों का कोई सबूत न रहे।
अमृता ने अपनी शिकायत में बताया कि उन्हें और उनकी टीम को नींद से घसीटकर बाहर निकाला गया। उनके साथ अभद्र भाषा का प्रयोग किया गया और उनके कपड़े फाड़ दिए गए। सबसे शर्मनाक बात यह थी कि हमलावरों के साथ कुछ महिलाएँ भी शामिल थीं, जो अमृता और उनकी साथी उपासना को पीट रही थीं और उनके कपड़े खींच रही थीं। जब अमृता ने सरकार द्वारा भूमि आवंटन से संबंधित पत्र दिखाने की कोशिश की, तो परिमल मंडल नाम के आरोपित ने उस आधिकारिक दस्तावेज को फाड़कर फेंक दिया।

मासूम और बुजुर्गों पर भी नहीं आया तरस
बर्बरता की हद तो तब हो गई जब अमृता के 8 साल के बेटे को जमीन पर पटक कर पीटा गया। जब उनकी 65 वर्षीय माँ ने अपने पोते को बचाने की कोशिश की, तो उन दरिंदों ने उनकी नाइटी तक खींच ली। उस अर्धनग्न अवस्था में भी वह बुजुर्ग महिला अपने पोते को बचाने के लिए जूझती रही, लेकिन टीएमसी के उन कथित कार्यकर्ताओं ने उनकी पीठ पर तब तक लातें मारीं जब तक कि वह बेहोश नहीं हो गईं। अमृता को भी सीढ़ियों से नीचे फेंक दिया गया, जिससे वह कुछ समय के लिए अचेत हो गई थीं।
लूट का व्यवस्थित तंत्र, शिक्षा के मंदिर को बनाया ‘मालखाना’
स्कूल को केवल खाली ही नहीं कराया गया, बल्कि ‘अरण्यज सोसाइटी फॉर एजुकेशनल एंड एनवायरमेंटल डेवलपमेंट’ की वर्षों की मेहनत से जुटाए गए सामान को बेरहमी से लूटा गया। जो सूची सामने आई है, वह यह दर्शाती है कि यह केवल एक राजनीतिक कब्जा नहीं, बल्कि एक सुनियोजित डकैती थी।
स्कूल और हॉस्टल की संपत्ति जो लूट ली गई–
- शिक्षा और तकनीक: स्कूल की लाइब्रेरी में रखी लगभग 1500 पुस्तकें, एक एलसीडी प्रोजेक्टर सेट, पब्लिक एड्रेसिंग सिस्टम, दो सीपीयू सेट, एक आसुस लैपटॉप और महत्वपूर्ण दस्तावेज फाइलों सहित गायब कर दिए गए।
- ऊर्जा और बुनियादी ढाँचा: एक सोलर इन्वर्टर, दो सोलर पैनल (160W), 8 सीलिंग फैन, 4 टेबल फैन, 20 एलईडी लाइटें और 4 हैवी ड्यूटी हैलोजन लाइटें।
- फर्नीचर: 12 लकड़ी के बेंच, 40 प्लास्टिक की कुर्सियाँ, 2 लकड़ी की मेज, और अलमारियाँ।
- हॉस्टल का सामान: शिक्षकों और स्वयंसेवकों के लिए रखे गए 3 लकड़ी के बिस्तर, 20 कंबल, 20 तकिए और 5 बेडिंग सेट।

महिलाओं और बच्चों के हक पर डाका
यह एनजीओ केवल स्कूल ही नहीं चलाता था, बल्कि महिलाओं के स्वावलंबन के लिए एक सेनेटरी नेपकिन प्रोडक्शन यूनिट भी चला रहा था। हमलावरों ने इस यूनिट की कीमती मशीनों को भी नहीं छोड़ा, जिसमें-
- 2 एचपी की पल्वेराइजर मशीन और वुड पल्प ग्राइंडर।
- 3 यूवी रेडिएशन स्टरलाइजर (2000 नेपकिन क्षमता वाले)।
- Ball press मशीन (100 किलो वजन वाली) और 10 सीलिंग मशीनें।
- 600 पैकेट तैयार सेनेटरी नेपकिन्स और 200 किलो वुड पल्प जैसे कच्चे माल।

इसके अलावा बच्चों के लिए रखे गए 450 स्कूल यूनिफॉर्म, 150 वाटरप्रूफ बैग और महिलाओं को देने के लिए रखी गईं 150 नई साड़ियाँ भी लूट ली गईं। रसोई से 100 किलो चावल, 20 किलो दालें और रेफ्रिजरेटर तक उठा ले गए। संस्था के कैश बॉक्स से 20,000 रुपए और अमृता की निजी बैग से 15,000 रुपए नकद भी चोरी कर लिए गए।
चार्जशीट में नामजद ‘सत्ता के रसूखदार’
इस पूरे मामले में पुलिस की भूमिका पर भी गंभीर सवाल उठे थे। 9 जुलाई 2024 को प्राथमिकी दर्ज होने के बावजूद, टीएमसी सरकार के दौरान आरोपितों की गिरफ्तारी को लेकर कोई खास तत्परता नहीं दिखाई गई। हालाँकि जाँच अधिकारी प्रियंका रूज (LSI) द्वारा जो चार्जशीट दाखिल की गई, वह इन अपराधियों के चेहरे बेनकाब करने के लिए काफी है।
मुख्य आरोपित जिनके खिलाफ चार्जशीट दाखिल हुई-
- दिलीप मंडल (Dilip Mondal) पिता- अजीत मंडल (झरखली उप-प्रधान और हमले का मास्टरमाइंड)
- परिमल मंडल (Parimal Mondal) पिता- सरोजित मंडल
- धनंजय मंडल (Dhananjoy Mondal) पिता- मन्मथ मंडल
- सरोज चंद्र विश्वास
- अपूर्वा रॉय
- विश्वजीत बारी
- किशोर गायेन
- समीर मंडल
इन सभी के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS) की विभिन्न गंभीर धाराओं जैसे 329(4) (गंभीर चोट पहुँचाना), 115(2), 76, 324(4), 351(3) और 3(5) के तहत मामला दर्ज किया गया। चार्जशीट अलीपुर के अतिरिक्त मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट की अदालत में पेश की गई थी, लेकिन सत्ता के संरक्षण के कारण ये आरोपित दो साल तक खुलेआम घूमते रहे।

सत्ता बदली तो बदला मंजर
मई 2026 में ममता बनर्जी की सरकार गिरने के साथ ही प्रशासन का इकबाल वापस लौटा है। स्थानीय लोगों का कहना है कि जैसे ही सत्ता का संरक्षण हटा, इन ‘बाहुबलियों’ के हौसले पस्त हो गए। जो स्कूल दो साल से सन्नाटे और खौफ का केंद्र बना हुआ था, वहाँ अब फिर से बच्चों की किलकारियाँ गूँजने की तैयारी है।
सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे वीडियो में देखा जा सकता है कि कैसे स्थानीय ग्रामीण और एनजीओ के कार्यकर्ता मिलकर स्कूल की सफाई कर रहे हैं और कब्जा हटाने के बाद तिरंगा फहरा रहे हैं। यह वीडियो केवल एक स्कूल की मुक्ति का दस्तावेज नहीं है, बल्कि बंगाल की जनता के उस दबे हुए गुस्से का प्रकटीकरण भी है जो उन्होंने पिछले कई वर्षों से सहा है।
TMC Looted and Locked Her Dream School — Amrita Finally Gets It Back After BJP's Victory
— Sayan Chakraborty (@sayan2024) May 7, 2026
Amrita Bose:
•Left a respected corporate job in Kolkata to serve society
•Moved from city life to a remote rural village
•Started a completely free English-medium school with her own… pic.twitter.com/VCZIW6yt1e
ऑपइंडिया से बातचीत में अमृता बोस गुप्ता ने बताया बीते 1 माह का हाल
ऑपइंडिया से एक्सक्लूसिव बातचीत में अरण्यज स्कूल की संचालिका अमृता बोस गुप्ता ने बताया कि जैसे जैसे चुनावी माहौल गरम हो रहा था, वैसे-वैसे टीएमसी के गुंडों की हरकतें बढ़ती जा रही थी। उन्होंने इस स्कूल पर कब्जे और पूरे गुंडा गैंग का सरगना राजा गाजी नाम के ब्लॉक स्तर के टीएमसी नेता को बताया। अमृता बोस ने कहा कि शुरू में हमें पता नहीं चल पाया कि दिलीप मंडल और गैंग के पीछे कौन है, लेकिन बाद में टीएमसी नेता राजा गाजी का नाम सामने आया। फिलहाल पुलिस उसे ढूँढ रही है और अब वो कभी भी गिरफ्तार किया जा सकता है। उन्होंने बताया कि बीते 1 माह से अरण्यज स्कूल से जुड़े हर इंसान की जिंदगी खतरे में रही।
अमृता ने बताया कि बीते 1 माह में अनगिनत बार उन्हें और उनके सहयोगियों को जान से मारने की धमकियाँ मिली। इसके बावजूद उन्होंने सत्ता परिवर्तन के लिए पूरी ताकत लगा दी और बीजेपी के पक्ष में जमकर प्रचार किया। अमृता ने साफ कहा कि इस स्कूल की मुक्ति बीजेपी की जीत से जुड़ी थी, भले ही इस सीट पर TMC कैंडिडेट की जीत हुई हो, लेकिन राज्य में सत्ता परिवर्तन होने के बाद हमें ताकत मिली और हमने इस स्कूल को मुक्त करा लिया है।
अमृता बोस गुप्ता ने कहा कि अभी स्कूल के पुनर्उद्धार पर पूरा जोर है। चूँकि शैक्षणिक सत्र शुरू हो गए हैं, इसलिए बच्चों को लाने की चुनौती रहेगी, लेकिन अभी स्कूल की पूरी व्यवस्था खड़ी करने में समय लगेगा। उन्होंने कहा कि ये स्कूल लोगों के सहयोग से चलेगा, इसमें किसी पार्टी की तरफ से सहयोग की जरूरत नहीं है। हमें जिस कानून व्यवस्था और न्याय की जरूरत थी, वो इस नई सरकार से मिल जाएगी, हमारे लिए इतना ही काफी रहेगा।
बीजेपी ने स्वीकारा अमृता का संघर्ष, वीडियो किया ट्वीट
यहाँ ये बताना अहम है कि एक तरफ अब तक सत्ता में रही टीएमसी और उसके लोग नन्हे-मुन्ने बच्चों का भविष्य बर्बाद करने पर तुले थे, तो दूसरी तरफ बीजेपी ने अमृत बोस गुप्ता के संघर्ष को न सिर्फ स्वीकार किया, बल्कि स्कूल की मुक्ति का वीडियो अपने आधिकारिक एक्स हैंडल से भी पोस्ट किया है। दरअसल, अमृता इसी नैतिक समर्थन की बात कर रही थी, जो फिलहाल उन्हें बीजेपी की तरफ से मिलता दिख रहा है।
सत्ता के अहंकार पर साहस की जीत! ✊🔥
— BJP (@BJP4India) May 8, 2026
अमृता बोस ने कॉर्पोरेट करियर छोड़ ग्रामीण बच्चों के लिए मुफ़्त अंग्रेजी स्कूल और माताओं के लिए रोज़गार शुरू किया। 📚
लेकिन TMC नेताओं ने ₹2 करोड़ की रंगदारी मांगी। इनकार पर स्कूल लूटा गया, कंप्यूटर छीने गए और ताला लगा दिया गया।
आज राजनीतिक… pic.twitter.com/ncTe2KV8Xi
न्याय की उम्मीद अभी बाकी है
स्कूल तो मुक्त हो गया लेकिन अरण्यज के सामने अब चुनौतियों का पहाड़ है। लुटा हुआ सामान, टूटी हुई मशीनें और दो साल का शैक्षिक नुकसान… इसकी भरपाई कौन करेगा? अमृता बोस गुप्ता ने प्रशासन से गुहार लगाई है कि न केवल आरोपितों को सलाखों के पीछे भेजा जाए, बल्कि लूटी गई एक-एक पाई और सामान की बरामदगी भी सुनिश्चित की जाए।
इन तमाम बहसों के बीच सबसे महत्वपूर्ण तस्वीर उन बच्चों की है जो करीब दो साल बाद अपने स्कूल परिसर में लौटे। जिन कमरों में कभी पढ़ाई होती थी, वहाँ ताले लगे रहे। जिन दीवारों पर बच्चों के सपने लिखे जाने थे, वहाँ राजनीतिक संघर्ष की छाया पड़ गई। अब सवाल यह है कि क्या यह स्कूल सिर्फ खुल जाएगा या वास्तव में फिर से वैसा बन पाएगा जैसा उसे शुरू किया गया था जिसमें गरीब बच्चों के लिए मुफ्त शिक्षा, महिलाओं के लिए रोजगार प्रशिक्षण और ग्रामीण समाज के लिए उम्मीद का केंद्र।

यह मामला बंगाल के अन्य उन क्षेत्रों के लिए भी एक नजीर है जहाँ राजनीतिक रसूख के दम पर जन-कल्याणकारी संस्थाओं और निजी संपत्तियों पर कब्जे किए गए हैं। अरण्यज स्कूल की मुक्ति एक संदेश है कि सत्ता का अहंकार शाश्वत नहीं होता और अंततः जीत न्याय और शिक्षा की ही होती है।
आज परबतीपुर का हर बच्चा कह रहा है- “हमारा स्कूल वापस मिल गया, अब हम फिर से पढ़ेंगे।” यह छोटी सी जीत बंगाल के पुनरुद्धार की दिशा में एक बड़ा कदम साबित हो सकती है।


