Thursday, April 22, 2021
Home विचार राजनैतिक मुद्दे वर्तमान राजनीति को सर्कस कहने वाले चिदंबरम ख़ुद की ‘जोकर’ वाली भूमिका पर क्या...

वर्तमान राजनीति को सर्कस कहने वाले चिदंबरम ख़ुद की ‘जोकर’ वाली भूमिका पर क्या कहेंगे

सच तो यह है कि मोदी सरकार जब से सत्ता में आई है, तब से गाँधी परिवार और उनके प्रियजनों का सुख-चैन-नींद सब स्वाहा हो गया है। इसी का परिणाम है पी चिदंबरम का यह आर्टिकल जिसमें उनकी बेचैनी स्पष्ट नज़र आ रही है।

लोकसभा चुनाव सिर पर हैं और कॉन्ग्रेसी खेमे की हताशा और निराशा बेक़ाबू होती जा रही है। अपने ‘बिगड़े’ मानसिक संतुलन के चलते कब कौन क्या कह दें कुछ पता नहीं। ऐसी ही एक हरक़त कॉन्ग्रेस के पूर्व वित्त मंत्री पी. चिदंबरम ने अपने एक आर्टिकल के माध्यम से की। अपने इस आर्टिकल में उन्होंने बीजेपी को घेरते हुए कई मुद्दों को शामिल किया।

शुरुआत करते हैं उन मुद्दों से जिन्हें इस आर्टिकल के ज़रिए पीएम मोदी की छवि को धूमिल करने का प्रयास किया गया। चिंदंबरम ने पहला वार ‘चौकीदार’ शब्द पर किया और कहा कि चौकीदार होना सम्मानजनक काम है जो कई शताब्दियों से चला आ रहा है। चौकीदारों के लिए दिन-रात सब एक समान होते हैं।

चौकीदार प्रधानमंत्री की चौकीदारी, बन गया वो दर्द जिसका कोई इलाज नहीं

अपने लेख में उन्होंने पीएम मोदी पर निशाना साधते हुए उनके द्वारा चौकीदार शब्द के इस्तेमाल का मखौल उड़ाया। उनके इस प्रकार मखौल उड़ाने को मैं उनका दर्द कहूँगी। कारण स्पष्ट है क्योंकि देश के इसी चौकीदार की चौकीदारी का नतीजा था कि एयरसेल-मैक्सिस डील में पिता-पुत्र (पी चिदंबरम और कार्ति चिदंबरम) के घोटालों का पर्दाफ़ाश हुआ। आरोप यह है कि पिता-बेटे ने यह घोटाला तब किया था, जब यूपीए सरकार में वित्त मंत्री थे सीनियर चिदंबरम। उन पर आरोप लगा था कि उन्होंने पद पर रहते हुए ग़लत तरीक़े से विदेशी निवेश को मंज़ूरी दी थी। उन्हें केवल 600 करोड़ रुपए तक के निवेश की मंज़ूरी का अधिकार था लेकिन उन्होंने 3500 करोड़ रुपए के निवेश को मंज़ूरी दी, जो बाद में घोटाले के रूप में उजागर हुई।

बता दें कि इस घोटाले का संबंध 2007 से है, जब कार्ति चिदंबरम ने अपने पिता के ज़रिए INX मीडिया को विदेशी निवेश बोर्ड से विदेशी निवेश की मंज़ूरी दिलाई थी। ऐसा करने से INX मीडिया को 305 करोड़ रुपए का विदेशी निवेश प्राप्त हुआ था। इस कड़ी में इस बात का ख़ुलासा भी हुआ था कि कार्ति ने ही INX मीडिया के प्रमोटर इंद्राणी मुखर्जी और पीटर मुखर्जी से पी. चिदंबरम की मुलाक़ात करवाई थी।

इसके अलावा चिदंबरम की पत्नी नलिनी चिदंबरम के तार शारदा चिटफंड घोटाले से भी जुड़े पाए गए हैं। इसके लिए उनके ख़िलाफ़ सीबीआई ने चार्जशीट दाखिल की थी। सीबीआई का कहना था कि शारदा चिटफंड घोटाले में नलिनी चिदंबरम ने साल 2010 से 2012 के बीच 1.4 करोड़ रुपए लिए थे।

यूपीए सरकार में चौकीदार तो कोई था नहीं इसलिए उस समय के ‘चोरों’ को आज का पीएम रूपी चौकीदार तो खलेगा ही।

सर्कस और राजनीति को जोड़ना कितना न्यायसंगत

कॉन्ग्रेस की चिड़चिड़ाहट का कारण केवल और केवल पीएम मोदी हैं। यह चिड़चिड़ाहट और बौखलाहट किसी न किसी रूप में सामने आती रहती है। इस बार यह झुंझलाहट पी. चिदंबरम के रूप में सामने है। अपने आर्टिकल में उन्होंने बीजेपी की ख़िलाफ़त में वर्तमान शासन व्यवस्था को सर्कस का नाम दे डाला और कहा कि रिंगमास्टर (पीएम मोदी) हैं लेकिन शेर और बाघ तो हैं ही नहीं। रिंगमास्टर अपने चाबुक का इस्तेमाल केवल मेमनों और खरगोश पर कर रहा है। चिदंबरम की यह टिप्पणी बेहुदगी का प्रमाण है।

यूपीए की सरकार में कितने बाघ और चीते थे? इस बात का अंदाज़ा तो इसी बात से लग जाता है जब 2013 में कॉन्ग्रेस के राहुल गाँधी ने एक प्रेस कॉन्फ़्रेंस में दागियों के चुनाव लड़ने संबंधी सरकारी अध्यादेश को सरासर बकवास करार दिया था और कह दिया था कि ऐसे अध्यादेश को फाड़कर फेंक देना चाहिए। जबकि यह अध्यादेश संसद में पास किया गया था और राहुल तब सिर्फ़ एक सांसद थे। इस बयान के बाद कई केंद्रीय मंत्रियों ने राहुल के ही सुर में सुर मिलाए थे, जबकि पहले वो पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह के पाले में थे।

मनमोहन सिंह का नाम आते ही एक बात और याद आ जाती है, जब उन्होंने स्वीकारा था कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी उनसे अधिक सक्षम सेल्समैन, इवेंट मैनेजर और कम्यूनिकेटर हैं। सिंह द्वारा इस बात को सहर्ष स्वीकार कर लेना कॉन्ग्रेस पार्टी को उनकी नाक़ामयाबियों का दर्शन कराना था। हालाँकि यह सर्वविदित है कि बतौर प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह अपनी एक शांतचित्त और मौन धारण की छवि के लिए विख्यात थे। लंबे समय से प्रधानमंत्री पद पर रहने के बावजूद कुछ न कह पाना या हर मसले पर गाँधी परिवार का मुँह ताकना कितना कष्टकारी रहा होगा, इस बात का अंदाज़ा तो सत्ता से हटने के बाद उनके दिए गए इसी बयान से लगाया जा सकता है।

रोज़गार के नाम पर केंद्र को घेरने से पहले अपने समय को याद कर लेते तो यह सवाल ही न उठाते

अपने आर्टिकल में पी. चिदंबरम ने रोज़गार की बात उठाई जैसे उनके समय में रोज़गार का अंबार लगा हो। मोदी शासनकाल में कहीं भी रोज़गार को लेकर छंटनी का शोर नहीं सुना गया। कहीं नौकरी के लिए धरना-प्रदर्शन देखने को नहीं मिला जबकि यूपीए शासनकाल में एयर इंडिया के कर्मचारियों को हड़ताल करने तक की नौबत आ गई थी। इसी कड़ी में एयर लाइन के प्रबंधक ने 71 पायलटों को बर्खास्त कर दिया था जिसके बाद एयर इंडिया के पायलट भूख हड़ताल पर भी बैठ गए थे। तब देश के वित्त मंत्री  चिदंबरम साहब का ध्यान इस ओर नहीं था क्योंकि उस समय वो ख़ुद पैसा बनाने में व्यस्त थे।

यूपीए की विफलताओं के तमाम कारणों में बेरोज़गारी सबसे अहम मुद्दा था, जिसके ख़िलाफ़ विरोध प्रदर्शन भी हुए। इसमें तत्कालीन सरकार (2011) को चेतावनी भरे लफ़्जों में कहा गया था कि अगर सरकार ने रोजगार नीति में सुधार नहीं किया तो भारत में मिश्र और लीबिया जैसे हालात पैदा हो सकते हैं।

किसानों को बरगलाना बंद करें, असलियत को स्वीकारें

पी. चिदंबरम ने अपने आर्टिकल के अंत में किसानों को टारगेट करके लिखा कि क्या केवल शेख़ी बघारने से किसानों की आय दोगुनी होगी। साथ ही किसानों की कर्ज़माफ़ी को भी मुद्दा बनाया। अब उन्हें कौन समझाए कि मध्य प्रदेश में कॉन्ग्रेस की सरकार बनने के बाद किसानों की कर्ज़माफ़ी की घोषणा की गई। एमपी सरकार द्वारा की गई किसानों की कर्ज़माफ़ी की घोषणा किसी मज़ाक से कम नहीं थी, जब इस बात का ख़ुलासा हुआ कि कर्जमाफ़ी के नाम पर किसानों को मात्र 13 रुपए और 15 रुपए के चेक थमाए गए, इस पर शिवपाल नामक एक किसान ने कहा था, “सरकार कर्ज़ माफ़ कर रही है तो मेरा पूरा कर्ज़ माफ़ होना चाहिए, 13 रुपए की तो हम बीड़ी पी जाते हैं।” इसके अलावा कर्ज़माफ़ी के नाम पर फ़र्ज़ी पतों और मृतकों के नाम पर भी कर्ज़माफ़ी का ख़ुलासा हुआ। इससे आहत होकर किसानों ने सामूहिक आत्महत्या करने तक की चेतावनी दे दी थी।

चिदंबरम जी, मैं आपको बताना चाहुँगी कि वर्तमान सरकार ने किसानों के लिए जो किया, वो पहले की सरकारों ने कभी नहीं किया। इसका सबूत आप उन योजनाओं के ज़रिए से जान सकते हैं, जिनके माध्यम से मोदी सरकार ने गाँवों की न सिर्फ़ तस्वीर बदल दी बल्कि आम जन-जीवन की बुनियाद को भी मज़बूत किया।

आज का भारत नया भारत है, जिसमें ग्रामीण और शहरी दोनों का विकास शामिल है। आज जो तस्वीर भारत की है, उसमें भारत का सशक्त रूप उभर कर दुनिया के सामने है। वो अलग बात है कि जिसकी आदत ही बिना सिर-पैर की बात करना हो तो उसे कुछ नहीं दिखाई देगा। सच तो यह है कि मोदी सरकार जब से सत्ता में आई तब से गाँधी परिवार और उनके प्रियजनों का सुख-चैन-नींद सब स्वाहा हो गया है। इसी का परिणाम है पी. चिदंबरम का यह आर्टिकल, जिसमें उनकी बेचैनी स्पष्ट नज़र आ रही है।

  सहयोग करें  

एनडीटीवी हो या 'द वायर', इन्हें कभी पैसों की कमी नहीं होती। देश-विदेश से क्रांति के नाम पर ख़ूब फ़ंडिग मिलती है इन्हें। इनसे लड़ने के लिए हमारे हाथ मज़बूत करें। जितना बन सके, सहयोग करें

संबंधित ख़बरें

ख़ास ख़बरें

मतुआ समुदाय, चिकेन्स नेक और बांग्लादेश से लगे इलाके: छठे चरण में कौन से फैक्टर करेंगे काम, BJP से लोगों को हैं उम्मीदें

पश्चिम बंगाल की जनता उद्योग चाहती है, जो उसके हिसाब से सिर्फ भाजपा ही दे सकती है। बेरोजगारी मुद्दा है। घुसपैठ और मुस्लिम तुष्टिकरण पर TMC कोई जवाब नहीं दे पाई है।

अंबानी-अडानी के बाद अब अदार पूनावाला के पीछे पड़े राहुल गाँधी, कहा-‘आपदा में मोदी ने दिया अपने मित्रों को अवसर’

राहुल गाँधी पीएम मोदी पर देश को उद्योगपतियों को बेचने का आरोप लगाते ही रहते हैं। बस इस बार अंबानी-अडानी की लिस्ट में अदार पूनावाला का नाम जोड़ दिया है।

‘सरकार ने संकट में भी किया ऑक्सीजन निर्यात’- NDTV समेत मीडिया गिरोह ने फैलाई फेक न्यूज: पोल खुलने पर किया डिलीट

हालाँकि सरकार के सूत्रों ने इन मीडिया रिपोर्ट्स को भ्रांतिपूर्ण बताया क्योंकि इन रिपोर्ट्स में जिस ऑक्सीजन की बात की गई है वह औद्योगिक ऑक्सीजन है जो कि मेडिकल ऑक्सीजन से कहीं अलग होती है।

देश के 3 सबसे बड़े डॉक्टर की 35 बातें: कोरोना में Remdesivir रामबाण नहीं, अस्पताल एक विकल्प… एकमात्र नहीं

देश में कोरोना वायरस तेजी से फैल रहा है। 2.95 लाख नए मामले सामने आने के बाद देश में कुल संक्रमितों की संख्या बढ़ कर...

‘गैर मुस्लिम नहीं कर सकते अल्लाह शब्द का इस्तेमाल, किसी अन्य ईश्वर से तुलना गुनाह’: इस्लामी संस्था ने कहा- फतवे के हिसाब से चलें

मलेशिया की एक इस्लामी संस्था ने कहा है कि 'अल्लाह' एक बेहद ही पवित्र शब्द है और इसका इस्तेमाल सिर्फ इस्लाम के लिए और मुस्लिमों द्वारा ही होना चाहिए।

आज वैक्सीन का शोर, फरवरी में था बेकारः कोरोना टीके पर छत्तीसगढ़ में कॉन्ग्रेसी सरकार ने ही रचा प्रोपेगेंडा

आज छत्तीसगढ़ के स्वास्थ्य मंत्री इस बात से नाखुश हैं कि पीएम ने राज्यों को कोरोना वैक्सीन देने की बात नहीं की। लेकिन, फरवरी में वही इसके असर पर सवाल उठा रहे थे।

प्रचलित ख़बरें

रेप में नाकाम रहने पर शकील ने बेटी को कर दिया गंजा, जैसे ही बीवी पढ़ने लगती नमाज शुरू कर देता था गंदी हरकतें

मेरठ पुलिस ने शकील को गिरफ्तार किया है। उस पर अपनी ही बेटी ने रेप करने की कोशिश का आरोप लगाया है।

मधुबनी: धरोहर नाथ मंदिर में सोए दो साधुओं का गला कुदाल से काटा, ‘लव जिहाद’ का विरोध करने वाले महंत के आश्रम पर हमला

बिहार के मधुबनी जिला स्थित खिरहर गाँव में 2 साधुओं की गला काट हत्या कर दी गई है। इससे पहले पास के ही बिसौली कुटी के महंत के आश्रम पर रात के वक्त हमला हुआ था।

रेमडेसिविर खेप को लेकर महाराष्ट्र के FDA मंत्री ने किया उद्धव सरकार को शर्मिंदा, कहा- ‘हमने दी थी बीजेपी को परमीशन’

महाविकास अघाड़ी को और शर्मिंदा करते हुए राजेंद्र शिंगणे ने पुष्टि की कि ये इंजेक्शन किसी अन्य उद्देश्य के लिए इस्तेमाल नहीं किया जा सकता है। उन्हें भाजपा नेताओं ने भी इसके बारे में आश्वासन दिया था।

‘सुअर के बच्चे BJP, सुअर के बच्चे CISF’: TMC नेता फिरहाद हाकिम ने समर्थकों को हिंसा के लिए उकसाया, Video वायरल

TMC नेता फिरहाद हाकिम का एक वीडियो सोशल मीडिया में वायरल है। इसमें वह बीजेपी और केंद्रीय सुरक्षा बलों को 'सुअर' बता रहे हैं।

हाँ, हम मंदिर के लिए लड़े… क्योंकि वहाँ लाउडस्पीकर से ऐलान कर भीड़ नहीं बुलाई जाती, पेट्रोल बम नहीं बाँधे जाते

हिंदुओं को तीन बातें याद रखनी चाहिए, और जो भी ये मंदिर-अस्पताल की घटिया बाइनरी दे, उसके मुँह पर मार फेंकनी चाहिए।

रवीश और बरखा की लाश पत्रकारिताः निशाने पर धर्म और श्मशान, ‘सर तन से जुदा’ रैलियाँ और कब्रिस्तान नदारद

अचानक लग रहा है जैसे पत्रकारों को लाश से प्यार हो गया है। बरखा दत्त श्मशान में बैठकर रिपोर्टिंग कर रही हैं। रवीश कुमार लखनऊ को लाशनऊ बता रहे हैं।
- विज्ञापन -

 

हमसे जुड़ें

293,787FansLike
82,850FollowersFollow
394,000SubscribersSubscribe