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‘गंगा किसकी है?’: इफ्तार के नाम पर नाव में मीट पार्टी करने वाले मुस्लिम युवकों को ‘The Wire’ ने दिया कवर फायर

आपने वो वीडियो तो देखे होंगे कि कुछ नशेड़ी गंगा में शराब और हुक्का पीने लगते हैं। जब ये पकड़े जाते हैं तो उनके सीधा लठ बजाए जाते हैं और फिर कानूनी कार्रवाई होती है। ऐसा इसलिए क्योंकि गंगा आपकी अय्याशी का अड्डा नहीं है और ये बात सब पर लागू होती है।

हरीश की भी गंगा है, हारिस की भी गंगा है, हरकीरत की भी गंगा है और हैरी की भी गंगा है- इनशॉर्ट गंगा या कोई भी नदी सबकी साझा होती है। वो जाति, रंग मजहब देखे बिना सबका भरण-पोषण करती है- सुनने में ये बात कितनी तार्किक मालूम पड़ती है… है ना? The Wire की हेडिंग भी कुछ ऐसी ही है। इसमें उर्दू शायरी और शायरों का जिक्र भी है जिन्होंने गंगा के बारे में लिखा है। यानी ये साबित करने की कोशिश की जा रही है कि भाई हमारे वालों ने तो गंगा पर साहित्य भी लिखा है इसलिए गंगा हमारी है।

उनकी और उनके पुरखों की भावनाओं का क्या… जो पीढ़ियों से गंगा किनारे रहते आए हैं। यह सवाल पूछते हुए लेखिका आगे लिखती हैं कि क्या अब हम नदियों और पहाड़ों पर भी पहले अधिकार तय करने वाले हैं? 

रखशंदा जलील ये आर्टिकल लिखती हैं और पुरानी वामपंथन सीमा चिश्ती इसे शेयर करती हैं। गंगा सबकी है ये बात सही है लेकिन यहाँ कुछ फेक न्यूज फैलाई जा रही है इसलिए सबसे पहले फैक्ट्स जानने जरूरी हैं।

मुस्लिमों को यह बताया जा रहा है कि गंगा में इफ्तारी मनाने वालो को इसलिए पकड़ा गया क्योंकि वो गंगा नदी में अपना रोजा खोल रहे थे। विक्टिम कार्ड खेला जा रहा है कि उन्हें गंगा नदी में जाने से रोका जा रहा है। जबकि सच्चाई ये है कि वो उस गंगा नदी में मीट खा रहे थे। नॉनवेज बिरयानी खा रहे थे और वो भी जानबूझकर बिंदुमाधव मंदिर के पास खा रहे थे जहाँ नॉनवेज बैन है। 

सच्चाई ये है कि कोर्ट में जब इन 14 आरोपितों को पेश किया गया तो ये रोने लगे। जज के सामने कान पकड़कर माफी माँगने लगे कि उन्हें अपने किए का पछतावा है। नाव चालकों का तो आरोप है कि इन मुस्लिम युवकों ने डरा-धमकाकर और उनकी इच्छा के खिलाफ नाव को बीच गंगा में ले जाकर इस काम को अंजाम दिया। 

अब आपने वो वीडियो तो देखे होंगे कि कुछ नशेड़ी गंगा में शराब और हुक्का पीने लगते हैं। जब ये पकड़े जाते हैं तो प्रशासन एक्शन लेते हैं और फिर कानूनी कार्रवाई होती है। ऐसा इसलिए क्योंकि गंगा आपकी अय्याशी का अड्डा नहीं है, इससे हिंदुओं की धार्मिक भावनाएँ जुड़ी हुई है।

ऐसे में अगर ये नियम नदी की पवित्रता बनाए रखने के लिए अगर ये बात शराबियों पर लागू होती है तो गंगा नदी में चिकन बिरयानी से रोजा खोलने और हड्डियों को गंगा में फेंकने वालों को सहानुभूति की नजर से क्यों देखा जाए। क्यों ना इसे षड्यंत्र की नजर से देखा जाए। 

ये लोग गंगा को केवल एक नदी के तौर पर देखते हैं लेकिन हिंदुओं के लिए गंगा हिमवान की पुत्री और माँ पार्वती की बहन है। गंगा स्कंद यानी कार्तिकेय की धाय माँ है। गंगा विष्णुपदी है। गंगा शांतनु की पत्नी और भीष्म पितामह की माँ है। गंगा को भगवान शिव ने अपनी जटाओं में धारण किया है। गंगा राजा भगीरथ के 60 हजार पूर्वजों की उद्धारक है। इसीलिए गंगा हमारे लिए केवल एक बहता पानी नहीं है, वह पाप-नाशिनी है, पूजनीय है। गंगा हर एक हिंदू के जीवन में रची बसी है, चाहे वह गंगा के किनारे रहता हो या गंगा नदी से दूर।

रही बात मुस्लिमों को बैन की तो हमारा दिल बड़ा है इसलिए हम बैन तो मुस्लिमों को नहीं कर रहे हैं, लेकिन सवाल ये है कि आखिर ये सवाल ही कहा से आया कि गंगा किसकी है? हर चीज पर अधिकार जमाने का जो कॉन्सेप्ट है वो इस्लाम का ही है। काबा हमारा है, कुतुब भी हमारा है, कश्मीर हमारा है और हिंदुस्तान हमारे अब्बू का है। ये सब तो इस्लाम की भाषा है जबकि हिंदुओं ने तो कभी भी किसी तरह के कब्जे की बात ही नहीं की है।

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आशीष नौटियाल
आशीष नौटियाल
पहाड़ी By Birth, PUN-डित By choice

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