उत्तर प्रदेश में कानून व्यवस्था की तस्वीर पिछले नौ वर्षों में पूरी तरह बदल गई है। योगी आदित्यनाथ सरकार की जीरो टॉलरेंस नीति ने राज्य को दंगा मुक्त बनाते हुए फिरौती के लिए अपहरण जैसी घटनाओं पर पूरी तरह लगाम लगा दी है। जिस प्रदेश को 2017 से पहले ‘दंगा प्रदेश’ कहा जाता था, वहाँ अब शांति और सुरक्षा की मिसाल कायम हो गई है।
सपा सरकार में हर दिन औसतन 19 दंगे-33 अपहरण
सपा सरकार के दौरान वर्ष 2012 से 2017 के बीच प्रदेश में कानून व्यवस्था को लेकर लगातार सवाल उठते रहे। एनसीआरबी की रिपोर्ट के अनुसार उस समय औसतन हर दिन करीब 19 दंगे होते थे और अपहरण की 33 घटनाएँ दर्ज की जाती थीं। इस अवधि में कुल 25 हजार से अधिक दंगे हुए, जो प्रदेश की छवि को बुरी तरह प्रभावित करते थे। व्यापारी और आम नागरिक दोनों ही फिरौती के खतरे में रहते थे।
योगी सरकार ने अपनाई जीरो टॉलरेंस पॉलिसी
योगी सरकार ने सत्ता संभालते ही अपराध और अपराधियों के खिलाफ सख्त रुख अपनाया। जीरो टॉलरेंस नीति के तहत सक्रिय पुलिसिंग, गैंगस्टर एक्ट का इस्तेमाल और माफिया की संपत्तियों की जब्ती जैसे कदम उठाए गए। परिणामस्वरूप पिछले नौ वर्षों में उत्तर प्रदेश में एक भी दंगा नहीं हुआ। कुछ अराजक तत्वों द्वारा दंगा भड़काने की कोशिशें जरूर की गईं, लेकिन सरकार ने समय रहते सख्त कार्रवाई कर उन मंसूबों पर पानी फेर दिया।
मामूली हिंसक घटनाओं को उग्र रूप लेने से पहले ही दंगा विरोधी धाराओं में रिपोर्ट दर्ज कर अराजक तत्वों को सलाखों के पीछे भेज दिया गया। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने सार्वजनिक मंचों पर स्पष्ट कहा है, ‘नो कर्फ्यू-नो दंगा, यूपी में सब चंगा।’ उनकी इस नीति ने पूरे प्रदेश में शांति का माहौल स्थापित किया है।
एनसीआरबी की रिपोर्ट करती है दावों की पुष्टि
एनसीआरबी की 2024 रिपोर्ट इस बदलाव की पुष्टि करती है। रिपोर्ट के अनुसार फिरौती के लिए अपहरण की अपराध दर उत्तर प्रदेश में शून्य दर्ज की गई है। वर्ष 2023 में भी यह दर शून्य ही रही। देश के अन्य राज्यों की तुलना में यूपी इस मामले में सबसे बेहतर स्थिति में है। नगालैंड में यह दर 0.7, मणिपुर में 0.6, अरुणाचल प्रदेश में 0.3 और मेघालय में 0.2 रही, जबकि उत्तर प्रदेश में शून्य रहा।
प्रदेश में दो वर्षों (2023-2024) में फिरौती के लिए अपहरण की एक भी घटना नहीं हुई। पहले जहां व्यापारियों को आए दिन अगवा कर फिरौती माँगी जाती थी, वहां अब ऐसी घटनाएँ पूरी तरह समाप्त हो गई हैं। एनसीआरबी रिपोर्ट स्पष्ट बताती है कि सपा शासन में हर दिन 33 अपहरण दर्ज होते थे, लेकिन योगी सरकार में यह आँकड़ा शून्य पर पहुँच गया है।
बलवा यानी दंगे की अपराध दर पर भी योगी सरकार का रिकॉर्ड उल्लेखनीय है। 2024 में यूपी में यह दर 1.1 दर्ज की गई, जबकि राष्ट्रीय स्तर पर यह 2.2 रही। रिपोर्ट में उल्लेख है कि यूपी में दर्ज 1.1 दर वाले मामले वे हैं जिनमें दंगा भड़काने की कोशिशों को तुरंत विफल कर दिया गया और अराजक तत्वों के खिलाफ सख्त धाराओं में कार्रवाई की गई। मणिपुर में यह दर 8.4, महाराष्ट्र में 6.4, कर्नाटक में 5.4, हरियाणा में 5.3 और हिमाचल प्रदेश में 4.7 रही।
योगी सरकार ने बदली यूपी की तस्वीर
यह सकारात्मक बदलाव योगी सरकार की अपराध एवं अपराधियों के खिलाफ जीरो टॉलरेंस नीति, सक्रिय पुलिसिंग और संगठित अपराधों पर लगातार कार्रवाई का नतीजा है। पुलिस ने गैंगस्टर एक्ट लागू कर माफिया की आर्थिक कमर तोड़ी और उनकी संपत्तियां जब्त कीं। इन कदमों का असर धरातल पर साफ दिखाई दे रहा है।
उत्तर प्रदेश अब न केवल दंगा मुक्त है बल्कि अपराध की अन्य श्रेणियों में भी राष्ट्रीय औसत से बेहतर प्रदर्शन कर रहा है। सपा सरकार के समय की तुलना में आज यूपी की छवि पूरी तरह बदल चुकी है। पहले जहाँ दंगे और अपहरण आम बात थे, वहां आज शांति और विकास की कहानी लिखी जा रही है।
सरकार का मानना है कि सख्त कानून व्यवस्था ही विकास का आधार है। योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में उठाए गए इन कदमों ने न केवल अपराधियों के हौसले पस्त किए हैं बल्कि आम नागरिकों में सुरक्षा की भावना भी बढ़ाई है। एनसीआरबी की ताजा रिपोर्ट इसी सच्चाई की गवाही देती है।
इस तरह योगी सरकार ने साबित कर दिया कि जीरो टॉलरेंस नीति के साथ सख्ती और संवेदनशीलता का सही संतुलन अपराध मुक्त समाज का रास्ता तैयार कर सकता है। उत्तर प्रदेश अब पूरे देश के लिए मिसाल बन गया है।


