हाईकोर्ट ने की IT विभाग के खिलाफ क्विंट संस्थापक राघव बहल की रिट रद्द

आयकर विभाग ने हाल ही में बहल के खिलाफ मेरठ की एक अदालत कालाधन-निरोधक कानून या कालाधन (अज्ञात विदेशी आय और संपत्ति) एवं कर आरोपण कानून, 2015 के प्रावधानों के तहत आरोप पत्र दायर किया था।

इलाहबाद हाईकोर्ट ने ब्लैक मनी मामले में प्रोपगेंडा वेबसाइट दी क्विंट के संस्थापक राघव बहाल की रिट रद्द कर दी है, जिसमें उन्होंने आयकर विभाग के कार्रवाई को चुनौती दी थी।

प्रवर्तन निदेशालय (ED) के रडार में आने के बाद से ‘द क्विंट’ के मालिक ने इलाहाबाद हाईकोर्ट में एक रिट याचिका दायर की थी, जिसमें उन्हें कारण बताओ नोटिस और उसके बाद की गई कार्रवाइयों को चुनौती दी थी।

रिपोर्ट्स के अनुसार, राघव बहल का कहना है कि कथित विदेशी संपत्ति के संबंध में एक विदेशी बैंक खाते में किए गए सभी भुगतान उसके वैध बैंक खातों से स्थानांतरित किए गए थे और विदेशी बैंक खातों में हस्तांतरित धन का विधिवत खुलासा किया गया था। उन्होंने कहा कि विदेश में संपत्ति के सम्बन्ध में उनके पास आय के वैध स्रोत हैं।

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बहल ने अदालत के समक्ष कहा कि कि लंदन में संपत्ति की खरीद का खुलासा उन्होंने 2018-19 के आयकर रिटर्न में किया था। आईटी विभाग ने बहल पर विभाग की आँखों में धूल झोंकने के मामले में कार्रवाई शुरू की थी, इस पर राघव ने अदालत के में कहा कि उनके खिलाफ अभियोजन शुरू करने से पहले व्यक्तिगत सुनवाई से इनकार कर दिया गया था।

ED का ये मामला आयकर विभाग की मनी लॉन्ड्रिग एक्ट के तहत फाइल की गई चार्जशीट पर आधारित है। इस चार्जशीट में आयकर विभाग ने बहल पर आरोप लगाया है कि उन्होंने लंदन में 2.38 करोड़ मूल्य की संपत्ति खरीदी, जिसके बारे में उन्होंने कोई जानकारी नहीं दी।

आयकर विभाग ने हाल ही में बहल के खिलाफ मेरठ की एक अदालत कालाधन-निरोधक कानून या कालाधन (अज्ञात विदेशी आय और संपत्ति) एवं कर आरोपण कानून, 2015 के प्रावधानों के तहत आरोप पत्र दायर किया था।

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