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₹27000 करोड़ का निवेश, 27000 नौकरियाँ: जानें- कैसे सिर्फ असम ही नहीं, पूरे भारत की किस्मत से जुड़ा है टाटा का ये सेमीकंडक्टर प्लांट

असम के जागीरोड में टाटा इलेक्ट्रॉनिक्स द्वारा ₹27,000 करोड़ के निवेश से विकसित की जा रही सेमीकंडक्टर परियोजना भारत की तकनीकी आत्मनिर्भरता का नया प्रतीक बन गई है।

21वीं सदी को तकनीकी क्रांति का दौर माना जा रहा है और इस क्रांति की रीढ़ हैं सेमीकंडक्टर चिप्स। हमारे हाथों के स्मार्टफोन से लेकर अंतरिक्ष में भेजे जाने वाले उपग्रहों तक, आधुनिक जीवन का हर पहलू इन छोटी-सी दिखने वाली चिप्स पर निर्भर है। 5G संचार से लेकर आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और रक्षा प्रणालियों तक, सेमीकंडक्टर चिप्स आज वैश्विक अर्थव्यवस्था और तकनीकी स्वतंत्रता का सबसे महत्वपूर्ण घटक बन चुके हैं।

ऐसे समय में जब दुनिया सेमीकंडक्टर आपूर्ति श्रृंखला में विविधता लाने की दिशा में सोच रही है, भारत ने खुद को एक उपभोक्ता के साथ-साथ एक वैश्विक निर्माता के रूप में भी स्थापित करने का लक्ष्य रखा है। इसी महत्वाकांक्षी यात्रा में एक नया अध्याय जुड़ रहा है, और वह है पूर्वोत्तर भारत के असम में सेमीकंडक्टर उद्योग का उदय।

असम के जागीरोड में टाटा इलेक्ट्रॉनिक्स द्वारा लगभग ₹27,000 करोड़ के निवेश से विकसित की जा रही सेमीकंडक्टर परियोजना भारत की तकनीकी महत्वाकांक्षा का प्रतीक है। यह एक OSAT (आउटसोर्स सेमीकंडक्टर असेंबली एंड टेस्ट) सुविधा है, जहाँ सेमीकंडक्टर वेफर्स को काटने, पैकेजिंग और परीक्षण का काम किया जाएगा।

यह विनिर्माण प्रक्रिया का अंतिम और अत्यंत महत्वपूर्ण चरण है, जो चिप्स को अंतिम उपयोग के लिए तैयार करता है। एक अनुमान के अनुसार इस परियोजना की क्षमता प्रतिदिन लगभग 48 मिलियन (4.8 करोड़) चिप्स को प्रोसेस करने की है। यह आँकड़ा अपने आप में इस परियोजना के पैमाने और इसके वैश्विक प्रभाव की क्षमता को दर्शाता है।

यह परियोजना संपूर्ण औद्योगिक पारिस्थितिकी तंत्र (इकोसिस्टम) का आधार है। इससे लगभग 27,000 लोगों को प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से रोजगार मिलने की संभावना है। इसके आसपास इलेक्ट्रॉनिक्स विनिर्माण, लॉजिस्टिक्स, आपूर्ति श्रृंखला प्रबंधन और रखरखाव सेवाओं जैसे सहायक उद्योगों का एक व्यापक जाल विकसित होगा।

यह स्थानीय अर्थव्यवस्था के लिए एक मल्टीप्लायर इफेक्ट पैदा करेगा, जिससे छोटे और मझोले उद्यमों को बढ़ावा मिलेगा और क्षेत्र में कौशल विकास के नए अवसर खुलेंगे। यह पूर्वोत्तर भारत के औद्योगिक परिदृश्य को पूरी तरह से बदलने की क्षमता रखता है, जिसे लंबे समय से आर्थिक विकास की मुख्यधारा से दूर माना जाता था।

इस परियोजना की सफलता के पीछे निश्चित रूप से माननीय प्रधानमंत्री की नीयत, निर्णय और नीति जिम्मेदार हैं। प्रधानमंत्री जी के नेतृत्व में, भारत सरकार ने सेमीकंडक्टर जैसे रणनीतिक क्षेत्र को सर्वोच्च प्राथमिकता दी है। ‘इंडिया सेमीकंडक्टर मिशन’ और ‘सेमीकॉन इंडिया प्रोग्राम’ जैसी दूरदर्शी पहलों के माध्यम से, देश में सेमीकंडक्टर विनिर्माण को बढ़ावा देने और वैश्विक निवेश को आकर्षित करने का एक स्पष्ट रोडमैप तैयार किया गया है। इन नीतियों को जमीन पर उतारने के लिए आवश्यक संसाधन और राजनीतिक इच्छाशक्ति भी दिखाई गई।

इसी कड़ी में, असम में इस परियोजना को मूर्त रूप देने में असम के जनप्रिय मुख्यमंत्री श्री हिमंत बिस्वा सरमा की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण रही है। उनकी सरकार ने निवेशकों के लिए अनुकूल माहौल बनाने में कोई कसर नहीं छोड़ी। भूमि आवंटन से लेकर आवश्यक प्रशासनिक स्वीकृतियों में तेजी लाने तक, हर कदम पर सक्रिय और दूरदर्शी प्रशासनिक रवैया देखने को मिला। यह सार्वजनिक-निजी भागीदारी का एक आदर्श उदाहरण है, जहां केंद्र सरकार की स्पष्ट नीति, राज्य सरकार की उत्सुकता और एक निजी क्षेत्र की दिग्गज कंपनी के सामर्थ्य ने मिलकर एक ऐतिहासिक परियोजना को जन्म दिया।

इस परियोजना का एक और प्रेरणादायक पहलू यह है कि यह उसी स्थान पर विकसित की जा रही है, जहाँ कभी नागाँव पेपर मिल हुआ करती थी। वर्षों से बंद पड़ी इस औद्योगिक इकाई की जमीन अब एक अत्याधुनिक सेमीकंडक्टर प्लांट का घर बन रही है। यह परिवर्तन केवल भूमि के उपयोग में बदलाव नहीं है, बल्कि यह एक युगांतरकारी बदलाव का प्रतीक है। यह असम के औद्योगिक इतिहास के एक अध्याय के समापन और एक नए, उज्ज्वल अध्याय के आरंभ का प्रतीक है।

असम की भौगोलिक स्थिति इस परियोजना को एक अतिरिक्त रणनीतिक लाभ प्रदान करती है। दक्षिण-पूर्व एशिया के निकट स्थित होने के कारण, असम भारत की ‘एक्ट ईस्ट पॉलिसी’ का एक स्वाभाविक प्रवेश द्वार है। उन्नत कनेक्टिविटी और बुनियादी ढाँचे के विकास के साथ, यह क्षेत्र भविष्य में वैश्विक इलेक्ट्रॉनिक्स आपूर्ति श्रृंखला का एक महत्वपूर्ण कड़ी बन सकता है। यह न केवल निर्यात के नए रास्ते खोलेगा, बल्कि दक्षिण-पूर्व एशियाई देशों के साथ आर्थिक और तकनीकी सहयोग को भी बढ़ावा देगा।

वैश्विक स्तर पर भी इस परियोजना की पहुंच बढ़ रही है। अमेरिकी सेमीकंडक्टर दिग्गज क्वालकॉम के साथ संभावित सहयोग की पहल, इस परियोजना को अंतरराष्ट्रीय तकनीकी पारिस्थितिकी तंत्र से जोड़ती है। इस तरह की साझेदारियां उन्नत इलेक्ट्रॉनिक और ऑटोमोटिव मॉड्यूल के निर्माण को बढ़ावा दे सकती हैं, जिससे भारत न केवल घरेलू जरूरतों को पूरा कर सकेगा, बल्कि वैश्विक बाजार में भी एक विश्वसनीय आपूर्तिकर्ता के रूप में उभर सकेगा।

असम के जागीरोड में बन रहा यह सेमीकंडक्टर प्लांट एक औद्योगिक परियोजना से कहीं बढ़कर है। यह नए भारत के निर्माण की उस सोच का प्रतिबिंब है, जो क्षेत्रीय असमानताओं को मिटाकर पूरे देश को विकास के पथ पर अग्रसर करने का सपना देखती है। यह परियोजना इस बात का जीता-जागता प्रमाण है कि सही नीति, ईमानदार नीयत और प्रभावी निष्पादन के साथ चलने पर विकास न केवल संभव है, बल्कि वह तीव्र गति से और व्यापक पैमाने पर होता है।

यह पूर्वोत्तर के युवाओं के लिए नए सपने देखने और उन्हें साकार करने का एक मंच तैयार कर रहा है। यदि यही गति और प्रतिबद्धता बनी रही, तो आने वाले वर्षों में असम न केवल पूर्वोत्तर बल्कि संपूर्ण भारत का एक प्रमुख तकनीकी केंद्र और वैश्विक सेमीकंडक्टर मानचित्र पर एक चमकता सितारा बनकर उभरेगा। यह ‘आत्मनिर्भर भारत’ की उस यात्रा का एक महत्वपूर्ण पड़ाव है, जो देश को तकनीकी आत्मनिर्भरता और आर्थिक समृद्धि की ओर ले जा रही है।

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मनीष मिश्रा
मनीष मिश्रा
नेशनल कमिश्नर, भारत स्काउट एवं गाइड

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